Transcript Unavailable.
साथियों, मनुष्य एवं समस्त प्राणी जगत को जीवित रहने के लिए भोजन एक प्रमुख संघटक होता है। और भोजन पाना हर व्यक्ति का अधिकार होता है लेकिन दुर्भाग्य से दुनिया में हर किसी के पास खाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं है कई लोग ऐसे हैं, जो हर दिन भूखे पेट सोने को बेबस हैं । लेकिन दूसरी ओर यह भी देखने को मिलता है की लोग भोजन की बर्बादी भी करते हैं। लोगों में भोजन के महत्व को समझाने और जरूरतमंद लोगों को दो वक्त के भोजन मिल पाए इस उद्देश्य से हर वर्ष 16 अक्टूबर को विश्व खाद दिवस मनाया जाता है।
झारखण्ड राज्य के खरसांवा से विजय कुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से जानना चाहते हैं कि विकलांगता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कौन सा दस्तावेज लगेंगे
दिल्ली एनसीआर से नाज़ परवीन ने श्रमिक वाणी के माध्यम से सोहेल से साक्षात्कार लिया । सोहेल ने बताया कि इनकी मम्मी के ईलाज के लिए ये पंथ अस्पताल ले कर आये हैं । यहाँ हार्ट के इलाज के लिए अस्सी हज़ार का खर्च बताया जा रहा है। उनको अस्पताल में भर्ती नही कर रहे हैं। उन्हें सहायता की जरूरत है
Transcript Unavailable.
श्रोता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि इनके पापा का पैर से पैरालाइज्ड हैं और इनका ईलाज ईएसआई में करवाते हैं , मगर वहां सुनवाई नही होती है । ये चाहती हैं इनके पापा का ईलाज जल्द से जल्द हो
- क्या प्रवासी मजदूरों का नाम राशन कार्ड से कट जायेगा - जॉब कार्ड बनवाने के लिए क्या करना होगा - इन प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
पंथ अस्पताल से नाज़ परवीन ने श्रमिक वाणी के माध्यम से शाहरुख़ से साक्षात्कार लिया। शाहरुख़ ने बताया कि इन्होने पंथ अस्पताल में अपने भाई को ओपीडी के जरिए एडमिट करवाया है,लेकिन अभी तक ऐड नहीं किया गया है । भाई की हालत बहुत ख़राब है। पंथ अस्पताल में यह कई मरीजों की शिकायत है।
पंथ अस्पताल से नाज़ परवीन ने श्रमिक वाणी के माध्यम से राजू से साक्षात्कार लिया। राजू ने बताया कि ये सहारनपुर से इलाज के लिए अपनी पत्नी को लेकर आये हैं। किसी ने कहा मरीज को लेकर एमरजेंसी में जाओ। एमरजेंसी में लेकर गए तो वहां कहा गया कि ओपीडी में लेकर जाओ। ओपीडी में बी लाइन लगा कर देखेंगे। दो दिनों से फुटपाथ पर पड़े हैं। अस्पताल ने एडमिट नहीं किया
श्रमिक विहार से खुशबू ने मोबाईल वाणी के माध्यम से बताया कि ईएसआई में इनका इलाज सही तरीके से नही हुआ।कोई टेस्ट नही किया गया और दवा लिख दिया गया। दवा खाकर तबियत और ज्यादा ख़राब हो गया।कंपनी से 15 दिन की छुट्टी लेकर ईएसआई का इलाज करवाया।मगर कोई लाभ नही हुआ और अब प्राइवेट में अपनी ईलाज करवा रही हैं। ईएसआई कटती है मगर फायदा कोई नही है। 15 दिन की छुट्टी के पैसे भी कंपनी ने नही दिया है। इन सब कारणों से ये बहुत परेशान हैं
