मध्यप्रदेश राज्य के शिवपुरी जिला से लालू शर्मा जी मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि पुरे भारत में कई राज्यों में कई जगह के प्रवासी मजदूरों को रोजगार नहीं मिलता है परन्तु उनके साथ इतना अत्याचार होता कि उनको रोजगार तो मिल जाता है,लेकिन कई लोगों को तो उनके पेशे से वापस आना पड़ता है,क्यूंकि उनको भुगतान नहीं मिलता है । उन्होंने बताया कि कई लोगों को फैक्ट्रियों में रोजगार मिल जाता है,परन्तु उस फैक्ट्री में ऐसा बंधक बना दिया जाता है। कई लोगों की तो जान भी चली जाती है। लालू शर्मा ने बताया कि कई ऐसे लोग जो अनेक राज्यों में फैक्ट्रियां चला रहे हैं वे प्रवाशी मजदूरों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार कैसे कर लेते हैं ,क्या उन्हें इस चीज की पश्चाताप नहीं होती ? उन्होंने मध्यप्रदेश के शिवपुरी के बारे में बताया कि वहां पहले खदानें थीं ,फैक्ट्रियां थीं। उन्होंने यह भी बताया कि झापर शिवपुरी में बिच चौराहे पर इतने मजदुर देखने को मिलते हैं कि सुबह सात से ग्यारह बजे तक चक्के जाम के माहौल हो जाते हैं। पहले फैक्ट्रियां थीं की उन्हें छोटा मोटा रोजगार हाथ आ जाता था परन्तु अब फैक्ट्री बंद होने की वजह से उन लोगों को सुबह से लेकर दोपहर तक रोजगार तलाशना पड़ता है, फिर भी रोजगार नहीं मिल पता। सुप्री के कई ऐसे मजदुर हैं जिन्हें अपने राज्य छोड़कर दूसरे राज्यों में जाना पड़ा काम की तलाश में पर जाने के बाद उन्हें खबर मिलती है कि उन मजदूरों को सपोर्टी में रोजगार तो मिल जाते है , किन्तु वहाँ के जो मालिक होते वो उनपर बहुत अत्याचार करते हैं। कई लोगों का वेतन रोक लिया जाता है या कई लोगों को बंधक बना कर जबरन काम कराया जाता है।लालू शर्मा ने इन मुद्दों को मद्दे नजर रखते हुए सरकार से कहा कि सरकार मजदूरों के लिए चुनाव आते ही बड़े बड़े वादे करते हैं चाहे वह केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार और चुनाव जीत जाने के बाद वो उन पर से ध्यान हटा देते हैं।

बिहार राज्य के जमुई जिला के गिद्धौर प्रखंड के भौरातांड़ गांव से रंजन जी मोबाइल वाणी के माध्यम से वहां के प्रवासी से बातचीत कर रहे हैं, कि जो गुजरात की घटनाएं हुई हैं वहाँ के निर्देशक, बिहारी के साथ गलत व्यवहार कर रहे हैं काण्ड वहाँ के स्ताहनीय लोग कर रहे और इल्जाम बिहार के लोगों पर डाला जा रहा है।बिहार के लोगों के गरीबी का फ़ायदा उठाया जा रहा है।

बिहार राज्य के जमुई जिला के गिद्धौर प्रखंड से रंजन जी मोबाइल वाणी के माध्यम से बनाडीह गांव के महेश कुमार यादव से प्रवासी मजदूरों के बारे में बातचीत कर रहे है। जिसमे महेश जी का कहना है कि गुजरात में उनके रहने की कोई सुविधा नहीं होती है और वो जिस कंपनी में काम करते हैं, वहाँ बारह घंटे काम करने के बाद भी पैसे समय पर नहीं देते हैं ।और एक महीने के पैसे काट लिए आते हैं। उन्होंने यह भी बताया की उनके साथ वहां बहुत भेद भाव किया जाता है। भाषा अलग होते हैं। रहन-सहन में भी असमानता होती है। उन्होंने यह भी कहा की सरकार द्वारा जो भी कल्याणकारी योजनाएं चल रहीं हैं,इन सब का लाभ उन्हें नहीं मिल पता।उनके परेशानी के बारे में उन्होंने कहा कि बिहार के वासी होने के कारण डर-डर कर रहना पड़ता है क्यूंकि वहाँ उनका कोई अपना नहीं होता। यहां तक की सरकार भी उनका साथ नहीं देती। उनके बोल बाले नहीं चलते।उन्हें वहाँ मजदूरी कर रहना पड़ता है। बहुत से ऐसे काम जैसे,पेंट करना,लेबर की तरह मसाला मिलाना,सुई धागा का काम करना। उन्होंने अपने सपने से सम्बंधित जानकारी देते हुए कहा कि उनका सपना था वो काम करेंगे,वापस घर जाकर बच्चों को अच्छी शिक्षा देंगे,पर उनका सपना पूरा नहीं हो पाया।इसके सरकार को वो दोषी ठहराते है क्यूंकि जब बिहार में बाहर के लोग काम करने आते हैं तो उन्हें पूरा मान सम्मान दिया जाता है वैसे ही हमे भी दूसरे जगह मान सम्मान दिया जाए।

बिहार राज्य के गिद्धौर जिले से डब्लू पंडित ,भूत पूर्व प्रमुख श्रवण कुमार से अपनी ख़ास बात चित के दौरान मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहा हैं, की गुजरात में बिहारियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है इस विषय पर बिहार सरकार को भारत सरकार से बात चित करनी चाहिए। और राज्य सरकार।गुजरात सरकार से भी बात करनी चाहिए की ये भारतीय संगी व्यवस्था को ना तोड़ें।न बर्बाद करें वर्ण इससे देश की हानि होगी।उन्होंने यह कहा की जो बिहारी गुजरातसे भाग कर वापस बिहार आते हैं, उनके साथ बेरोजगारी की समस्या, भुखमरी जैसी दिक्कतें होतीं हैं। परन्तु इस पर बिहार सरकार कुछ कदम नई ले रही।उन्होंने यह भी जानकारी दी की शुरू से ही जो बनी हैं वो बिहार और बिहार के लोगों के लिए कुछ नहीं करती। बस अपनी ही रोटी सकती है सरकार। अपने स्वार्थवश ही वो हमेशा से कार्य कर रहे हैं।अगर सरकार ने कोई भी व्यवस्था दी होती तो आज बिहारियों को दूसरे देश में पलायन नहीं करना पड़ता।डब्लू पंडित ने यह भी कहा की जो वापस बिहार लौट आते है उन्हें रोजगार देने के लिए बिहार सरकार के पास कुछ भी नहीं है। इसी कारण वश बिहार के लोग पलायन कर वहां के बेइज्जतों का शिकार बनते हैं।इस पर उन्होंने कहा की बिहार सरकार को उन्हें रोजगार दिलाने के लिए खेती के लिए पहले पानी की व्यवस्था करानी चाहिए तथा उचित मात्रा और उचित मूल्य पर खाद और बीज की मोहिया कराए। और रोजगार के लिए यहाँ उदद्योग बनवाए।उन्होंने यह भी बात राखी की जब से बिहार और झारखं अलग हुए हैं तब से सारे औद्योगिक उदद्योग झारखण्ड राज्य में चले गए जिससे बिहार उद्द्योग के नाम पर शून्य बना पड़ा है।यहां उद्द्योग बनने से ही बिहार का विकास हो सकता है।

बिहार राज्य के जमुई जिला के गिद्धौर प्रखंड से गांव रतनपुर में भीम राज मोबाइल वाणी के माध्यम प्रवासी श्रमिकों के बारे में बातचीत कर रहे है,जिसमे संतोष जी का कहना है कि ये मुंबई में रिक्शा चलाते हैं और उनके कार्य के दौरान उन्हें बहुत सी परेशानी होती है। वहां के स्थानीय लोग बिहारी भाइयों को हेय की दृष्टि से देखते है और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हैं। उन्होंने ने यह भी बताया की, कार्य के दौरान उन्हें भय बना रहता है कि कही किसी जबरन बात छेड़ कर वहां के लोग हमसे लड़ाई न शुरू कर दे, फिर हमे घर वापस आना पड़ सकता है, उनकी मज़बूरी है की वो वहाँ काम करते हैं।

बिहार राज्य के जमुई जिला के गिद्धौर प्रखंड से भीमराज मोबाइल वाणी के माध्यम से रतनपुर निवासी नितीश कुमार से बातचीत कर रह यही। जिसमे नितीश जी का कहना है कि ये मुंबई में रिक्शा चलाते है।उनहोंने बताया की महाराष्ट्र के लोग बिहार के लोगों के साथ भेद भाव करते है,उनहोंने यह भी जानकारी दी की वहां के आर टी ओ वाले लोग बिहारी लोगों को बहुत परेशान करते हैं और बेवजह पकड़ कर 13 हज़ार रुपया फाइन लिए। मज़बूरी में उन्हें फाइन भरना पड़ा।और महाराष्ट्र के लोगों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार नहीं करते।इसलिए ये सारी गलती वे महाराष्ट्र सरकार की मानते हैं ।

बिहार राज्य के जमुई जिला के गिद्धौर प्रखंड से संजीवन कुमार सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से मौरा गांव में अजीत सिंह से प्रवासी मजदूरों के बारे में बातचीत कर रहे हैं जिसमे अजीत सिंह का कहना है कि ये गुजरात में एक कंपनी में आईटीआई लेबल का काम करते हैं। वहाँ के अस्थानीय लोग भी उनके साथ काम करते हैं और वहाँ उनके साथ भेद भाव भी किया जाता है वहां के तीन लोग जो हिंदी भाषी नहीं हैं, वे उन्हें हाय दृष्टि से देखते हैं उनके जो साहब थे वो मध्य प्रदेश के हैं वो हमेशा कहते थे की शुरूआती काम में थोड़ी दिक्कत होती है धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा। ऐसा कहकर वो उन्हें सांत्वना देते थे।उन्होंने बताया की ड्यूटी के लिए उन्हें सुबह पांच बजे ही उठना पड़ता था क्यूंकि 5 से 6 बजे तक ही कंपनी के कॉलोनी में काम मिलती थी।उन्होंने बताया की वो 8 बजे कंपनी चले जाते थे ,वहाँ जाते ही जो उनके तीन सीनियर लोग थे वो उनके ऊपर मजाक उड़ाते थे। और जब इनकी शिकायत लेकर वो बॉस के पास जाते तो उनके बॉस उन्हें बहला कर वापस कर देते थे। उन्होंने कहा की बिहार में काम नहीं मिलती आईटीआई करने के बाद भी कोई उपाय नहीं मिला। सरकारी में प्रयास करने के बाद भी आरक्षण की वजह से नहीं होता था और प्राइवेट कंपनियां जो हैं वहाँ जान-पहचान के लोगो को ले लिया जाता था। इस वजह से उन्हें गुजरात जाना पड़ा काम के लिए। इन सब की जिम्मेदार सरकार है।

बिहार राज्य के जमुई जिला के गिद्धौर प्रखंड से रंजन कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से बनाडीह गांव के रवि पंडित से प्रवासी मजदूरों के बारे में बातचीत कर रहे है जिसमे रवि जी का कहना है कि प्रवासी मजदूरों को वहां के रहन सहन भाषा सबकी परेशानी होती है प्रदेश के लोग प्रवासी लोगों को मजदुर की दृष्टि से देखते हैं और उनकी हिंदी भाषी को गलत मतलब देते हैं।इसलिए उन्हें अपना गांव वापस आना पड़ा। उन्हें सरकार द्वारा चलाई गई कोई भी योजना का लाभ नहीं मिलता साथ ही उन्हें एक कमरा दिया जाता है और आठ से दस मजदूरों को रहने पर बाध्य किया जाता है अगर उन्होंने विरोध किया तो मार पीट तक बात आ जाती है, इसलिए प्रवासी लोग शांत रहकर चुपचाप उनकी बातों का पालन करते हैं।वहाँ उन्हें डर कर रहना पड़ता है। क्योंकि उनके साथ छोटे-छोटे बच्चे होते हैं। अगर उनसे ज्यादा बात हुई तो वो लोग मारने पे उतर आते हैं।उनकी हिंदी भाषी को निचा नजर से देखा जाता है।उनके बिहारी होने की वजह से उनको साथ बैठने तक नहीं दिया जाता है। रवि पंडित ने बताया की वो लोग वहाँ भगवान् भरोसे रहते हैं क्यूंकि वहाँ उनका और कोई अपना नहीं होता।साथ ही वहाँ उनके रहने का कोई उचित जगह नहीं होता न ही निश्चित काम।उनहोंने अपने सपने के बारे में भी कहा की, उनका सपना था की वो काम करेंगे और वापस आकर अपने बच्चों की पढ़ाई पूरी करेंगे और साथ ही बूढ़े माँ बाप के सपनो को पूरा करेंगे।परन्तु उनके सपने अधूरे रह गए और वो वहां से जान बचा कर भाग आए अपने गांव।

बिहार राज्य के जमुई जिला के गिद्धौर प्रखंड से रंजन कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से बनाडीह गांव के राखी जी के साथ मजदूरों के पलायन पर बातचीत कर रहे है। जिसमे राखी जी ने कहा कि प्रवासी लोगों को अनजान शहर में भाषा,रहन,सहन में दिक्कत होती है। वहां के लोग हिंदी भाषा को गलत भाव में लेते हैं और प्रवासी लोगों को मजदुर की दृष्टि से देखा जाता है, साथ बैठने तक की अनुमति नहीं होती।वहां की सरकार किसी भी कल्याणकारी योजना का लाभ प्रवासी लोगों को नहीं देते है। उन्होंने बताया की जबतक वो वहां रहते हैं भय के साथ रहते हैं क्यूंकि उनके साथ उनकी पूरी परिवार होती अगर बात छिड़ गई तो वो मार पर उतर आते हैं।वहां के स्थानीय लोग प्रवासी लोगों को बिहारी कह कर सम्बोधित करते हैं और हमेशा निचा भाव से देखते हैं। राखी ने बताया की वो वहाँ भगवान् भरोसे रहते क्यूंकि वहां न ही रहने की उचित जगह होता है और न ही उचित काम।उन्होंने अपने सपने के बारे में कहा की प्रदेश जाकर काम करेंगे और बच्चों को अच्छी शिक्षा देंगे, साथ ही बूढ़े माँ बाप की सेवा करेंगे और उनके अधूरे सपने को पूरा करेंगे पर उनके यह सपने पुरे नहीं हो पाए।और उन्हें वो शहर छोड़ कर भागना पड़ा। इन सब की जिम्मेदार वो प्रदेश सरकार को समझते हैं। राखी ने यह भी कहा की अपने राज्य सरकार को गुजरात,महाराष्ट्र और असम के सरकार से बात करनी चाहिए कि जो भी मजदुर वहाँ काम करने जाते हैं उनकी पूरी सुरक्षा देनी चाहिए और दोनों सदस्यों में आपसी सहमति होनी चाहिए।

बिहार राज्य के जमुई जिला के गिद्धौर प्रखंड से संतोष कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से प्रवासी मजदूरों के दशा के बारे में इंद्रदेव चौहान से बातचीत कर रहे हैं। इसमें इंद्रदेव जी का कहना है कि इन्होनें रोजगार की खोज में 1998 में जामनगर,गुजरात में मोटीखाबड़ी में काम ढूंढने गए थे वहाँ रिलायन्स कंपनी में काम कर रहे थे ,उस समय भी इस तरह की घटना घटी थी। उस समय यूपी के लड़के पर इल्जाम न देकर बिहारी पर इल्जाम डाल दिया गया और बिहारी को खदेड़ भगाना शुरू कर दिया।लेकिन उन्होंने ठान लिया था की काम करेंगे और वापस आकर अपना घर बनाएंगे। उन्होंने यह भी कहा की बिहारी लोग बहुत ही मेहनती होते हैं और जीवन हथेली में रख कर काम में ध्यान देते हैं।पर उस घटना के दहसत में फंसने के कारण उन्हें वाहन से भागना पड़ा।इंद्रदेव ने बताया की किसी भी संविधान में ऐसा नहीं लिखा है की प्रवासी लोगों के साथ भेद भाव किया जाए या वो बाहर जाकर स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर सकते। परन्तु वहां के लोग और राजनीति के कुछ चक्कर इस तरह की हरकत कर रहे हैं। उनहोंने यह भी कहा की इसका जिम्मेदार अभी सरकार ही है। प्रवासी मजदूरों के साथ सरासर अन्याय हो रहा है, ऐसा नहीं होना चाहिए। क्यूंकि प्रवासी मजदुर एक सपने लेकर बाहर काम करने जाते हैं। और उनहोंने बताया कि कोई भी इंसान देश में स्वतंत्र रूप से काम कर सकते है।