बहुत दलितों के द्वारा दबंगों के हो रहे अत्याचार से परेशान ग्रामीण न्याय की गुहार लगा रहे हैं
नमामि गंगे परियोजना के क्रिया वन के कारण शहर की सड़कें ध्वस्त
रविवार को मुंगेर जिले के क्षेत्रों में 1397 लोगों की कोविड-19 जांच कराई गई जिसने 3 पुरुष तथा 2 महिला संक्रमित पाए गए इसकी जानकारी सिविल सर्जन डॉक्टर पीएम सहाय ने दिए।
रविवार को सुबह लगभग 3:30 में सदर अस्पताल में नवटोलिया निवासी अपनी पत्नी को प्रसव कराने हेतु सदर अस्पताल में भर्ती कराया जहां लगभग 7:00 बजे उनकी पत्नी ने एक बच्चे को जन्म दिया जिनकी धड़कन नहीं चल रही थी इसी को देखते हुए परिजनों ने जब डॉक्टर से पूछताछ की तो उन्होंने कुछ नहीं बताया नहीं बताने पर परिजनों को शक हुआ तो बच्चे को देखा तो जिसका धड़कन नहीं चल रहा था इसी को देखते हुए परिजन ने हंगामा करना शुरू कर दिया हंगामा को देखते हुए डॉक्टर और नर्स ड्यूटी से फरार हो गए इसकी जानकारी परिजन विपिन कुमार ने दिए वहीं सदर अस्पताल के उपाध्यक्ष डॉ रामप्रवेश ने बताया कि हमें इसकी जानकारी नहीं है मैं जानकारी प्राप्त कर लापरवाह डॉक्टर व नर्स से स्पष्टीकरण की मांग करूंगा और उन पर कार्रवाई करूंगा।
बिहार राज्य के मुंगेर जिला के कासिम बाजार से बिपिन कुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से अनिल कुमार से बातचीत किया। अनिल कुमार ने बताया कि वे बिजली मिस्त्री का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने कोविड वैक्सीन का तीनो डोज़ लगवा लिया है एवं उनकी पत्नी का अभी दो डोज़ ही लगा है। साथ ही उन्होंने बताया कि उन्हें काम के वे कोरोना से बचाव के लिए मास्क का उपयोग करते हैं और साफ़ सफाई का ध्यान रखते हैं
बिहार राज्य के मुंगेर जिला से मोबाइल वाणी के माध्यम से बिपिन कुमार बोल रहें हैं की पिछले दो साल से कोरोना महामारी का दौर चल रहा है। इससे बचाव के लिए हैंड सेनिटाइज़र और मास्क के साथ सोशल डिस्टन्सिंग के नियम का पालन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कम उम्र और ज्यादा उम्र के लोग कोरोना से बचाव के लिए कोरोना का टीकाकरण ले चुके हैं। जिससे की कोरोना का कोई भी खतरा न बन सके। उन्होंने यह भी बताया कि कोरोना टीकाकरण से हर बीमारियों का बचाव भी हो जाता है। साथ ही गर्भवती महिला को हर तरह का टीकाकरण बहुत ही जरुरी है जिससे बच्चा और माँ दोनों सुरक्षित रहते हैं
सामान्य एवं सिजेरियन प्रसव दोनों के बाद एक घंटे के अंदर कराएँ नवजात को स्तनपान - जन्म के शुरुआती 2 घंटों तक शिशु होते हैं अधिक सक्रिय, जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान जरूरी - सिर्फ स्तनपान से एक साल में 8 लाख से अधिक शिशुओं की जान जाने से बचाव संभव मुंगेर, 19 अगस्त। अपनी मां के गर्भ में 9 महीने रहने के बाद शिशु का माता के साथ गहरा जुड़ाव कायम हो जाता है। इसलिए जन्म के तुरंत बाद शिशु को प्राकृतिक रूप से स्तनपान का वरदान प्राप्त होता है। जन्म के शुरुआती 2 घंटों तक शिशु अधिक सक्रिय रहते हैं इसलिए शुरुआती 1 घंटे के भीतर ही स्तनपान शुरू कराने की सलाह दी जाती । इससे शिशु सक्रिय रूप से स्तनपान करने में सक्षम होते हैं । इसके साथ ही छह माह तक केवल स्तनपान ही शिशु के सम्पूर्ण विकास के लिए जरूरी होता है। सिजेरियन प्रसव में भी 1 घंटे के अंदर स्तनपान कराना है आवश्यक - जिला के अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. आनंद शंकर शरण सिंह ने बताया कि जन्म के शुरुआती 1 घंटे के भीतर शिशुओं के लिए स्तनपान अमृत समान होता है। यह अवधि दो मायनों में अधिक महत्वपूर्ण है। पहला यह कि शुरुआती 2 घंटे तक शिशु सर्वाधिक सक्रिय अवस्था में होता है। इस दौरान स्तनपान की शुरुआत कराने से शिशु आसानी से स्तनपान कर पाता है। सामान्य एवं सिजेरियन प्रसव दोनों ही स्थितियों में एक घंटे के भीतर ही स्तनपान कराने की सलाह दी जाती है। इससे शिशु के रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। इसकी वजह से बच्चे का निमोनिया एवं डायरिया जैसे गंभीर रोगों में भी बचाव होता है। भ्रांतियों से रहें दूर : उन्होंने बताया कि माताओं के शरीर में शुरुआती समय में गाढ़ा एवं पीला दूध बनता है, जिसे कोलोस्ट्रम कहा जाता है। इसके सेवन करने से शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। लेकिन अभी भी लोगों में इसे लेकर भ्रांतियां है। कुछ लोग इसे गंदा या बेकार दूध समझकर शिशु को नहीं देने की सलाह देते हैं। दूसरी तरफ़ शुरुआती समय में कम दूध बनने के कारण कुछ लोग यह भी मान लेते हैं कि मां का दूध नहीं बन रहा है। यह मानकर बच्चे को बाहर का दूध पिलाना शुरू कर देते हैं। जबकि यह केवल सामाजिक भ्रांति है। बच्चे के लिए यही गाढ़ा पीला दूध जरूरी होता एवं मां का शुरुआती समय में कम दूध बनना भी एक प्राकृतिक प्रक्रिया ही है। उन्होंने बताया कि लेसेंट 2008 की रिपोर्ट के अनुसार 6 माह तक केवल स्तनपान नहीं करने वाले बच्चों में 6 माह तक केवल स्तनपान करने वाले बच्चों की तुलना में पहले 6 महीने में 14 गुना अधिक मृत्यु की सम्भावना होती है। वहीं संक्रमण से होने वाले 88 प्रतिशत बाल मृत्यु दर में स्तनपान से बचाव होता है । इसके साथ ही सम्पूर्ण स्तनपान से शिशुओं में 54 प्रतिशत डायरिया के मामलों में भी कमी आती है। छह महीने तक सिर्फ और सिर्फ स्तनपान से शिशुओं में 32 प्रतिशत श्वसन संक्रमण के मामलों में कमी आती है और शिशुओं में डायरिया के कारण अस्पताल में भर्ती होने के 72 प्रतिशत मामलों में भी स्तनपान बचाव करता है। इसके साथ ही शिशुओं में श्वसन संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने के 57 प्रतिशत मामलों में स्तनपान बचाव करता है।
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गुरुवार को यातायात थाना मुंगेर द्वारा कृष्ण सेवा सदन पुस्तकालय के सामने मुंगेर में यातायात थाना अध्यक्ष गौरव कुमार की निर्देशानुसार वाहन चेकिंग अभियान चलाया गया वही वैसे वाहन चालक जिनके पास हेलमेट नहीं थे उनसे जुर्माने की राशि वसूली गई जिसमें कुल 13 चालक से तेरे हजार रुपए चालान काटा गया
बिहार राज्य के मुंगेर जिला से विजय कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बता रहे हैं कि गुरुवार को मुंगेर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 1551 लोगों की कोविड-19 जांच कराई गई जिसमें 4 लोग संक्रमित पाए गए उसकी जानकारी सिविल सर्जन डॉक्टर पीएम सहाय ने दिए उन्होंने बताया कि आज 4 लोग संक्रमित मिले हैं पर लोगों को घबराने की कोई बात नहीं है लोग टीका ले और इस महामारी को दूर भगाएं यही मेरा लोगों से अपील है।
