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बिहार राज्य के नालंदा जिला के हिलसा से पंकज जी मोबाइल वाणी के माध्यम से प्रवासी मजदुर राहुल जी से बातचीत कर रहे है जिसमें राहुल जी का कहना है कि ये पिछले तीन साल से दिल्ली में काम कर रहे हैं उन्हें बिहार से बाहर जाकर काम करना पड़ता है क्यूंकि बिहार में ज्यादा फैक्टरियां नहीं है और हैं भी तो थोड़ा बहुत है और वहाँ पैसा कम दिया जाता है क्यूंकि स्थानीय लोगों को पैसे कम दिए जाते हैं और बाहर से आए लोगों को थोड़े ज्यादा पैसे दिए जाते हैं।बिहार में रोजगार के अवसर भी कम हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जब वे बिहार से बाहर काम करने जाते हैं तो वहां उन्हें ज्यादा काम दिया जाता है और पैसे कम परन्तु वहाँ के स्थानीय लोगों को ज्यादा पैसे और कम काम दिए जाते हैं।और वहां जो बाहर से कार्य के लिए लोग आते हैं,वो वहाँ के स्थानीय लोगों की तुलना में बहुत ही कम छुट्टी दी जाती हैं तथा स्थानीय लोग कम वेतन हेतु आंदोलन करते हैं।जो की बाहरी लोग नहीं करते।वहाँ के जो बॉस होते है,वो बाहरी लोगों को जब चाहे हटा सकते हैं।उन्होंने कहा कि अगर अपने ही राज्य में सरकार अधिक से अधिक फैक्ट्रियां खुलवा दे, तो किसी भी मजदुर को काम के लिए बाहर पलायन नहीं करना पड़ेगा। और वो अपने परिवार के साथ रह कर ख़ुशी ख़ुशी काम कर सकते हैं।

बिहार राज्य के जमुई जिला के गिद्धौर प्रखंड से संतोष कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से प्रवासी मजदूरों के दशा के बारे में इंद्रदेव चौहान से बातचीत कर रहे हैं। इसमें इंद्रदेव जी का कहना है कि इन्होनें रोजगार की खोज में 1998 में जामनगर,गुजरात में मोटीखाबड़ी में काम ढूंढने गए थे वहाँ रिलायन्स कंपनी में काम कर रहे थे ,उस समय भी इस तरह की घटना घटी थी। उस समय यूपी के लड़के पर इल्जाम न देकर बिहारी पर इल्जाम डाल दिया गया और बिहारी को खदेड़ भगाना शुरू कर दिया।लेकिन उन्होंने ठान लिया था की काम करेंगे और वापस आकर अपना घर बनाएंगे। उन्होंने यह भी कहा की बिहारी लोग बहुत ही मेहनती होते हैं और जीवन हथेली में रख कर काम में ध्यान देते हैं।पर उस घटना के दहसत में फंसने के कारण उन्हें वाहन से भागना पड़ा।इंद्रदेव ने बताया की किसी भी संविधान में ऐसा नहीं लिखा है की प्रवासी लोगों के साथ भेद भाव किया जाए या वो बाहर जाकर स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर सकते। परन्तु वहां के लोग और राजनीति के कुछ चक्कर इस तरह की हरकत कर रहे हैं। उनहोंने यह भी कहा की इसका जिम्मेदार अभी सरकार ही है। प्रवासी मजदूरों के साथ सरासर अन्याय हो रहा है, ऐसा नहीं होना चाहिए। क्यूंकि प्रवासी मजदुर एक सपने लेकर बाहर काम करने जाते हैं। और उनहोंने बताया कि कोई भी इंसान देश में स्वतंत्र रूप से काम कर सकते है।

बिहार राज्य के नालंदा जिला से संतोष कुमार जीविका मोबाइल वाणी के माध्यम से रिजवान जी से प्रवासी मजदूरों के बारे में बातचीत कर रहे है जिसमें रिजनवान जी का कहना है कि किसी एक ने अपराध किया और वो पकड़ा भी गया तो ऐसी परिथिति में क्या किसी एक खास भाषा के बोलने वाले लोगो को टारगेट करना सही नहीं है।अभी जो पलायन का सिलसिला जारी है,इसमें कुछ असामाजिक तत्व भी है जो की शांति को भांग करने की कोशिश कर रहे है ,ये काफी दुखद है ये नहीं होना चाहिए। देश की एकता अखंडता में प्रश्न चिन्ह लगाता है। अधिकतर लोग जो पलायन करते है गुजरात की ओर,पजाब की ओर,महाराष्ट्र की और क्योकि यहाँ पर उन लोगो को करने के लिए काम नहीं होता है। अगर उन्हें अपने क्षेत्र पर ही रोजगार मिल जाये तो वे अपना घर बार बच्चे पत्नी को छोड़ कर बाहर नहीं जायेंगे । जब लोगो की जरुरत पूरी नहीं होती तो लोग काम के तलाश में बाहर चले जाते है।यह पलायन का सबसे बड़ा कारण है।

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