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दोस्तों, मोबाइलवाणी के अभियान क्योंकि जिंदगी जरूरी है में इस बार हम इसी मसले पर बात कर रहे हैं, जहां आपका अनुभव और राय दोनों बहुत जरूरी हैं. इसलिए हमें बताएं कि आपके क्षेत्र में बच्चों को साफ पानी किस तरह से उपलब्ध हो रहा है? क्या इसमें पंचायत, आंगनबाडी केन्द्र आदि मदद कर रहे हैं?आप अपने परिवार में बच्चों को साफ पानी कैसे उपलब्ध करवाते हैं? अगर गर्मियों में बच्चों को दूषित पानी के कारण पेचिस, दस्त, उल्टी और पेट संबंधी बीमारियां होती हैं, तो ऐसे में आप क्या करते हैं? क्या सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों से बच्चों का इलाज संभव है या फिर इलाज के लिए दूसरे शहर जाना पड रहा है? जो बच्चे स्कूल जा रहे हैं, क्या उन्हें वहां पीने का साफ पानी मिल रहा है? अगर नहीं तो वे कैसे पानी का इंतजाम करते हैं?
बिहार राज्य के भोजपुर ज़िला से हमारे श्रोता मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि पानी को साफ़ करने के कई तरीके है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि पानी कितना गन्दा है और किस उपयोग के लिए चाहिए।पानी को दस से पंद्रह मिनट उबलने से बैक्टीरिया मर जाते है। मोठे कपड़े या मलमल के कपड़े से पानी छान कर मोटे कण छान सकते है। फिटकिरी डाल कर पानी को हिला देने से गन्दगी निचे जम जाता है और ऊपर का पानी साफ़ हो जाता है।आधुनिक तरीके से भी पानी को साफ़ किया जा सकता है जैसे कैंडल मिटटी का फ़िल्टर ,आरओ आदि। पानी में क्लोरीन टेबलेट या ब्लीचिंग डाल कर पानी साफ़ कर सकते है। पीने के लिए स्वच्छ पानी और फ़िल्टर किया हुआ पानी का ही इस्तेमाल करना चाहिए
बिहार राज्य के भोजपुर ज़िला के सन्देश प्रखंड के ग्राम कोरी से नीरज कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि हाथ अच्छे से धोना एक अच्छा तरीका है जिससे हम कई कीटाणु और वायरस से बच सकते है। हाथ के द्वारा हमारे शरीर में कई संक्रमण जाते है और बीमारी का रूप ले लेते है।गंदे हाथों से बच्चों में फ्लू ,दस्त आदि की समस्या हो सकती है। हाथ धोना व्यक्तिगत स्वच्छता का पहला और स्वच्छ कदम है जो समाज को भी स्वच्छ बनाता है। बाहर से घर आने पर हाथ धोना चाहिए ,जानवरों को छूने के बाद हाथ धोना चाहिए,बीमार व्यक्ति की देखभाल के बाद हाथ धोना चाहिए ,इस तरह कई कार्य करने के बाद हाथ धोना चाहिए। साथ ही नल जल की सुविधा के लिए शुल्क देना ज़रूरी है। ऐसा इसलिए ज़रूरी है क्योंकि जल स्रोतों और पानी लाइन की मरम्मत या पाइप में लीकेज या ख़राबी जो भी आती है उसे ठीक करने में पैसे की ज़रुरत पड़ती है। जल को फ़िल्टर करना ,ट्रीटमेंट करने और घरों तक पहुँचाने में संसाधन और श्रमिक दोनों लगते है। अगर लोग शुल्क देंगे तो योजना लम्बे समय तक टिक सकती है और सब को निरंतर पानी मिलता रहेगा। जब लोग शुल्क देते है तो वे इस सुविधा को गंभीरता से लेते है और जल का दुरूपयोग नहीं करते है
