बिहार राज्य के जमुई जिला के गिद्धौर प्रखंड से रंजीत पांडेय ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि इस बदलते मौसम में बच्चों का रखें ध्यान। ठण्ड के मौसम में बच्चों के बीमार पड़ने की ज्यादा आशंका रहती है। बच्चों को गर्म कपड़े पहना कर रखें
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राज्य बिहार, जिला गिद्धौर,गंगरा पंचायत नमस्कार गिधर मोबलवानी मुझे रंजीत पांडे दोस्तों , आवाज ये आपकी शक्ति है बोलेंगे तो बदलेगा इस अभियान के तहत हम गिधर प्रखंड के सती गांव में हैं जो गंगरा पंचायत में आता है और यहां सरकार काम कर रही है । जिन सात लोगों को इस योजना के तहत नल जल योजना का लाभ मिलना चाहिए , शायद इसका आधार यहां किया जा रहा है , तो भाई हम ग्रामीणों से बात करते हैं , तो आप का नाम क्या हुआ मैं विरेंद्र कुमार दास , विरेंद्र कुमार दास जी , आपका घर कहाँ है , आप जी अच्छा तो आपके जहाँ हैं । एम . ए . आर . योजना का लाभ मिल रहा है । मल जल के अजनबी मिल रहा है तो शर घर के लिए की ज्यादा नहीं है टैंक वाला प्रति लोहाक भुकाया है जो पानी ज्यादा डाला घर घर के मेरे पानी नहीं पड़ता है अच्छा कितने के लिए यह अब दो साल से टूट गया है । तो आपने इसके बारे में शिकायत नहीं की है , अगर आप शिकायत कर रहे हैं , तो किसी चीज पर कार्रवाई की जा रही है , श्रीमान , भाई , अब यह लिखा है , फिर यह चल रहा है , अब क्या होगा , फिर यह होगा , श्रीमान , टंकी टूट जाएगी । इसलिए सभी घरों में पनीर की आपूर्ति नहीं हो पाएगी । पातभी जारे पाट घर में होता है तो ऐसा होता है , अच्छा तो आप मुखिया की बात की है , अच्छा तो क्या हुआ , ऊपर से होगा आदर था । यह सब काम होगा , यह समाल जल योजना की शर्त है । साथियों , महादली से सबसे ज्यादा पानी बचाने का दावा करने वाली सरकार महादली छोड़ चुकी है । रविदास हैं और अगर आप मानते हैं तो अनुसूचित जाति के लोग यहां रह रहे हैं लेकिन इसके बावजूद यहां के लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल रहा है और इसके लिए ये लोग प्रयास कर रहे हैं लेकिन सफल नहीं हो रहे हैं इसलिए यह लाभ लोगों को दिया जाना चाहिए ।
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बिहार राज्य के जमुई जिला के गिद्धौर प्रखंड से रंजीत पांडेय ने मोबाईल वाणी के माध्यम से बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर किसान आंदोलन कर रहे हैं।किसान मेहनत कर के सिंचाई की सुविधा के आभाव में भगवान भरोसे फसल उपजाते हैं। ऐसे में फसल बर्बाद हो जाने से किसानों को बहुत हानि होती है।इसके अलावा बीज और खाद महंगे खरीदने पड़ते हैं। फसल बेचने के समय किसानों को लागत के मुकाबले कीमत बहुत कम मिलती है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
