आज से नवरात्री का प्रथम दिन है ? आज से पूर्व कोरोना संक्रमण के कारण लोगों को अपने घरों में रहकर त्यौहार को मनाया। आज कैसे मनाएँ?
माता भुवनेश्वरी का मंदिर आस्था व श्रद्धा का केन्द्र रामाकोना - सतपुड़ा की सुरम्य वादियों में स्थित छिंदवाड़ा जिले के सिल्लेवाणी वनपरिक्षेत्र के अंतर्गत बंजारी माता एवं भुवनेश्वरी माता के मंदिर में हुई नवरात्री पर घट स्थापना । यह दोनों ही माता के दरबार वर्षों से श्रध्दा व आस्था का केन्द्र है । बंजारी माता सिल्लेवाणी घाट के सुरवात में नागपूर- छिदवाडा मार्ग पर रामाकोना से दस कि.मी दुरी पर स्थित है जबकी भुवनेश्वरी माता गायमुख रामाकोना से पांच कि.मी दूरी पर प्रकृती के गोद में विराजमान हैं । माता भुवनेश्वरी मंदिर में वर्षभर लोग पुजा-अर्चणा के आते - जाते रहते हैं । किन्तु नवरात्री व श्रावण मास में इस मंदिर में विशेष चहल-पहल श्रध्दालुओ की होती है । पंचमुखी शेषनाग के आसन पर विराजमान हैं और माता के ठीक समक्ष दिव्य शितल जल कुंड स्थापित है । जनश्रृती के अनुसार इस कुंड के जल में औषधीय गुण होने से कैंसर जैसी बिमारीयो को भी आराम लगता है ।
मध्यप्रदेश राज्य के छिंदवाड़ा जिला से दिनकर पातुलकर मोबाइल वाणी के माध्यम से कोरोना और जिंदगी विषय पर अधिवक्ता गायकवर जी से साक्षात्कार लिया है। जिसमें उन्होंने बतया कि कोरोना काल में कैसे मनाए नवरात्री पर्व क्यूंकि अभी कोरोना ख़त्म नहीं हुआ है इसलिए हमें सावधानी बरतने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि हम धार्मिक क्रियाएँ करते है आधात्मिक नहीं हमें प्राकृतिक के संतुलन को बनाये रखना है नदी के महत्व को नहीं भूलना है। हमें माता की शक्ति की आराधना करते समय मानव कल्याण का विशेष ध्यान रखना होगा पूजा अर्चना के समय। साधना करते समय हमें व्यक्तिगत तौर पर मास्क का प्रयोग करना अतिअनिवर्य है और साथ में कोरोना की वैक्सीन अवश्य लगाए। जिस समय भारत सरकार घोषणा करेगी की भारत कोरोना मुक्त हो गया है तब हम मानेंगे की अब कोरोना ख़त्म हो गया इससे पहले हमे मास्क का नियमित प्रयोग एवं सार्वजिनक स्थानों में और भीड़ भाड़ वाली जगहों में जाने से बचना होगा।
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श्राद्ध का है विशेष महत्व।
अमरवाड़ा के हृदय स्थल में विराजमान मातेश्वरी मन्दिर जगतदेव में भी है उत्साह का माहौल।
