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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग ज़िला से टीकनारायण प्रसाद मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि पूरे देश में शिक्षक दिवस मनाया जा रहा हैं। वो इस शिक्षक दिवस में भाग लेने वाले सारे बच्चों एवं शिक्षकों को धन्यवाद कह रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा कई शिक्षकों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। साथ ही यह कहना चाहते हैं कि आज जो देश में दोहरी शिक्षा नीति का प्रचलन हैं उसे समाप्त करनी चाहिए। धनी परिवार के बच्चे निजी स्कूलों से पढ़ाई करते हैं वही देखा जाए तो गरीब परिवार के बच्चें सरकारी स्कूल में दाख़िला लेते हैं। टीकनारायण जी के अनुसार सभी बच्चों को सरकारी स्कूल से ही पढ़ाई करनी चाहिए।एक ही सामान्य नीति से शिक्षा लेनी चाहिए। निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल से ही उपलब्ध होने वाली किताबें,कपड़े लेना अनिवार्य हैं।निजी स्कूल प्रबंधन शिक्षा को व्यापार बना कर रखे हैं। ऐसी व्यापार पर रोक लगानी की आवश्यकता हैं।

झारखंड राज्य के हज़ारीबाग़ जिले से रूस्तम खान मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि वर्तमान युग में सुरक्षित पर्यावरण एवं भूमि संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौध रोपण करने की जरुरत है .संतुलित पर्यावरण के लिए पेड़ पौधे लगाना और उसे सुरक्षा और संरक्षण प्रदान करना हर व्यक्ति का समाज के प्रति कर्तव्य है, क्योंकि मानव जीवन के प्राण वायु ऑक्सीजन ,हमें पेड़ पौधों से ही मिलती है.साथ ही पर्याप्त वर्षा और सुरक्षित मानव जीवन जीने के लिए हमें वृक्ष रोपण के साथ साथ पेड़ पौधों की सुरक्षा एवं संरक्षण पर जोर देना चाहिये, क्योंकि आज वृक्ष रोपण पर्यावरण को संतुलित रखने का एक मात्र उपाय है. फिर भी आए दिन यह देखा जाता है कि हर क्षेत्र में पेड़ों की कटाई धड़ल्ले से की जाती है ,जिस पर सभी के जनसहयोग एवं लोगों में जागरुकता ला कर अंकुश लगा सकते हैं. इससे हम पेड़ों से हरियाली ला कर अपने क्षेत्र में खुशहाली ला सकते हैं ,इस प्रकार पौध रोपण एवं वृक्ष रोपण बहुत जरुरी है।

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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला के तीक नारायण प्रसाद झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि बरसात का दिन राहत तो देता हैं परन्तु व्रजपात की घटना को भी न्योता देता हैं। बरसात के मौसम में अक्सर कई जगह व्रजपात की घटना दखने को मिलती हैं। इससे बचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखनी चाहिए। जैसे ,बारिश के दौरान धातु वाले छाते को प्रयोग में ना लाए। बारिश से बचने के लिए पेड़ों के नीचे शरण ना ले। इसके जगह खाली स्थान पर दोनों एड़ियों को सटा कर जमीं में बैठ जाए और अंगूठे से दोनों कानो को बंद कर ले। अगर कोई व्रजपात की चपेट में आ जाए तो उन्हें तुरंत गोबर की ढेर में गर्दन से नीचे डाल कर रख दे या जल्द ही निकट के अस्पताल में प्राथमिक उपचार के लिए ले कर जाए।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से रुस्तम खान झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि बरसात के दिनों में आकाशीय बिजली अक्सर जानलेवा साबित होती है। खेतों में काम करने वाले, पेड़ों के नीचे पनाह लेने वाले, तालाब में नहाते समय बिजली चमकने पर इसकी आगोश में आने की संभावना अधिक रहती है।लेकिन कुछ उपाय को अपना कर आकाशीय बिजली से बचा जा सकता है।उदाहरण के लिए,वज्रपात के दौरान पेड़ के नीचे न खड़े हों तथा बिजली के खंभों और वृक्षों से दूर रहें ।साथ ही धात्विक वस्तुओं से भी दूर रहना चाहिए ।इस दौरान विद्युत उपकरणों का उपयोग बिलकुल न करें।मोबाइल व टेलीफोन का उपयोग करने से बचें । वज्रपात की घटना से बचाव के लिए भवनों एवं सार्वजनिक इमारतों के ऊपर तड़ित चालक यंत्र लगावाना चाहिए।बज्रपात के चपेट में आने पर जरूरत के अनुसार व्यक्ति को तत्काल प्राथमिक चिकित्सा देने की व्यवस्था करनी चाहिए।

झारखण्ड राज्य के हजारीबाग जिला से बलराम शर्मा झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि त्याग, तपस्या एवं कठिन परिश्रम का दूसरा नाम किसान है। हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है जहां लगभग सत्तर प्रतिशत जनसंख्या आज भी खेती पर निर्भर है। यही वजह है कि हमारे देश में जहां भी देखो गांव ही गांव एवं दूर-दूर तक फैले हुए खेत नजर आते हैं। तपती धूप हो या कड़ाके की सर्दी पड़ रही हो किसान अपने खेतों में काम करते हुए दिखते हैं । किसानों की पूरी जिंदगी मिट्टी से सोना उपजाने की कोशिश में निकल जाती है।किसानों का मुख्य व्यवसाय कृषि अर्थात खेती होती है और मेहनती किसान बिना किसी शिकायत के अपने खेतों में मेहनत करता रहता है।खेतों में फसल उपजाना कोई आसान काम नहीं और फसल की बुआई, फसल की देखभाल, उसकी कटाई और फिर तैयार फसल को बाजार में बेचने जैसी तमाम कोशिशें किसानों को लगातार करते रहना पड़ता है।परन्तु इतनी कड़ी महेनत के बाद भी किसानों को उत्पादित फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पता है। यह कहानी है झारखण्ड राज्य के हजारीबाग जिला की जहाँ पर मौसम के अनुसार अधिक मात्रा में किसान सब्जी की खेती करतें हैं।यहाँ पर मुख्य रूप से टमाटर , भिंडी ,खीरा ,लौकी करेला तथा आलु का खेती की जाती है , परन्तु जब किसान अपने द्वारा उपजाए हुए सब्जी को जिला के मंडी में बेचने जाते हैं, तो उन्हें मजबूरन मंडी के साहूकार को कम मूल्यों में सब्जी बेचना पड़ जाता है। जिसका ख़मियाज किसानों को उठाना पड़ता है, जिससे उनका पूरा परिवार प्रभावित होता है। अतः सरकार को जिला के मंडियों में सरकारी कर्मचारी की नियुक्ति करनी चाहिए तथा फसलों का उच्च समर्थन मूल्य एवं आसान ऋण की उपलब्धी सरकार को सुनिश्चित करनी चाहिए।