मै सरीता मै बेलॉव के नीवासी हूँ बेलॉव के नहर पुल है टुटा है

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श्री बजरंगबली के प्रतिष्ठान से निकाला गया जल यात्रा। हरसिद्धि हरसिद्धि विधानसभा क्षेत्र के मठंलोहियार पंचायत के भगताहाॅं टोला में श्री बजरंगबली जी के प्राण प्रतिष्ठान के शुभ अवसर पर जल यात्रा पर हजारों श्रद्धालुओं ने लिया भाग। वही इस पुनीत कार्य के शुभ अवसर पर साथ में हरसिद्धि मंडल के महामंत्री श्री छोटे लाल कुशवाहा जी शक्ति केंद्र प्रभारी श्री समीर वर्मा जी श्री कमलेश तिवारी जी एवं सभी गणमान्य लोग रहे मौजूद।

बहुत दिनो.से चापाकल खराब है

बलॉक का रोड है बुरी तरह से खराब है

एससी-एसटी आवासीय विद्यालयों में नामांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एससी-एसटी कल्याण विभाग ने हर हाल में एक अप्रैल से यहां शैक्षणिक सत्र शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए व्यापक योजना बनायी गयी है। पहली और छठी कक्षा में नामांकन की योजना है। पहली कक्षा में लॉटरी सिस्टम से नामांकन होगा, जबकि छठी कक्षा में 100 अंकों की प्रवेश परीक्षा होगी। नामांकन में अभिभावक की आय की कोई सीमा भी नहीं होगी। 15 फरवरी तक आवेदन होगा और 15 से 28 मार्च तक नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इस संबंध में विभाग ने जानकारी भी सार्वजनिक कर दी है। इस समय सूबे में 87 एससी-एसटी आवासीय विद्यालय हैं। यह व्यवस्था सभी विद्यालयों के लिए लागू है। एससी-एसटी कल्याण विभाग की योजना है कि किसी सूरत में अब शैक्षणिक सत्र विलंबित न हो, न ही आवेदन की प्रक्रिया ही लंबी चले। कोरोना काल में विद्यालयों की पढ़ाई पटरी से उतरी थी। हाल यह हो गया कि कई विद्यालयों में न केवल पठन-पाठन की स्थिति बिगड़ी बल्कि कई सीट भी रिक्त रह गए। ऐसे में अब विभाग ने सत्र को लेकर पहले ही अपनी तैयारी पूरी कर ली है। छठी कक्षा में 100 अंकों की परीक्षा छठी कक्षा में प्रवेश के लिए 100 अंकों की परीक्षा होगी। इसमें हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान व सामाजिक विज्ञान के 20-20 अंकों की परीक्षा होगी। दो घंटे की वस्तुनिष्ठ परीक्षा होगी।

सूबे में राजस्व मामले में पूर्वी चम्पारण जिला दिसम्बर माह में दूसरे पायदान पर आया है। दाखिल खारिज, सर्किल ऑफिस का निरीक्षण, लगान वसूली, परिमार्जन,सीडब्ल्यूजेसी के शपथ,भूमि सेटलमेंट,सरजमीनी लोकभूमि का पर्यवेक्षण,जल निकाय से हटाए गये अतिक्रमण व अतिक्रमण वाद के निष्पादन मामले में राज्य स्तर पर राजस्व शाखा पूर्वी चम्पारण 84.12 अंक हासिल कर दूसरा स्थान प्राप्त किया है। प्रथम स्थान पर बांका,तीसरे स्थान पर पूर्णिया,चौथे स्थान पर मधेपुरा व पांचवें स्थान पर सारण जिला आया है। दाखिल खारिज में 80.26 केस का निष्पादन कर विभाग ने 28.09 अंक प्राप्त किया है। सर्किल ऑफिस के निरीक्षण में 5 अंक प्राप्त हुआ है। लगान वसूली व जमाबंदी अपडेशन का निष्पादन 79.36 प्रतिशत कर 15.87 अंक हासिल किया है। परिमार्जन के पर्यवेक्षण में 92.91 प्रतिशत मामले का निष्पादन किया गया है। जिससे 4.65 अंक प्राप्त किया है। सीडब्ल्यूजेसी केस के तहत 90.81 प्रतिशत शपथ पत्र दायर कर 13.62 प्रतिशत अंक प्राप्त किया है। भूमि बंदोबस्त कर 83.49 प्रतिशत ऑनलाइन रिपोर्टिंग में 8.35 अंक प्राप्त किया है। सरजमीनी भूमि व जलनिकाय से अतिक्रमण पर्यवेक्षण में 4.47 अंक हासिल किया है।अतिक्रमण वाद के निष्पादन में राजस्व शाखा ने 4.07 प्रतिशत अंक प्राप्त किया है। दाखिल खारिज में 4,84,618 केस का डिस्पोजल जिले में दाखिल खारिज के लिए 5 लाख 15 हजार 705 आवेदन ऑनलाइन मिले थे। इसमें कुल 4 लाख 84 हजार 618 केस का निष्पादन किया गया है। 1 लाख 97 हजार 84 केस रिेजेक्ट कर दिया गया है। 21 दिन से अधिक समय से 21 हजार 983 केस पेंडिंग है। दाखिल खारिज के निष्पादन का केस 93.97 प्रतिशत पर पहुंच गया है। कहते हैं अधिकारी पर समाहर्त्ता पवन कुमार सिन्हा ने बताया कि दाखिल खारिज के निष्पादन,लगान वसूली आदि मामले में बेहतर प्रदर्शन कर पूर्वी चम्पारण जिला राज्य स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त किया है।

जिले में 2 लाख 21 हजार 855 मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के लाभुक हैं जिसमें करीब दो हजार आवेदन पेंडिंग है। इस योजना के तहत मिले आवेदनों में14 हजार 929 आवेदन विभिन्न कारणों से रिजेक्ट किये गये हैं। फिलहाल जिले में जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग के द्वारा 2 लाख 3 हजार लाभुकों को वृद्धा पेंशन का भुगतान किया जा रहा है।जो आवेदन पेंडिंग है वह पंचायत,प्रखंड व जिला स्तर पर है। जिसे निष्पादित करने की प्रक्रिया चल रही है। मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के तहत 60 से 79 वर्ष के वृद्धजन को मासिक 400 रुपये पेंशन का भुगतान किया जाता है। जबकि 80 वर्ष से उपर के वृद्धजनों को मासिक 500 रुपये पेंशन का भुगतान किया जाता है। जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक धीरज कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के तहत लाभुकों को भुगतान किया जा रहा है। जो पेंडिंग आवेदन है उसके निष्पादन की प्रक्रिया चल रही है। पेडिंग आवेदन का अतिशीघ्र निष्पादन किया जाएगा। ढाका में 14888 आवेदन आरटीपीएस के माध्यम से अप्लाई किए गए थे, जिसमें 13994 आवेदन स्वीकृत हुए।   प्रखंड स्तर पर 11 आवेदन अभी लंबित है।   मधुबन में वृद्धजन पेंशन योजना के 12248 लाभुक हैं। इसमें मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के 6122 व केन्द्र सरकार के वृद्धजन पेंशन योजना के 6126 लाभुक हैं। वृद्धजन पेंशन योजना में 15 आवेदन पेंडिंग हैं ।  गोविन्दगंज में 16 हजार 99 पेंशनधारी हैं। 213 सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का आवेदन पेंडिंग है।   पहाड़पुर प्रखंड में मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के तहत कुल 7991 लाभार्थियों को वर्तमान में लाभ मिल रहा है।जबकि अन्य वृद्धजन पेंशन योजना के तहत 2115 लाभार्थियों को लाभ मिल रहा है।

जिले में 9 अंगीभूत कॉलेज हैं। सभी कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी से पठन-पाठन प्रभावित है। जिन विषयों में शिक्षक हैं, उनमें छात्रों के आने पर कक्षाएं संचालित होती है।कुछ विषयों में तो नामांकन के लिए सबसे अधिक मारामारी रहती है। वहीं, कुछ विषयों में तो अधिकांश सीटें खाली ही रह जा रही हैं। वहीं, शिक्षकों की कमी से छात्रों की टॺूशन पर निर्भरता बढ़ रही है।इतिहास, भूगोल, मनोविज्ञान व जन्तु विज्ञान में है सबसे अधिक आकर्षणशहर के एलएनडी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अरुण कुमार के अनुसार, ऑनर्स में कला के विषयों इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान, म नोविज्ञान व हिन्दी में नामांकन के लिए छात्र-छात्राएं सबसे अधिक इच्छुक रहते हैं। इन विषयों के बाद अर्थशास्त्र, अंग्रेजी, उर्दू, सामजिक विज्ञान में नामांकन का च्वाइस रहता है। जबकि दर्शन शास्त्र विषय में सबसे कम नामांकन की स्थिति है। वहीं, विज्ञान में जन्तु विज्ञान के प्रति सबसे अधिक आकर्षण देखा जा रहा है। इसके बाद भौतिकी, गणित, रसायन शास्त्र विषयों की मांग है। सबसे कम वनस्पति शास्त्र में नामांकन हो रहा है।

बिहार राज्य से सामुदायिक संवाददाता लोकप्रिय राजेश मोबले वाणी के माध्यम से बता रहे है कि अब शिक्षक दो से चार वर्ष पहले ही प्रधानाध्यापक के लिए पात्रता हासिल कर लेंगे। राज्य सरकार ने इसके लिए शिक्षकों की अनुभव अवधि में कमी कर दी है। अब माध्यमिक शिक्षक 8 वर्ष जबकि उच्च माध्यमिक शिक्षक 4 वर्ष के अनुभव के आधार पर ही प्रधानाध्यापक के लिए परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।पहले प्रधानाध्यापक के पद पर नियुक्ति के लिए माध्यमिक शिक्षकों को 10 वर्ष की सेवा करनी थी जबकि उच्च माध्यमिक शिक्षकों के लिए 8 वर्ष की सेवा आवश्यक थी। बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा हाल में ही इसी आधार पर आवेदन लेकर परीक्षा भी ली गई थी। कई शिक्षक संगठनों द्वारा इस अनुभव की अनिवार्यता को कम करने का सुझाव दिया गया था। राज्य में दोनों तरह के स्कूलों की संख्या लगभग 10 हजार है।