दिल्ली आईएमटी मानेसर से दीपक साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बिहार के रहने वाले श्रमिक सुनील कुमार के साथ वार्ता कर रहे हैं। सुनील कुमार ने बताया कि फोन करके एक मजदूर साथी ने उन्हें संपर्क कर के दिल्ली बुलाया। दिल्ली आने पर मजदूर साथी ने उन्हें नौकरी नहीं दिलाई। जिस कारण वे पिछले 15 दिनों से बेरोजगार बैठे हैं ।
दिल्ली से हस्मत अली साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कुछ श्रमिक भाइयों से काम के सिलसिले में वार्ता कर रहे हैं। श्रमिक भाई राशिद जो एक राजमिस्त्री का काम करते हैं उन्होंने बताया कि वे काम पर 9 बजे से शाम के 6 बजे तक काम करते हैं। जिसका उन्हें प्रतिदिन 700 रूपए दिया जाता है। साथ ही उन्होंने बताया कि कंपनियों में श्रमिकों की छटनी ,तनख्वा कम और काम के घंटे बढ़ा दिए गए हैं
दिल्ली से हस्मत अली साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से वज़ीरपुर के इंडस्ट्रियल एरिया में यूपी के रहने वाले सिक्युरिटी गार्ड के तौर पर काम करने वाले सर्वेश जी से वार्ता कर रहे हैं। सर्वेश जी ने बताया कि उनका अब तक लेबर कार्ड का लाभ नहीं मिल पाया है लाभ
हमारे श्रोता साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि कंपनी में काम की कमी हो गई है जिस कारण उन्हें ओवरटाइम नहीं मिल रही है। साथ ही बता रहे है की कंपनी सरकारी कानूनों का पालन नहीं करती हैं
दिल्ली आयानगर से राम कारण साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि कंपनियों में काम की कमी के कारण श्रमिक परेशान है
बिहार राज्य से हमारे श्रोता अनिल साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि लॉक डाउन के दौरान जब वो अपने घर गए थे तब उन्हें मुखिया की द्वारा कोई सहायता नहीं मिला था। साथ ही बता रहे है की उन्हें राशन भी कम मिलता था
दिल्ली एनसीआर से हमारे श्रोता साझा मंच मोबाइल वाणी के मदझयं से बता रहे है कि लॉक डाउन के दौरान जब वो अपने घर गए तो वहा पर सरकार के द्वारा कोई मदद नहीं मिला। साथ ही कह जब वापस अपने कंपनी में आये तो कंपनी वालों ने भी काम से निकाल दिया
Transcript Unavailable.
दिल्ली एनसीआर से हमारे मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि उनके कमपनी में सही ढंग से काम चल रहा है। साथ ही कह रहे है कि उन्हें समाये पर वेतन भी मिल जाता है तथा कंपनियों में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होता हैं ।
दिल्ली एनसीआर से असलम साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि लॉक डॉन के बाद कंपनियां बंद हो गई जिस बेरोजगार हो गए। साथ ही कह रहे है कि उन्ही काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा फिरर उनहोंने फुटपाथ पे जुटे चप्पलें की दूकान खोली जिससे अब अपना गुजारा चला रहे है तथा कह रहे है कि किसी के आसरा में ना रहे खुद आत्मनिर्भर बनें
