झारखण्ड राज्य के बोकारो जिला के कसमार से प्रकाश कुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि ग्राम पंचायत विकास योजना या जीपीडीपी सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है।जिसके माध्यम से गांव के विकास की योजनाएं बनाई जाती है। कौन सी योजनाएं किस के जरुरत के हिसाब से होगी?उस पे ग्राम पंचायत निर्णय लेता है।18 साल से ऊपर के व्यस्क ग्राम सभा के सदस्य होते हैं। जब भी किसी पंचायत में जीपीडीपी योजना बनाए या ग्राम सभा हो,उसमें भाग लेना चाहिए।प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल कैसे हो सकता है? किन्हें सामाजिक सुरक्षा चाहिए ?कहां नल्ली , गल्ली अस्पताल स्कुल बनना चाहिए ?इन सभी की प्लानिंग हमारे पंचायत में ही होती है।इसलिए ग्राम पंचायत के कार्यक्रमों और ग्राम सभा की बैठकों में भाग लेकर अपने पंचायत और गांव के विकास में अपना भूमिका निभाना चाहिए
झारखण्ड राज्य के बोकारो जिला से किशोर मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि जलवायु परिवर्तन से होने वाले हानि और चुनौतियों के बारे में सामूहिक चर्चा कर के समाधान निकाल सकते हैं।वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन की मार सभी को सहन करना पड़ रहा है।सभी ग्रामीणों को मिल कर इस मुसीबत का सामना करना होगा। इसके लिए पंचायत की बैठकों में विशेषकर ग्राम सभा की शामिल होना गाँव के विकास योजनाओं के उचित किणन्वयन के लिए स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए बहुत ही जरूरी है। यह सीधे तौर पर लोकतंत्र को मजबूत करता है। विकास कार्यों में पारदर्शिता लाता है। सरकारी बजट के सही उपयोग को सुनिश्चित करता है और निवासियों को अपने प्रतिनिधियों को सवाल पूछने पर अवसर देता है
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दोस्तों, महिलाओं के भूमि अधिकार सुरक्षित करने में स्थानीय शासन की भूमिका केंद्रीय है। यदि ग्राम पंचायतें भूमि अधिकार को प्राथमिकता दें, महिलाओं को लाभार्थी सूचियों में शामिल करें, अधिकारियों को प्रशिक्षण दें और समुदाय संगठनों के साथ मिलकर काम करें, तो ग्रामीण भारत में महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण संभव है। स्पष्ट है कि जमीन पर अधिकार सिर्फ कागज़ी नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और स्वतंत्रता का सवाल है — और इसका समाधान गांव से ही शुरू होगा। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *--- क्या आपकी पंचायत ने कभी महिलाओं को जमीन के अधिकार के बारे में कोई जानकारी या बैठक रखी है? अगर हाँ, तो उसका असर क्या रहा?” *--- अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”
दोस्तों, महिलाओं के भूमि अधिकार सुरक्षित करने में स्थानीय शासन की भूमिका केंद्रीय है। यदि ग्राम पंचायतें भूमि अधिकार को प्राथमिकता दें, महिलाओं को लाभार्थी सूचियों में शामिल करें, अधिकारियों को प्रशिक्षण दें और समुदाय संगठनों के साथ मिलकर काम करें, तो ग्रामीण भारत में महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण संभव है। स्पष्ट है कि जमीन पर अधिकार सिर्फ कागज़ी नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और स्वतंत्रता का सवाल है — और इसका समाधान गांव से ही शुरू होगा। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *--- क्या आपकी पंचायत ने कभी महिलाओं को जमीन के अधिकार के बारे में कोई जानकारी या बैठक रखी है? अगर हाँ, तो उसका असर क्या रहा?” *--- अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”
दोस्तों, महिलाओं के भूमि अधिकार सुरक्षित करने में स्थानीय शासन की भूमिका केंद्रीय है। यदि ग्राम पंचायतें भूमि अधिकार को प्राथमिकता दें, महिलाओं को लाभार्थी सूचियों में शामिल करें, अधिकारियों को प्रशिक्षण दें और समुदाय संगठनों के साथ मिलकर काम करें, तो ग्रामीण भारत में महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण संभव है। स्पष्ट है कि जमीन पर अधिकार सिर्फ कागज़ी नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और स्वतंत्रता का सवाल है — और इसका समाधान गांव से ही शुरू होगा। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *--- क्या आपकी पंचायत ने कभी महिलाओं को जमीन के अधिकार के बारे में कोई जानकारी या बैठक रखी है? अगर हाँ, तो उसका असर क्या रहा?” *--- अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”
