सरकार द्वारा लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीट आरक्षित करने और गांवों में पीएम आवास योजना के तहत 70 प्रतिशत से ज्यादा मकान महिलाओं को देने से देश में महिलाओं की गरिमा बढ़ी तो है। हालांकि, इन सबके बावजूद कुछ ऐसे कारण हैं जो महिलाओं को जॉब मार्केट में आने से रोक रहे हैं। भारत में महिलाओं के लिए काम करना मुश्किल समझा जाता है. महिलाएं अगर जॉब मार्केट में नहीं हैं, तो उसकी कई सारी वजहें हैं, जिनमें वर्कप्लेस पर काम के लिए अच्छा माहौल न मिल पाना भी शामिल है . दोस्तों, हर समस्या का समाधान होता है आप हमें बताइए कि *----- नौकरी की तलाश में महिलाओं को किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है। *----- आपके अनुसार महिलाओं के नौकरी से दूर होने के प्रमुख कारण क्या हैं? *----- महिलाओं को नौकरी में बने रहने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

कल्याणपुर प्रखंड क्षेत्र के तीरा पंचायत के बूथ संख्या 230 पर वार्ड सदस्य के एक पद पर गुरुवार को शांति पूर्ण व्यवस्था में मतदान हुआ।यह सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित थी।सुबह 7 बजे से ही मतदान शुरू हुआ।जहा मतदाताओं ने शाम 5 बजे तक मतदान किया।इस दौरान महिला मतदाताओं ने पुरुष मतदाता के अपेक्षा ज्यादा संख्या में मतदान में भाग लिया। वही मजिस्ट्रेट सीओ कमलेश कुमार, ज़ोनल पदाधिकारी अपर थाना अध्यक्ष राजकिशोर राम, सेक्टर पदाधिकारी शंकर झा, चंदन कुमार, निर्वाचन पदाधिकारी सह बीडीओ देवेंद्र कुमार आदि ने बूथ का ज्याज़ा लेने के साथ मौजूद रहे।बीडीओ ने बताया कि केंद्र संख्या 230 पर 54% मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराई गई।

बीते दिनों महिला आरक्षण का बहुत शोर था, इस शोर के बीच यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए की अपने को देश की सबसे बड़ी पार्टी कहने वाले दल के आधे से ज्यादा भू-भाग पर शासन होने के बाद भी एक महिला मुख्यमंत्री नहीं है। इन सभी नामों के बीच ममता बनर्जी इकलौती महिला हैं जो अभी तक राजनीति में जुटी हुई हैं। वसुंधरा के अवसान के साथ ही महिला नेताओं की उस पीढ़ी का भी अवसान हो गया जिसने पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय तक महिलाओं के हक हुकूक की बात को आगे बढ़ाया। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जबकि देश में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने की बात की जा रही है। एक तरफ महिला नेताओं को ठिकाने लगाया जा रहा है, दूसरी तरफ नया नेतृत्व भी पैदा नहीं किया जा रहा है।

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विद्यापतिनगर महिलाओं की शक्ति, समझ और नेतृत्व, जिसे दशकों तक भारतीय राजनीति में जगह नहीं मिली, उसको पूजन योग्य बताते हुए सरकार ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का प्रस्ताव लोकसभा में पेश किया है। लेकिन क़ानून बनाने और नारी शक्ति के वंदन के अमल में सरकार का ही नहीं, राजनीतिक पार्टियों का इम्तिहान होगा।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

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सवाल है कि जिस कानून को इतने जल्दबाजी में लाया जा रहा हैं उसके लागू करने के लिए पहले से कोई तैयारी क्यों नहीं की गई, या फिर यह केवल आगामी चुनाव में राजनीतिक लाभ पाने के दृष्टिकोण से किया जा रहा है।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर को फटकार लगाते हुए कहा कि आरक्षण संबंधी गड़बड़ियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि आप जैसे लोग महत्वपूर्ण पदों पर बैठकर पिछड़े वर्गों के साथ भेदभाव करने के आदि हैं।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब , खेलोगे कूदोगे होगे खराब। पुराने जमाने की यह कहावत अब हल्का परिवर्तित हो गई है। आज के जमाने में यह कहावत बन गई है पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब और खेलोगे कूदोगे तो भी बनोगे नवाब। इसी पंक्ति को चरितार्थ करने के लिए बिहार सरकार ने राज्य में खेल विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

साथियों , पंचायत समिति विकास खंड स्तर पर त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी है जो ग्राम पंचायत और जिला पंचायत के बीच एक सम्वन्यक की भूमिका अदा करती है। तो आप हमें बताएं कि - क्या आप अपनी पंचायत समिति के बारे में जानते है? - क्या कभी किसी ग्रामसभा या पंचायत में जन सुनवाई के दौरान आपके पंचायत समिति के प्रमुख भाग लेते है और आप की बातों पर गौर कर पंचायत को निर्देश देते है? - आपके हिसाब से पंचायत समिति या प्रमुख की क्या भूमिका होनी चाहिए ? - और क्या आपकी बात वहां सुनी जाती है ? - और मुखिया या सरपंच पर योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए पंचायत समिति किस प्रकार से दबाब बना सकती है .साथ ही प्रखंड के अधिकारी कैसे जिम्मेदारियों को सुनिश्चित कर सकते है इन सवालों के जबाब देने के लिए अभी दबाएं अपने फ़ोन में नंबर 3 का बटन।