हमारे देश में सभी को शिक्षा का अधिकार है लेकिन लड़कियों को इसके लिए कहीं अधिक संघर्ष करना पड़ता है। कई बार घर के काम के बोझ के साथ स्कूल के बस्ते का बोझ उठाना पड़ता है तो कभी लोगों की गंदी नज़रों से बच-बचा के स्कूल का सफर तय करना पड़ता है। जैसे-तैसे स्कूल पहुंचने के बाद भी यौन शोषण और भावनात्मक शोषण की अलग चुनौती है जो रोज़ाना उनके धैर्य और हिम्मत की परीक्षा लेती है। ऐसे में लड़कियों के लिए सुरक्षित माहौल बनाने की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन के साथ साथ समाज की भी है। तब तक आप हमें बताइए कि * -----लड़कियों के स्कुल छोड़ने के या पढ़ाई पूरी ना कर पाने के आपको और क्या कारण नज़र आते है ? * -----आपके हिसाब से हमें सामाजिक रूप से क्या क्या बदलाव करने की ज़रूरत है , जिससे लड़कियों की शिक्षा अधूरी न रह पाए।

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एक विवाहिता ने अपने पड़ोसी पर प्रेम जाल में फंसाकर शोषण करने और एक लाख रूपये ऐंठने का आरोप लगाया है। पीड़िता ने पहले स्थानीय थाना और महिला थाना समस्तीपुर में अपनी व्यथा सुना न्याय की गुहार लगाई। न्याय नहीं मिलने पर न्यायालय की शरण में पहुँची। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के राज्य परिषद् सदस्य मोहिउद्दीननगर विधानसभा सह जिला सचिव रालोसपा समस्तीपुर रंजीत कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि बड़े दुख: के साथ कहना पड़ रहा है कि ग्राम - मुरादपुर बंगरा के कुशवाहा जाति की जो हमारी पुरानी परंपरा एवं पुरानी संस्कृति के अनुसार रिति रिवाज जमाने से चलता रहा है। जिसमें से एक मानजनी व्यवस्था में आज उचित न्याय नहीं मिल पा रहा है। छोटे-छोटे मानजन तो मनमानी करतें हैं, मगर चटईया संगठन के मानजन भी उचित न्याय नहीं कर पा रहें हैं। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर। 

शोषण और भेदभाव के खिलाफ एसएफआई का "टेक द नी" प्रदर्शन । विभूतिपुर(समस्तीपुर)। भारत का छात्र फेडरेशन एसएफआई अंचल कमिटी विभूतिपुर के द्वारा केन्द्रीय कमिटी के आह्वान पर अंचल कमिटी सह जिला कमिटी सदस्य कंचन कुमारी के नेतृत्व में "टेक द नी" प्रदर्शन विभूतिपुर प्रखंड के भुसवर में किया गया।प्रदर्शन की शुरूआत गलवान घाटी में शहीदों को श्रद्धांजलि देकर की गयी।सभी छात्र-छात्राएं अपने घुटना के बल बैठकर अपने-अपने हाथों में शोषण मुक्त हो दुनिया,शोषण के खिलाफ हमारी एकता जिन्दाबाद,देश में बढ़ रहे महिला उत्पीड़न पर रोक लगाओ,देश में बढ़ रहे दलित उत्पीड़न बंद करो,पीएम कहते हैं कि घुसपैठ ही नहीं हुई;तब हमारे सैनिकों की शहादत क्यों और कैसे हुई नरेंद्र मोदी जबाब दो,सभी छात्रों फीस व लोन माफ करो,हम अपना अधिकार मांग मांगते;नहीं किसी से भीख मांगते आदि का हैण्ड बोर्ड और झण्डा लेकर नारें लगा रहे थे।इस मौके पर एसएफआई जिलाध्यक्ष अवनीश कुमार ने कहा कि अमेरिका में हुए नस्लवादी हमले के खिलाफ आज पूरे विश्व भर के लोग सडक पर उतर रहे हैं।जार्ज फ्लाॅइड की मौत नस्लभेद की उस श्रृंखला की सबसे नई कड़ी है जिसकी जड़े अमेरिकी इतिहास में दासों के व्यापार तक जाती है।भारत में भी बहुतायत लोग विशेषकर श्रमिक वर्ग से आने वाले लोगों के साथ जाति और धर्म के नाम पर अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है और उन्हें हाशिये पर धकेला जा रहा है।हाल ही में एक दलित छात्र और एक दलित व्यक्ति को चिन्हित कर हत्या यह प्रदर्शित करती है कि जातिवाद की मानसिकता और भेदभाव की राजनीति की जड़े हमारे यहाँ कितनी गहरे स्तर तक मौजूद है।साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश में हुए बालिका गृह काण्ड में लड़कियों के गर्भवती होने की खबर पर सीबीआई जांच कराने की मांग की।इस "टेक द नी" प्रदर्शन में हीरा कुमारी,मनीषा कुमारी,प्रियंका कुमारी,रेखा कुमारी,बंधुलाल कुमार,अभिषेक कुमार,रजनीश कुमार आदि ने अपनी सहभागिता निभाई।

लक्खीसराय जिले के सूर्यगढ़ा प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, खेमतरणी स्थान की शिक्षिका सरिता कुमारी बतला रही है कि बच्चे और महिलाएं इस देश मे सुरक्षित नही है उनमें असुरक्षा की भावना रहती है जिसे दूर करने के लिए हमे जागरूकता अपने घर से ही शुरू करने की जरूरत है।

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