उत्तरप्रदेश राज्य के गाज़ियाबाद ज़िला से रवि ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि बच्चे पढ़ने की उम्र में धुप में बिसलेरी पानी बोतल की सप्लाई कर पैसे कमा रहे है
उत्तरप्रदेश राज्य के गाज़ियाबाद ज़िला से रवि ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि चूड़ी की फैक्ट्री में क़रीब 17 बाल श्रमिक डिजाइनिंग का काम करते है जो सभी झारखण्ड के निवासी है जिसमे 7 बच्चों का आधार कार्ड नहीं है। इतनी छोटी उम्र में बच्चे जलती लौ में डिजाइनिंग का काम करते है। बच्चों पर पूछने पर कहते है कि ग़रीबी के कारण प्रदेश आ कर काम कर रहे है ऑडियो पर क्लिक कर सुनें पूरी ख़बर...
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उत्तरप्रदेश राज्य के गाज़ियाबाद ज़िला से रवि ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि बिंदी कंपनी में एक बाल श्रमिक जिनकी ऊँगली कट गई थी ,कंपनी ने उन्हें कुछ पैसे देकर इलाज़ करवा दिया। अब कंपनी सुपरवाइज़र ने उन्हें कुछ पैसे दे कर वापस गाँव भेज दिए। उन्हें कहा गया कि जब स्वस्थ हो जाएगे तो दोबारा काम के लिए बुलाया जाएगा और उन्हें 6 हज़ार के बजाय 8 हज़ार वेतन देंगे।कंपनी इसी तरह से मनमानी करते है
उत्तरप्रदेश राज्य के गाज़ियाबाद ज़िला से रवि ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि लोहा मंडी में कुछ बाल श्रमिक है जिनके आधार कार्ड भी नहीं बने है ,वो काम कर रहे है। जिन्हे बेसिक सैलरी 6500 रूपए है। जिनके पास आधार कार्ड है ,उनके उम्र कम है वो भी कम सैलरी पर काम कर रहे हैं। कोरोना काल में त्रस्त परिवार अपने बच्चे को काम पर भेजने को मज़बूर है
उत्तरप्रदेश राज्य के गाज़ीपुर ज़िला से रवि ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि लगभग डेढ़ महीना पहले टीका के लिए पंजीकरण करवाए थे अब जाकर 13 जुलाई का नंबर उन लोगों को मिला है
उत्तरप्रदेश राज्य के गाज़ियाबाद ज़िला से रवि ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि कम्पनियाँ लेबर चैट से बाल श्रमिकों को कम वेतन पर काम देते है। बच्चों को पीस बनाने का काम देते है जिसमे उन्हें पीस के हिसाब से पैसे नहीं देते उन्हें 5 या 6 हज़ार रूपए ही सैलरी दे देते है वहीं काम पर रखने से पहले बच्चों का आधार कार्ड भी नहीं मांगते है।
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