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तो दोस्तो, क्या हाल है आप के स्कूटर/ बाइक का? ओर जो दोस्त साइकल की सवारी करते है उनका क्या हाल है? कही वो स्कूटर बाइक वाले साथियों के बारे मे सोचकर मन ही मन मुस्कुरा तो नही रहे है? अगर मुस्कुरा भी रहे हो तो ग़लती उनकी नही है. आख़िर पेट्रोल का दम कुछ शहरों मे 88 रुपय तक पहुच चुका है. ओर बाकी जगहो मे भी 80 के आस पास है दाम जो की सस्ता तो बिल्कुल भी नही है. पर ऐसे मे आप अपने महीने के खर्चे को काबू मे रखने के लिए क्या कर रहे है? ओर इस पेट्रोल डीसल के दाम मे बढ़ोतरी से आप के जिंदगी के किस किस हिस्से मे प्रभाव पड़ा है?साथियों, अगर हम अपने आस पास की घटनाओ पर नज़र डाले तो एक नज़र मे समझ मे आ जाता है की खनिज तेल यानी की पेट्रोल ओर डीजल के बिना हमारी सभ्यता ओर उसका विकास संभव नही है क्योकि विकास के पहिए इस पेट्रोल डीजल से ही तो चलते है! ओर ऐसा सोचना भी ग़लत नही है. आख़िरकार हमारा सब काम यानी की सब्ज़ी उगाने के लिए सिचाई हो या फसल को मंदी तक पहुंचाने के लिए गाडी , डीजल के बिना नही चलेगा. वैसे ही, चाहे घर घर दूध देने के लिए बाइक हो या फिर बच्चे को स्कूल पहुंचाने के लिए ओर कार्य क्षेत्रा मे जाने के लिए स्कूटर हो, पेट्रोल के बिना स्थिर ही रहेगा. पर ऐसे मे प्रदूषण भी तो उतना ही फैल रहा है? आख़िरकार धरती मे मौजूद हर वस्तु मे किसी ना किसी प्रकार मे कार्बन तो होता है ही जिसे जलाने से कार्बन डाइयाक्साइड जैसे हानिकारक गॅस बनते है, चाहे हो गाड़ी मे मौजूद पेट्रोल डीजल हो या फिर कारखाने ओर बिजली बनाने के लिए इस्तेमाल हो रहे कोयला, या फिर खाना पकने के लिए इस्तेमाल हो रहे गॅस या लकड़ी. पर उपाय क्या है इस प्रदूषण से बचने की ओर क्या बिना पेट्रोल डीजल या कोयले का इस्तेमाल किए हमारी ज़िंदेगी चल सकती है? हर ज़िम्मेदार माता पिता अपने संतान के लिए एक सुंदर ओर स्वच्छ दुनिया छोड़ कर जाना चाहता है. क्या आप ने कभी कोशिश की किसी विकल्प का इस्तेमाल कर के प्रदूषण कम करने की? अगर हा तो कौन सा विकल्प ओर उसे इस्तेमाल करने का सबसे बड़ा फायदा क्या हुआ? ओर विकल्प इस्तेमाल करने मे सबसे बड़ी चुनौती क्या आई?देश की आबादी बढ़ने के साथ साथ खनिज तेल की खपत भी बढ़ती जा रही है ओर साथ ही साथ महँगाई भी. ऐसे मे एक किशन की जिंदगी कैसे प्रभावित होती है? ओर क्या मज़दूरो की हालत किसानो से अलग है? जब किराए ओर तेल खर्चे के बोझ से निम्न ओर मध्यम आय वर्ग के लोगो के लिए घर चलाना चुनौती बन जाए तो राजनैतिक तौर पर उनकी क्या भूमिका होनी चाहिए? अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार मे तेल के दाम मे बढ़ोतरीन के कारण ही देश के नागरिको को इस अतिरिक्त खर्चे का बोझ उठना पड़ता है या फिर देश का जीवाश्मा (जीवाष्म) ईंधन के उपर निर्भर होना समास्सया का कारण है..?

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