सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एएनएम-आशा दीदी को दी गयी सुरक्षित गर्भपात की जानकारी • असुरक्षित गर्भपात के चिकित्सकीय समाधान पर हुई चर्चा • कोरोना काल में सुरक्षित गर्भसमापन कराने में हुई समस्या • एमटीपी एक्ट के अनुसार 20 सप्ताह तक ही कराया जा सकता है गर्भ का समापन मुंगेर ,3 अगस्त । कोरोना काल में गर्भवती महिलाओं को कई तरह के समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिसमें सुरक्षित गर्भपात करना भी एक चुनौती रहा। इसको लेकर जिले के संग्रामपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एएनएम, आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को आईपास डेवलपमेंट फाउंडेशन के रिसर्च एंड ट्रेनिंग कोऑर्डिनेटर अर्पणा ने सुरक्षित गर्भ समापन और कानून के बारे में विस्तृत जानकारी तथा सही तरीके से गर्भपात को लेकर चर्चा की। उन्होंने बताया कोरोना के समय में लोगों को कई विषम परिस्थितियों से गुजरना पड़ा। इस दौरान कई ऐसी महिलाएं हैं जो अनचाहे रूप से गर्भवती हो गई। संक्रमण के मद्देनजर वह अपना सुरक्षित रूप से गर्भपात भी नहीं करा सकी। सरकारी अस्पतालों में व्याप्त चिकित्सकीय सुविधा का लाभ से वह वंचित रह गई। लिहाजा उन महिलाओं का गर्भ अब 2 से 3 माह का हो चुका है। इसलिए उनका सुरक्षित रूप से चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है। ताकि उनका सुरक्षित रूप से गर्भ समापन किया जा सके। इसे लेकर सभी को प्रयास करने की आवश्यकता है। खासकर सामाजिक स्थिति में इसको लेकर जागरूकता लानी होगी। इस प्रशिक्षण में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. उपेद्र कुमार सिंह, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक राहुल पटेल, बी सी एम् नीतू कुमारी, आईपास फांउडेशन की अर्पणा शामिल थी । 20 सप्ताह तक के गर्भ को कानूनी रूप से समाप्त करने की है इजाज़त: एमटीपी( मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेगनेंसी) एक्ट 1971 में निहित कुछ निहित शर्तों के तहत कोई भी महिला 20 सप्ताह तक के गर्भ को कानूनी रूप से हटा सकती है। लेकिन एमपीटी एक्ट में कुछ शर्तों का जिक्र किया गया है। जिसका अनुपालन अनिवार्य है तथा इसे लेकर जरूरी दस्तावेज होनी चाहिए। लेकिन इस दरमियान ख्याल रखना होगा कि उनका सुरक्षित रूप से गर्भपात हो सके। इसके लिए उनके परिजनों को खास ध्यान रखने की आवश्यकता है। किसी भी बिचौलियों के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। किसी तरह की समस्या होने पर निकट के सरकारी अस्पताल में संपर्क करना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क रूप से कानूनी रूप से गर्भपात कराने की सुविधा उपलब्ध है। इस दौरान विशेष परिस्थिति होने पर एंबुलेंस की मदद से महिला मरीज को नि:शुल्क रूप से हायर सेंटर भेजने की सरकारी सुविधा उपलब्ध है। लोगों को इसका लाभ लेना चाहिए। 20 सप्ताह तक गर्भ समापन कराना वैध है, लेकिन 12 सप्ताह के अंदर एक प्रशिक्षित डॉक्टर एवं 12 सप्ताह से ऊपर तथा 20 सप्ताह के अंदर तक में 2 प्रशिक्षित डॉक्टर की उपस्थिति में सदर अस्पताल या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त अस्पताल में प्रशिक्षित डॉक्टर की मौजूदगी में गर्भपात होनी चाहिए। इस दौरान माहवारी के समय साफ -सफाई के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गयी। असुरक्षित गर्भपात से 8 प्रतिशत महिलाओं की हो जाती मौत: भारत में होने वाली मातृ मृत्यु में से लगभग 8% मृत्यु असुरक्षित गर्भपात के कारण होती है। यदि किसी महिला को माहवारी के दिन चढ़ गए हो या उससे अनचाहे गर्भ के ठहरने की आशंका हो तो उसे बिना किसी देरी के नजदीकी आशा एएनएम से संपर्क करना चाहिए या डॉक्टर को दिखाना चाहिए | अगर गर्भधारण की पुष्टि होती है और महिला गर्भ नहीं रखना चाहती है तो उसे गर्भपात का निर्णय जल्दी ले लेना चाहिए | अगर गर्भ 9 सप्ताह तक का हो तो गोलियों द्वारा गर्भपात भी किया जा सकता है। गर्भपात जितना जल्दी कराया जाए उतना ही सरल और सुरक्षित होता है। कई बार ऐसा हो सकता है कि गर्भपात सेवाएं लेने के लिए पहुंचने तक गर्भ 12 हफ्ते से ऊपर का हो इसके पीछे बहुत से कारण हो सकते हैं -जैसे कि गर्भ की जानकारी बाद में लगना| होने वाले शिशु में जन्मजात विकृति होना, अस्पताल समय से ना पहुंच पाना। सुरक्षित गर्भपात के मद्देनजर समय पर निर्णय न ले पाना इत्यादि। यदि महिला 12 हफ्ते या 3 महीने से ज्यादा अवधि के गर्भ का गर्भपात करवाना चाहती है तो उसमें उसे घबराने की आवश्यकता नहीं है। 20 सप्ताह तक गर्भपात से जुड़ी सेवाएं लेने के लिए महिला को बड़े अस्पताल जैसे कि जिला अस्पताल 24*7 उपलब्ध सीएससी तथा मेडिकल कॉलेज अस्पताल जाना होगा। गर्भावस्था की अवधि के आधार पर महिला को इन सेवाओं के लिए अस्पताल में भर्ती किया जाता है। महिलाओं को ध्यान रखना चाहिए कि वह गर्भपात के साथ तुरंत ही किसी गर्भनिरोधक साधनों का उपयोग शुरू कर दे । क्योंकि गर्भपात और अगले गर्भधारण के बीच में कम से कम 6 महीने का अंतर रखना उचित होता है।

धरहरा हमारी पंचायत के वार्ड संख्या 5 ख पानी नहीं मिलने से महिला पुरुष ने प्रदर्शन किया

बिहार राज्य के मुंगेर जिला से श्रोता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह कहते हैं कि उनके पंचायत में पानी के टंकी को बना दिया गया है। लेकिन पानी अभी तक नहीं दिया गया है। जिस कारण से पानी की हो रही है समस्या

नरेश आनंन्द

माननीय सांसद महोदय राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह जी को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने पर मुंगेर जनता दल यू की से बधाई देते हुए मुंगेर के सभी कार्यकर्ता में खुशी का माहौल बना हुआ है मुंगेर जदयू कार्यालय में रंग गुलाल से और मिठाइयां खा कर बधाई एक दूसरे को देते हुए कार्यक्रम किया गया ।( बधाई कार्यक्रम )युवा जदयू के मुख्य प्रवक्ता शिवम मंडल नेतृत्व में किया गया जिसमें युवा जदयू के सभी साथी गण मौजूद थे एवं जदयू के पिछला प्रदेश सचिव सुजीत मंडल जी जिला अति पिछड़ा के अध्यक्ष सत्यजीत प्रकाश जी ट्रेडर्स प्रकोष्ठ के अध्यक्ष नितिन जी उद्योग प्रकोष्ठ के अध्यक्ष संतोष कुमार मिश्रा जी जल श्रमिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष विरेंद्र कुमार निषाद जी, जिला उपाध्यक्ष बिपिन कुशवाहा जी , जिला उपाध्यक्ष मोहम्मद सुहानी जी ,नीरज यादव जी ,राकेश रंजन जी , अति पिछड़ा के प्रवक्ता शाइस्ता परवीन जी ,सुमन जी अनिल जी अमित जी चांद जी अमन जी, सम्राट जी मोहम्मद फिरदोस अली जी मोहम्मद इंतजार अहमद चांद जी एवं अन्य मुख्य साथी मौजूद थे

शनिवार को जिला अध्यक्ष गंगा रजक की अगुवाई में नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन की बैठक बागबान की गई यह बैठक 3 अगस्त को पत्रकार मिलन समारोह हेतु आयोजित की गई इस मौके पर उपस्थित प्रदेश अध्यक्ष अबोध ठाकुर, राष्ट्रीय प्रवक्ता रंजीत कुमार विद्यार्थी, सुनील जख्मी,वि काश कुमार, संजय कुमार के साथ अन्य पत्रकार बंधु उपस्थित थे

शनिवार को अंचलाधिकारी सदर मुंगेर शशिकांत कुमार की अगुवाई में मुफस्सिल थाना परिसर में जनता दरबार लगाई गई जिसमें कुल 14 मामले जमीन संबंधी एवं अन्य आए साथ ही साथ 6 नए मामले भी शनिवार को जनता दरबार में पहुंचे सभी मामले को बारीकी से देखते हुए अंचलाधिकारी ने सुनवाई स्वयं किए और सभी लोगों को यह आश्वासन दिया गया कि सभी का मामला निष्पादन निश्चित रूप से होगा इस मौके पर थानाध्यक्ष द्वारा बताया गया कि आप लोग शांतिपूर्ण जनता दरबार में पहुंचे आप लोगों का मामला निष्पादन निश्चित रूप से किया जाएगा

बिहार राज्य के मुंगेर जिले के चंडीस्थान से नीलेश मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि वह मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं। उन्हें अभी तक राशन नहीं मिल पा रहा है इस कारण उन्हें जीविका चलाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए उन्होंने मोबाइल वाणी पर मदद की गुहार लगाई है।

नरेश आनंन्द

एक से सात अगस्त तक जिलाभर में मनाया जाएगा विश्व स्तनपान सप्ताह - राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने सभी जिला के सिविल सर्जन को जारी की चिट्ठी - कार्यक्रमों के सफल संचालन के लिए जिला योजना समन्वयक को बनाया गया है नोडल अधिकारी | आगामी एक से सात अगस्त तक जिला मुख्यालय सहित सभी प्रखंड़ों में स्तनपान के महत्व को जनसाधारण तक पहुंचाने के उद्देश्य से "विश्व स्तनपान सप्ताह" मनाया जाएगा। मालूम हो कि बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास तथा नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाने एवं कुपोषण से शिशु को बचाने में स्तनपान के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष एक से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करने पर नवजात शिशुओं में मृत्यु की संभावना 20 प्रतिशत तक कमजिला के सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक ने बताया कि जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करने वाले नवजात शिशुओं में मृत्यु की संभावना 20 प्रतिशत तक कम हो जाती है। इसके साथ ही पहले छह महीने तक केवल स्तनपान करने वाले शिशुओं में डायरिया एवं निमोनिया से होने वाली मृत्यु की संभावना 11 से 15 गुना तक कम हो जाती है। उन्होंने बताया कि स्तनपान करने वाले शिशुओं का समुचित ढंग से शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है एवं वयस्क होने पर उसमें असंचारी (एनसीडी) बीमारियों के होने की भी संभावना कम होती है। इसके साथ ही स्तनपान कराने वाली माताओं में स्तन एवं ओवरी कैंसर होने का खतरा भी नहीं होता है। डीपीसी जिला नोडल अधिकारी के रूप में काम करेंगे- उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में जिला से लेकर प्रखण्ड स्तर तक आईसीडीएस के पदाधिकारियों के साथ ही आंगनबाड़ी सेविका- सहायिका कि अहम भागीदारी होगी। इस कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला योजना समन्वयक (डीपीसी) जिला नोडल अधिकारी के रूप में काम करेंगे। जिला और प्रखण्ड स्तर पर कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) विकास कुमार ने बताया कि कोरोना सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान एक से सात अगस्त तक जिला और प्रखण्ड स्तर पर कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान सदर अस्पताल मुंगेर के अलावा जिला के सभी स्वास्थ्य संस्थानों को दूध की बोतल मुक्त परिसर घोषित किया जाना है। इसके साथ ही विभिन्न अस्पताल के प्रसव केंद्रों पर कार्यरत ममता का स्तनपान से होने वाले लाभ के बारे में उन्मुखीकरण किया जाएगा और प्रसव केंद्र के प्रसव पश्चात वार्ड की इंचार्ज सिस्टर को स्तनपान के लिए उस संस्थान का नोडल पर्सन चुना जाएगा। स्वास्थ्य संस्थान में स्तनपान कक्ष ब्रेस्ट फीडिंग कॉर्नर का निर्माण कराया जाना है - उन्होंने बताया कि प्रत्येक स्वास्थ्य संस्थान में स्तनपान कक्ष ब्रेस्ट फीडिंग कॉर्नर का निर्माण कराया जाना है। यह कक्ष उस उस संस्थान के ओपीडी के पास और कंगारू मदर केयर वार्ड के अतिरिक्त होगा । इसके साथ ही विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान एएनएम, आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका घर-घर जाकर गर्भवती और धातृ माताओं को छह महीने तक केवल स्तनपान कराने के महत्व के बारे में बताएगी और प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्रों पर बुधवार और शुक्रवार को वहां आने वाली सभी 2 वर्ष तक की माताओं से सेविका और आशा इस अभियान में उनसे जुड़ने के लिए कहेंगी। अनुश्रवण एवं मूल्यांकन जिला स्तर पर सिविल सर्जन करेंगे - उन्होंने बताया कि विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों का अनुश्रवण एवं मूल्यांकन जिला स्तर पर सिविल सर्जन, जिला स्वास्थ्य समिति के अधिकारी, आईसीडीएस के अधिकारी के साथ ही प्रखण्ड स्तर पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी(सीडीपीओ), प्रखण्ड स्वास्थ्य प्रबंधक (बीएचएम), प्रखण्ड सामुदायिक उत्प्रेरक(बीसीएम) तथा आईसीडीएस की महिला पर्यवेक्षिका करेंगी।