शर्म नहीं ,सम्मान है हिंदी ही हमारा अभिमान है आज का दिन ख़ास है। आज ही के दिन यानि 14 सितम्बर 1949 को भारत की संविधान सभा द्वारा हिंदी भाषा को राजभाषा का दर्ज़ा मिला और इसी के सम्मान में साल 1953 से प्रतिवर्ष हिंदी दिवस आधिकारिक रूप से मनाया जाता आ रहा है। हिंदी दिवस मानाने का मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा का महत्व को उजागर करना और हर क्षेत्र में हिंदी भाषा के उपयोग को बढ़ावा देना है।
2016 में 14 प्रतिशत छात्र औपचारिक शिक्षा के बाहर थे जो कि देश में 2023 में भयानक सुधार होने के बाद भी अब मात्र 13.2 प्रतिशत भर है। 2016 में 23.4 प्रतिशत अपनी भाषा में कक्षा दूसरी का पाठ नहीं पढ़ पाते थे। आज 2024 में अति भयानक सुधार के साथ किया आंकड़ा 26.4 प्रतिशत है। देश के आज भी 50 फीसदी छात्र गणित से जूझ रहे हैं। और 2024 में कैसी हो हमारी शिक्षा इसी विषय पर आज हमारे साथ लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी की महिला प्रकोष्ठ से डाॅ. शिवा श्रीवास्तव ताई ने मोबाइल वाणी से जुड़कर अपने प्रतिक्रिया मोबाइल वाणी के साथ साझा की।
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आज अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस है। एक बच्चा जब जन्म लेता है ,तब वह चीज को समझने में, जानने में या फिर लिखने पढ़ने में उसकी मातृभाषा उसके लिए सबसे ज्यादा समझने में लिखने में पढ़ने में आसान होती है। साथी एक बौद्धिक विकास में मातृभाषा एक बहुत महत्वपूर्ण काम करती है। जो उसे आम जीवन में किस तरीके से लाभकारी होती है। इस अंतर्राष्ट्रीय महिला मातृभाषा दिवस पर आज हमारे साथ सिविल सर्विसेज ट्यूटोरियल के संचालक एवं एडॅ.मधुकर गायकवाड सर ने मोबाइलवाणी के माध्यम से विशेष बातचीत कर जानकारी साझा की।
राष्ट्रीय हिन्दी दिवस आज 14 सितम्बर को मनाया जाता है। हिन्दी भाषा कि विशेषता अ से अनपढ़ और ज्ञ से ज्ञानी बना देती है। आज भी राजभाषा हिन्दी है। हिन्दी से ही हिन्दुस्तान का महत्व छलकता है। और आज राष्ट्रीय हिन्दी दिवस पर डाॅ अनुप सिंह ने मोबाइलवाणी पर विशेष बातचीत की।
जिले में है विविध आयोजन।
मध्यप्रदेश राज्य के छिंदवाड़ा जिले से योगेश गौतम मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि जिले में प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूल में मैदान में आ गए हैं। इसकी शुरुआत में जिले में एक- एक सीएम राइज स्कूल के माध्यम के साथ हुई है। हर विकासखंड में एक-एक सीएमराईज खोले गए हैं। जिसमें इस बार से केडीवन की कक्षाएं शुरू हो गई है। इन स्कूलों के यह हाल है, कि केजीवन से कक्षा 12वीं तक की कक्षाएं होगी। इसके पहले वर्ष में केजीवन में सिर्फ अंग्रेजी माध्यम में प्रवेश लिया गया है। वहीं हिंदी माध्यम में अब एडमिशन में लोगों की रुचि कम होती जा रही हैं। और अंग्रेजी माध्यम में लोग रुचि दिखा रहे हैं। क्लिक कर ऑडियो सुन सकते हैं।
