सबसे पहले 250 ग्राम कुद्रुम का फूल ले लेना है और इस फूल की पंखुड़ी को इसके बीज से अलग कर के अच्छे से धो कर साफ कर लेना है। अब कढ़ाई को गैस में चढ़ा लीजिये और इसमें दो बड़ा चम्मच सरसो का तेल डालिये। तेल गर्म होने के बाद इसमें आधा छोटा चम्मच जीरा ,एक लाल सूखी मिर्च तोड़ कर चटका लीजिये। अब कुद्रुम को इसमें डाल दीजिये साथ ही स्वादानुसार नमक ,चुटकी भर हल्दी और आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर डाल कर ढ़क दीजिये और 10 मिनट तक पकाए। अच्छी तरह से पक जाने पर अब दो बड़ा चम्मच चीनी डाल दीजिये। अब चीनी अच्छे से चटनी में मिल जाने पर गैस बंद कर दीजिये। तैयार है कुद्रुम की मज़ेदार खट्टी मीठी चटनी।
नमस्कार मैं झारखंड के रांची से आसी मोबाइल वानी पर आज एक झारखंड की सुप्रसिद्ध रेस्पी के बारे में बताने जा रही हूं तो आइए जानते हैं चिल्का रोटी झारखंड की एक पारंपरिक और काफी फेमस फूड डिश है. ये रेसिपी स्वादिष्ट होने के साथ ही हेल्दी और न्यूट्रीशन से भरपूर है. आप अगर हर बार कुछ नया खाने का शौक रखते हैं तो चिल्का रोटी आपके स्वाद को बढ़ाने के लिए एक बढ़िया ऑप्शन हो सकता है. चिल्का रोटी को बनाना आसान है । तो आइए जानते हैं इसे बनाने में लगने वाली सामग्री और इसे बनाने की विधि चावल – डेढ़ कप ,चना दाल – पौन कपनमक – स्वादानुसार चिल्का रोटी बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन लें और उसमें चावल और चने की दाल डालकर रातभर भिगोकर रख दें. सुबह पानी छानकर चावल और दाल को निकाल ले. इसके बाद भीगे हुए दाल, चावल को मिक्सर ग्राइंडर में पीसकर गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें. अब एक बर्तन में इस पेस्ट को डालकर स्वादानुसार नमक मिला दें और पेस्ट को अच्छी तरह से फेंट लें.अब मीडियम आंच पर नॉनस्टिक पैन/तवा रखकर गर्म करें. इस दौरान तवे पर थोड़ा सा तेल लगाकर उसे चिकना कर लें. अब छोटी कटोरी या चम्मच की मदद से चावल,दाल के पेस्ट को तवे पर फैला दें और उसे लाइट ब्राउन होने तक सेकें. इसके बाद चिल्का रोटी को पलट दें और दूसरी तरफ भी हल्का तेल लगाकर उसे सुनहरा होने तक सेंके. इसी तरह सारे पेस्ट की चिल्का रोटी तैयार कर लें. अब इन्हें चटनी या दही के साथ गर्मागर्म सर्व करें.
संवाददाता सुशांत पाठक 24/03/2024 रविवार को भद्रा प्रातः 9:24 से प्रारंभ होकर रात्रि 10:27 तक रहेगा। भद्रा समाप्त होते ही होलिका दहन रविवार को फाल्गुन पूर्णिमा तिथि पर रात्रि 11:13 से 12:27 के बीच किया जाएगा। होलिका जलते ही फाग गीत गूंज उठेंगे और होलियारों की टोली मस्ती में डूब जाएगी। होलिका की परिक्रमा करने और अन्न की आहुति देने से पद प्रतिष्ठा एश्वर्य की प्राप्ति होती है। पुराणों के अनुसार हमें जीवन के लिए जरूरी सभी चीजें प्रकृति से ही मिलती हैं, और जो भी चीज हमें प्रकृति से मिलती है, वही चीजें हम भगवान को समर्पित करके आभार व्यक्त करते हैं। होली के समय में गेहूं चने के साथ कई अन्य फसलें पक जाती हैं। फसल आने पर उत्सव मनाने की परंपरा है। पुराने समय से ही जब फसल पकती है तब होली जलाकर उत्सव मनाया जाता है, जलती होली को यज्ञ मानकर नया अन्न भगवान को अर्पित किया जाता है। तंत्र साधना के लिए बहुत खास होती है रविवार की होलिका दहन जब रविवार को होलिका दहन होता है, तो ये रात तंत्र साधना के लिए बहुत खास होती है तंत्र साधक होलिका दहन की रात अपने इष्ट देव का विशेष पूजन करते हैं गुरु के मंत्रों का जाप करते हैं। रात में जागकर तपस्या और ध्यान किया जाता है। भविष्य पुराण के अनुसार नारद जी के कहने पर युधिष्ठिर ने फाल्गुन पूर्णिमा पर कई बंदियों को अभय दान दिया था। बंदियों को मुक्त करने के बाद कंडे जलाकर होली मनाई गई थी। होलिका दहन में आहुतियां देना बहुत ही जरूरी माना गया है, होलिका में कच्चे आम, नारियल भुट्टे ,या सप्तधान्य , नई फसल का कुछ भाग गेहूं, उड़द ,मूंग, चना, जौ, चावल ,मसूर आदि की आहुति दी जाती है। ऐसा करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही गुप्त शत्रुओं का नाश होता है। साथ ही आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। वही होलिका दहन की रात्रि तंत्र साधना के रात्रि होने के कारण इस रात्रि आपको कुछ सावधानियां रखनी चाहिए सफेद खाद्य पदार्थों की सेवन से बचें मानता है, होलिका दहन वाले दिन टोने टोटके के लिए सफेद खाद्य पदार्थ का उपयोग किया जाता है। इसलिए इस दिन सफेद खाद्य पदार्थों के सेवन से सावधानी बरतें।
नमस्कार मैं झारखंड के रांची से ऋषिकांत मोबाइल वानी पर आज एक झारखंड की प्रसिद्ध रेस्पी के बारे में बताने जा रहा हूं जो खाने में स्वादिष्ट तो है ही लेकिन स्वास्थ्य के लिये भी काफी फायदेमंद माना जाता है। जिस कारण इसका बडे पैमाने में तस्करी भी होती है और इसे खाने से दस्त में आराम मिलता है। और साथ ही साथ इसमें बीटेन और साइनोजे नाम का कंपाउंड पाया जाता है जो अपच और लूज मोशन से बचाता है। तो आईए जानते हैं इसके बारे में और इसके बनाने की विधिके बारे में, ये एक सब्जी है । जिसे बांस करील की सब्जी कहते हैं । इसे बनाने के लिए हमें बांस (करील) 1/2 किलो, जीरा 2 चम्मच, धनिया पाउडर 2 चम्मच, हरी मिर्च ,1 छोटी चम्मच हल्दी ,10 कालिया लहसुन , 1 इंच अदरक , तेल ,पानी ,नमक स्वादनुसार,रोगिनी मिर्च आदि चीजों की जरूरत होंगी। और हम इस इस प्रकार से बनाएंगे। सबसे पहले बांस करील को लेकर उसे छोटे टुकड़ो में काट लेंगे और फिर उसके बाद पानी में थोड़ा सा दही डाल कर उसे भिगोकर रात भर के लिए रख देंगे। इससे इसकी महक चली जाएगी। फिर इसे 2 से 4 बार अच्छे से धो लेंगे। फिर इसे कुटनी में अच्छे से मोटा कूट लेंगे। कूटने के बाद एक जाली की सहायता से इससे इसका सारा पानी निकाल देंगे। जिससे बांस करील की महक नहीं आएगी। अब इसे एक बड़े बर्तन में रख देंगे। उसके बाद एक कढ़ाई में तेल गरम कर लेंगे फिर एक छोटा चम्मच जीरा डाल देंगे। फिर बांस करील को डाल कर 10 मिनट तक अच्छे से भूनेंगे। उसके बाद गैस की आंच धीमी कर लेंगे और 5 मिनट तक उसे ढक कर पाकायेगे। उसके बाद उसे कुछ देर तक अच्छे से भूनते हुए चलएंगे ताकि ये अच्छे से भुन् जाये,फिर मसाला के लिए एक मिक्सी में 1 छोटा चम्मच जीरा,अदरक, 10 लहसुन की कली , हरी मिर्ची और पानी डाल कर पतला पीस लेंगे। फिर बांस करील को चलाएंगे उसके बाद बांस करील में सारा मसाला डाल देंगे, इसी समय इसमें हल्दी और पीसी धनिया भी डाल देंगे। उसके बाद अच्छे रंग के लिए रोगनि लाल मिर्च डालेंगे। फिर मसाले को अच्छे से चलाते हुए 5 मिनट के लिए भूनेंगे। जब मसाला भून जाए तो उसमे नमक डाल देंगे। गैस की आंच धीमी कर देंगे। इसे 10 मिनट के लिए पकने के लिए ढक कर छोड़ देंगे। आपकी बांस करील की सब्जी बन कर तैयार हो गई है। इसे खाने के साथ सर्व करे। धन्यवाद
झारखण्ड राज्य के जमशेदपुर से मधुबाला ने मोबाईल वाणी के माध्यम से तिलौरी बनाने की जानकारी दिया। सामग्री - 300 ग्राम उड़द दाल,100 ग्राम सफेद तिल नमक स्वादानुसार। विधि - उड़द दाल को पानी में चार-पांच घंटे भिगो दें। फिर मिक्सी में पीस कर बारीक़ मोटा पेस्ट बना लें ।बड़े कटोरे में निकाल कर अच्छी तरह से फेट लें । फटने के समय ध्यान रखना है कि लगातार एक ही दिशा में फेटना है। जब दाल हल्का हो जाए तो उसमें नमक और सफेद तिल डालकर एक बार और फेट लें । अब घोल तिलौरी बनने के लिए तैयार है। तेज धुप में पतला कपड़ा,सूती साड़ी का दुपट्टा को फैला दें। फिर कपड़े पर छोटी छोटी बड़ियाँ हाथो से डालकर बना लें । जब बरियाँ धुप में अच्छे से सुख जाए,तब सभी बरियों को सावधानी से हाथ से धीरे-धीरे निकाल लें और थाली या सुप में फैलाकर इसे एक दिन और धुप दिखाएं । इसे जितना अच्छे से सुखाया जाएगा,उतना ही अच्छा बनेगा और इसमें कीड़े भी नही लगेंगे। अच्छे से सूखा कर बडियों को डब्बे में बंद कर के रख देंगे। जब खाना हो तो,कढ़ाई में सरसों का तेल गर्म करेंगे और उसमें एक मुट्ठी तिलौरी को डाल कर तल लेंगे। सुनहरा लाल होने पर बहार निकल लेंगे और दाल-चावल के साथ परोसेंगे।ध्यान रहे तलते समय थोड़ा-थोड़ा ही तलेंगे,वो भी जितनी जरुरत होगी उतना ही। बाकी डब्बे में बंद कर के एक साल तक स्टोर किया जा सकता है।
सबसे पहले एक पेन में गुड़ डाले लें और इसमें 3 -4 बड़ा चम्मच पानी मिला है। ध्यान रखे पानी को ज्यादा नहीं मिलाना है। अगर ज्यादा पानी मिल जाएगा तो मिक्सचर को सूखने में समय लग जाएगा। अब लगातार इसे धीमी आंच पर चलाते रहना है जब तक गुड़ अच्छी तरह से पिघल न जाए। ध्यान रहे गुड़ को धीमे आंच में ही पकाना है। अगर आप अधिक आंच में पकाएगे तो गुड़ का रंग काला और कड़वा हो जाएगा। जब गुड़ में झाग आने लगेगा तो इसमें कसा हुआ सूखा नारियल मिलाना है और इस मिक्सचर को अच्छे से मिलाना है। अब इलाइची पाउडर डाल कर अच्छी तरह से मिला लें। ध्यान रहे मिक्सचर को ज्यादा सूखाना नहीं है। अगर ज़्यादा सूख जाता है तो आप थोड़ा पानी मिला सकते है। आपका गुड़ ,नारियल का मिक्सचर तैयार है। अब एक पैन में चावल का आटा को डालकर धीमी आंच में दो से तीन मिनट तक ड्राई रोस्ट कर लें।ध्यान रखियेगा की आटा लगातार चलाते हए रोस्ट करना है। जब चावल आटा से हल्की सोंधी खुशबु आने लगेगी तो चावल को एक बड़ा कटोरा में निकाल लें। अब पैन में एक कप पानी डाले और ढक कर एक उबाल आने दें। अगर नमक का इस्तेमाल करना है तो आधा छोटा चम्मच नमक डाल दें। और इसमें रोस्ट किया हुआ चावल का आटा को डाल कर लगातार चलाते हुए अच्छे से मिला लें । अब चावल का आटा पानी में अच्छे से मिल जाने के बाद उसे दो से तीन मिनट के लिए ढक कर रख दें। इसके बाद इसे बड़ा कटोरा में निकाल कर थोड़ी देर ठंडा कर लें। अब हल्की गर्म रहने पर आटा को गूंद ले। गुंदा हुआ आटा में थोड़ा सूखा चावल का आटा मिला कर रोल कर लें और छोटा छोटा लोई बना लें। अब लोई को कटोरी की तरह बनाए और उसमे गुड़ और नारियल का मिक्सचर डाल कर गुजिया का आकर दें। ध्यान रहे चारो और से गुड़ और नारियल का मिक्सचर चावल आटा के बीच में अच्छे से सील हो जाए। अब इसे 7 से 10 मिनट तक भाप लें।10 मिनट बात इसे चेक कर लें, पीठा थोड़ा कड़ा रहे तो यह अच्छी तरह से पक चुका है। आपका चावल और गुड़ नारियल का पीठा बनकर तैयार है।
दोस्तों, हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे। अगर आपके पास भी है कोई मज़ेदार चुटकुला, तो रिकॉर्ड करें मोबाइल वाणी पर, फ़ोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।
हम सभी रोज़ाना स्वास्थ्य और बीमारियों से जुड़ी कई अफवाहें या गलत धारणाएं सुनते है। कई बार उन गलत बातों पर यकीन कर अपना भी लेते हैं। लेकिन अब हम जानेंगे उनकी हकीकत के बारे में, वो भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद से, कार्यक्रम सेहत की सच्चाई में। याद रखिए, हमारा उद्देश्य किसी बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि लोगों को उत्तम स्वास्थ्य के लिए जागरूक करना है। सेहत और बीमारी को लेकर अगर आपने भी कोई गलत बात या अफवाह सुनी है, तो फ़ोन में नंबर 3 दबाकर हमें ज़रूर बताएं। हम अपने स्वास्थ्य विशेषज्ञों से जानेंगे उन गलत बातों की वास्तविकता, कार्यक्रम सेहत की सच्चाई में।
जल ही जीवन है। यह पंक्तियाँ हम बचपन से सुनते आ रहे हैं। आज के समय में जब दुनिया शुद्ध जल की कमी से जूझ रही है, यह पंक्तियाँ और सार्थक हो जाती हैं। भारत में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। कई राज्य हैं जो भूजल की कमी के चरम बिंदु को पार कर चुके हैं। हर साल 22 मार्च के दिन विश्व जल दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमारे जीवन में जल के महत्व और उसके संरक्षण को समर्पित है।इस विश्व जल दिवस पर पानी की बर्बादी को रोके और जल को प्रदूषित होने से बचाये। मोबाइल वाणी के पुरे परिवार की ओर से आप सभी को विश्व जल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
Transcript Unavailable.
