झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि कुछ मामलों में अगर बहु अपने बुजुर्ग सास ससुर को बहुत परेशान करती है जैसे लगातार झगड़े करना तो, अदालतों ने बुजुर्गो के शांतिपूर्ण जीवन के अधिकार को प्राथमिकता देते हुए बहु को घर से निकालने की अनुमति दी है।लेकिन इसके लिए भी उचित प्रक्रिया का पालन किया जाता है। प्रोपर्टी का स्वामित्व अगर पति के माता पिता की निजी संपत्ति है और पति का उस पर कोई कानूनी अधिकार नहीं है तो कोर्ट के पुराने फैसले में बहु के अधिकार सीमित किए गए थे। परन्तु हाल के फैसले में ससुराल वाले बहु को आसानी से घर से नही निकाल सकते हैं। ऐसा करने के लिए उन्हें कानूनी रास्ता अपनाना होगा। बहु को घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत आवास का अधिकार प्राप्त है, जब तक की कोई विशेष न्यायिक स्थिति ना हो।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि ससुराल वाले बहु को मनमाने ढंग से घर से नहीं निकाल सकते हैं। क्योंकि दिल्ली हाई कोर्ट के हालिया फैसलों के अनुसार शादी के बाद बहु का साझा घर में रहने का अधिकार होता है। भले ही घर उनके पति के माता पिता के नाम पर हो, उन्हें घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत कानूनी प्रक्रिया के बिना जबरन बेदखल नहीं किया जा सकता है।हालांकि कुछ दुर्लभ मामलों में जहाँ बहु बुजुर्ग सास -ससुर को परेशान करती है,अदालत ने उनके निष्कान पर विचार किया है। पर सामान्यतः बहु को सुरक्षित रहने का अधिकार है। बहु के अधिकार जैसे की साझा घर का अधिकार, शादी के बाद जिस घर में महिला रहती है वह उसका साझा घर बन जाता है और उसे वहाँ रहने का कानूनी अधिकार होता है। घरेलू हिंसा अधिनियम यह अधिनियम बहु को साझा घर में रहने का अधिकार देता है और उसे बेदखल होने से बचाता है।
झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि गहना अगर ससुराल वाले ले लेते हैं तो उसको वापसी के लिए पति के खिलाफ याचिका दायर कर सकती हैं ।महिला संपत्ति को सुरक्षित रखने का हकदार हैं ।वह कानून का सहारा ले सकती हैं।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि ससुराल में महिलाओं को कई तरह के अधिकार दिए जाते हैं जैसे समान भरण पोषण का अधिकार और पति के संपत्ति में हिस्सा देना ।उनको ससुराल के घर में रहने का अधिकार होता है और घरेलू हिंसा से सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन जीने का हक है ।इसके लिए महिला कानून का सहारा ले सकती हैं ।घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के तहत ससुराल के साजे के घर रहने का अधिकार होता है ।पति के संपत्ति में पत्नी का पूरा अधिकार होता है ।
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तिलता चौक में रोज़ाना लग रहे भीषण जाम से आम लोग परेशान हैं। पीक ऑवर में स्थिति और भी गंभीर हो जा रही है, मौके पर सिर्फ दो ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात रह रहे हैं।
रांची के बहु बाज़ार चौक से इंदिरा गांधी चौक, चुटिया तक सड़क के दोनों ओर अतिक्रमण मुक्त अभियान चलाया गया।अभियान के दौरान सड़क किनारे लगी सभी अस्थायी संरचनाओं को हटाया गया तथा मार्ग को पूर्णतः जाममुक्त एवं अतिक्रमण मुक्त किया गया।
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