बिहार राज्य के नालंदा जिला के हिलसा से पंकज जी मोबाइल वाणी के माध्यम से प्रवासी मजदुर राहुल जी से बातचीत कर रहे है जिसमें राहुल जी का कहना है कि ये पिछले तीन साल से दिल्ली में काम कर रहे हैं उन्हें बिहार से बाहर जाकर काम करना पड़ता है क्यूंकि बिहार में ज्यादा फैक्टरियां नहीं है और हैं भी तो थोड़ा बहुत है और वहाँ पैसा कम दिया जाता है क्यूंकि स्थानीय लोगों को पैसे कम दिए जाते हैं और बाहर से आए लोगों को थोड़े ज्यादा पैसे दिए जाते हैं।बिहार में रोजगार के अवसर भी कम हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जब वे बिहार से बाहर काम करने जाते हैं तो वहां उन्हें ज्यादा काम दिया जाता है और पैसे कम परन्तु वहाँ के स्थानीय लोगों को ज्यादा पैसे और कम काम दिए जाते हैं।और वहां जो बाहर से कार्य के लिए लोग आते हैं,वो वहाँ के स्थानीय लोगों की तुलना में बहुत ही कम छुट्टी दी जाती हैं तथा स्थानीय लोग कम वेतन हेतु आंदोलन करते हैं।जो की बाहरी लोग नहीं करते।वहाँ के जो बॉस होते है,वो बाहरी लोगों को जब चाहे हटा सकते हैं।उन्होंने कहा कि अगर अपने ही राज्य में सरकार अधिक से अधिक फैक्ट्रियां खुलवा दे, तो किसी भी मजदुर को काम के लिए बाहर पलायन नहीं करना पड़ेगा। और वो अपने परिवार के साथ रह कर ख़ुशी ख़ुशी काम कर सकते हैं।
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