समाज कि लड़ाई लड़ने वाले लोगों के आदर्श कितने खोखले और सतही हैं, कि जिसे बनाने में उनकी सालों की मेहनत लगी होती है, उसे यह लोग छोटे से फाएदे के लिए कैसे खत्म करते हैं। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब कोई प्रभावशाली व्यक्ति ने इस तरह काम किया हो, नेताओं द्वारा तो अक्सर ही यह किया जाता रहा है। हरियाणा के ऐसे ही एक नेता के लिए ‘आया राम गया राम का’ जुमला तक बन चुका है। दोस्तों आप इस मसले पर क्या सोचते हैं? आपको क्या लगता है कि हमें अपने हक की लड़ाई कैसे लड़नी चाहिए, क्या इसके लिए किसी की जरूरत है जो रास्ता दिखाने का काम करे? आप इस तरह की घटनाओं को किस तरह से देखते हैं, इस मसले पर आप क्या सोचते हैं?

भारत में जहां 18वीं लोकसभा के लिए चुनाव हो रहे हैं। इन चुनावों में एक तरफ राजनीतिक दल हैं जो सत्ता में आने के लिए मतदाताओं से उनका जीवन बेहतर बनाने के तमाम वादे कर रहे हैं, दूसरी तरफ मतदाता हैं जिनसे पूछा ही नहीं जा रहा है कि वास्तव में उन्हें क्या चाहिए। राजनीतिक दलों ने भले ही मतदाताओं को उनके हाल पर छोड़ दिया हो लेकिन अलग-अलग समुदायो से आने वाले महिला समूहों ने गांव, जिला और राज्य स्तर पर चुनाव में भाग ले रहे राजनीतिर दलों के साथ साझा करने के लिए घोषणापत्र तैयार किया है। इन समूहों में घुमंतू जनजातियों की महिलाओं से लेकर गन्ना काटने वालों सहित, छोटे सामाजिक और श्रमिक समूह मौजूदा चुनाव लड़ रहे राजनेताओं और पार्टियों के सामने अपनी मांगों का घोषणा पत्र पेश कर रहे हैं। क्या है उनकी मांगे ? जानने के लिए इस ऑडियो को सुने

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भीमराव अंबेडकर जयंती माह के उपलक्ष में पटोरी शहर में दलित स्वाभिमान सम्मेलन का आयोजन किया गया । जानकारी के अनुसार समस्तीपुर जिला के पटोरी शहर में भीमराव अंबेडकर जयंती माह के उपलक्ष में दलित स्वाभिमान सम्मेलन का आयोजन किया गया । यह कार्यक्रम बिहार दलित विकास समिति एवं मिथिलांचल दलित विकास समिति के तत्वाधान में आयोजित हुआ । कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्व जिला पार्षद सदस्य संजय राम एवं पटोरी अनुमंडलीय न्यायालय के अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सदानंद राय ने दीप प्रज्वलित कर किया । इस कार्यक्रम का अध्यक्षता संस्था के सचिव नवल भगत ने की । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व जिला पार्षद सदस्य संजय राम ने कहा कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के आदर्शों मूल्य एवं सिद्धांतों को हमें अपने जीवन में समाहित करना है,ताकि दलित जनजीवन में व्यापक सुधार हो सके । खबर को पूरा सुनने के लिए ऑडियो के लिंक को क्लिक करें।

कोविड की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही एक बार फिर से जो सवाल मुंह उठा रहा है वह है गरीब की थाली के भोजन का. सरकार ने एलान किया है कि गरीबों को दिवाली तक नि:शुल्क राशन दिया जाएगा पर सवाल ये है कि पुरानी व्यवस्था में भी बहुत से गरीब परिवार भूख से बिलखते रह गए। साथियों, अगर आप भी नि:शुल्क राशन पाने वालों की श्रेणी में आते हैं तो हमें बताएं कि क्या जब से कोविड ने देश में पांव पसारे हैं तब से आपको नियमित रूप से सरकारी राशन मिल रहा है? अगर नहीं तो डीलर राशन देने से मना क्यों कर रहे हैं? जो लोग नया राशन कार्ड बनवाना चाहते हैं क्या उन्हें राशन कार्ड बनवाने में दिक्कतें आ रही हैं? अगर दिक्कतें हैं तो वे क्या हैं और क्या इस बारे में प्रखंड आपूर्ति ​अधिकारी या जिला अधिकारी की लिखित रूप से शिकायत की है? सरकार राशन ना मिल पाने की स्थिति में आप कैसे अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं? क्या कोविड के दौरान आपके परिवार को या आपको राशन ना होने पर भूखे पेट सोना पडा है? अपनी बात हम तक पहुंचाने के लिए फोन में अभी दबाएं नम्बर 3.

ग्रामसभा की बैठक में सदस्यों की सक्रिय भागीदारी ही पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ एवं ग्रामीण विकास को गति प्रदान कर सकती है। इसलिए ग्रामसभा के सभी सदस्यों को बैठक में हिस्सा लेना केवल उनका अधिकार ही नहीं परन्तु उनका परम कर्त्तव्य भी है। तो साथियों आप हमें बताएं कि — आप ग्राम सभा के बारे में कितना और क्या जानते हैं? क्या आपने कभी अपने गांव में ग्राम सभा की बैठक होते देखी है अगर हां तो अपना अनुभव साझा करें इन सवालों के जबाब देने के लिए अभी दबाएं अपने फ़ोन में नंबर 3 का बटन।

नून नदी की बाढ़ का पानी सारंगपुर पश्चिमी पंचायत के वार्ड संख्या दो के महादलितों के घरों में प्रवेश कर जाने से अफरा-तफरी मच गई है। एक और जहां लोग चौरचन पर्व की तैयारी कर रहे थे। वहीं दूसरी ओर लूनी नदी की बाढ़ का पानी दर्जनों महादलित परिवारों के घरों में घुस जाने से अफरा-तफरी मच गई। फलस्वरूप पर्व मनाने में भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बाढ़ से प्रभावित परिवारों में दर्शन सादा, पोषण सादा, रामेश्वर सादा, लाल बहादुर सादा, शिवजी सादा, केश्वर सादा, भातू सादा, हरिचरण सादा, संपत लाल सादा, कैलाश सादा, शिवचंद्र सादा सहित दो दर्जन से अधिक महादलित परिवारों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाने से भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विधायक विद्यासागर सिंह निषाद, पूर्व विधायक रामचंद्र सिंह निषाद, मुखिया बरेलाल सहनी, सुरेश कुमार, वासुदेव सहनी, पूर्व मुखिया लाल झा आदि ने प्रखंड प्रशासन से अतिशीघ्र सर्वेक्षण कर राहत देने की मांग की है।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर। 

दलित, महादलित सहित आर्थिक रूप से कमजोर समुदाय के लोग सबसे अधिक सहायता और देखभाल के योग्य हैं। क्योंकि शैक्षणिक एवं बौद्धिक पिछड़ेपन के कारण कोरोंना सहित किसी भी त्रासदी के प्रति इन लोगों में जागरूकता का घोर अभाव दिखता है। कार्ड की सचिव सुषमा सिंह ने उक्त बातें संवाददाता से कहीं। उन्होंने कहा कि एक्शन एड एसोसिएशन के सहयोग से मास्क व साबुन वितरण अभियान में हमने इसी समूह को लक्ष्य माना। सुनने के लिए ऊपर के ऑडियो पर क्लिक करें। 

एनसीआर कानून का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योकि उसमे किसी एक समुदाय को बंधित किया जा रहा है। एनआरसी से सबसे पहले सिर्फ अंपसंख्यक समुदाय ही नहीं बल्कि इससे दलित को भी दिक्कत होगी। विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।