बिहार राज्य के समस्तीपुर जिला से मोबाइल वाणी के माध्यम से राजकुमार ठाकुर कहते हैं कि समस्तीपुर में पूरे उत्तर भारत में मानसून का आगमन। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
बिहार राज्य के समस्तीपुर जिला से मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते हैं कि समस्तीपुर सदर अस्पताल में कई प्रकार के आधुनिक सुविधा तो उपलब्ध करा दी गई है। लेकिन कई मुलभुत सुविधा अब भी नदारद है। इसके कारण मरीजों के परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विभाग के निर्दर्श पर अटेंडेंस भरवाए जाने वाले फॉर्मेट में दी जा रही जानकारी से कई प्रकार की समस्या सामने आई है। हालाँकि इसके निदान के लिए की पहल नहीं की गई है। सदर अस्पातल के वार्ड में इन दिनों मरीजों की भीड़ लगी हुई है.तेज धुप व भीषण गर्मी के कारण कई प्रकार की बीमारी से ग्रसित हो कर बचे अस्पताल पहुँच रहे हैं
बिहार राज्य के समस्तीपुर जिला के विद्यापति नगर प्रखंड से मोबाइल वाणी संवाददाता रत्न शंकर भारद्वाज ने बताया की विद्यापति नगर प्रखंड क्षेत्र में शनिवार की सुबह से ही मौसम का मिजाज बदला रहा, आकाश में बादल छाए रहने एवं शीतल हवा चलने से लोगों को प्रचंड गर्मी से राहत मिली है । पिछले कई दिनों से तापमान में वृद्धि देखी जा रही थी, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा था, वहीं अधिक तापमान के कारण कई स्थानों पर पेयजल की भी समस्या उत्पन्न हो गई है, हालांकि गत सप्ताह भी मौसम में बदलाव देखा गया था, परन्तु बारिश की आश लगाए लोगों को निराशा हाथ लगी थी । इस बार फिर मौसम में बदलाव से लोग बारिश की उम्मीद लगाए हुए हैं ।इस खबर को सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
बिहार राज्य के समस्तीपुर जिला से रेनू देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से बताती हैं कि नील गाय खेतों में घुस कर पूरा फसल खा जाता है। वे जानना चाहती हैं कि नील गाय को फसल बर्बाद करने से रोकने के लिए क्या करें ?
विद्यापतिनगर नेशनल फैक्टर वार्न डीजिज कंट्रोल प्रोग्राम के तहत प्रखंड के शेरपुर पंचायत में गुरुवार की रात स्वास्थ्य विभाग की ओर से कैंप लगा कर दो दिनों में 255 लोगों का फाइलेरिया की जांच की। बीसीएम विणा कुमारी ने बताया कि 24 जून तक शेरपुर और गढ़सिसई पंचायत के सेंटरों पर फाइलेरिया की जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट जिले को भेजी जाएगी। दोनों केन्द्रों पर तीन-तीन सौ लोगों की जांच करने का लक्ष्य दिया गया है।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
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किसान उत्पादक संगठन से जुड़कर किसान बनेंगे आत्मनिर्भर : मुख्य महाप्रबंधक , नाबार्ड बिहार केंद्र सरकार ने 10,000 एफपीओ स्कीम के तहत पूरे देश में दस हज़ार एफ़पीओ बनाने का लक्ष्य रखा है और इसके लिए विभिन्न सरकारी एवं ग़ैरसरकारी संगठनों द्वारा किसान उत्पादक संगठन का समवर्धन किया जा रहा है । जिले में भी भारत सरकार के इस स्कीम के अंतर्गत सभी प्रखंड में एफ़पीओ बनाए गये हैं और जिसे राज्य एवं केंद्र के विभिन्न विभागों द्वारा सहयोग एवं मार्गदर्शन किया जा रहा है। इसी क्रम में नाबार्ड द्वारा कार्यान्वित एवं प्रोत्साहित एफ़पीओ के निरीक्षण एवं फील्ड विज़िट हेतु आए नाबार्ड के डॉ सुनील कुमार मुख्य महाप्रबंधक, श्री विनय कुमार सिंह महाप्रबंधक नाबार्ड, श्री अजय कुमार गुप्ता उप महाप्रबंधक नाबार्ड, मो सोहेल अहमद अध्ययक्ष उतर बिहार ग्रामीण बैंक, सुश्री जूही प्रवासिनी डीडीएम नाबार्ड मुजफ्फरपुर, डॉ जितेंद्र प्रसाद कार्यक्रम केवीके सरैया, मो नासिमुद्दीन अंसारी ब्लॉक कृषि पदाधिकार इस विज़िट कार्यक्रम मे उपस्थित थे, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक ने बताया कि एफ़पीओ खेत से बाज़ार तक किसानों की भागीदारी सुनिस्चित करती है और किसान उत्पादक संगठन से जुड़कर किसान आत्मनिर्भर होंगे एवं उनकी सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में भी बदलाव आएगा । जिले के 3 प्रखंड – सरैया, बोचहा, और पारू एफ़पीओ के अध्यक्ष और किसान इस कार्यक्रम मे उपस्थित थे और एफ़पीओ के निदेशक मंडल एवं कार्यकर्ताओं को एफ़पीओ के कुशल प्रबंधन हेतु सुझाव दिया गया। ग़ौरतलब है कि मुजफ्फरपुर जिले के 3 प्रखंड – सरैया, बोचहा, और पारू में कौशल्या फ़ाउंडेशन द्वारा किसानों को जागरूक कर किसान उत्पादक संगठन बनाया गया है । इसके लिए संस्था को भारत सरकार की संस्था नाबार्ड के द्वारा ज़िम्मेदारी दी गयी है । किसान उत्पादक संगठन छोटे एवं सीमांत किसानों का एक व्यापारिक, व्यावसायिक एवं भारत सरकार से निबंधित संगठन है जो किसानो का, किसानो के लिये और किसानो के द्वारा चलायी जाती है | इन तीनों प्रखण्ड के कृषक उत्पादक संगठन बिहार मे सबसे अच्छा काम किया है। कौशल्या फ़ाउंडेशन द्वारा प्रोत्साहित जिले के 3 एफ़पीओ में कुल 1600 किसान जुड़े हैं। एफ़पीओ, किसान-सदस्यों द्वारा नियंत्रित स्वैच्छिक संगठन हैं, इसके सदस्य इसकी नीतियों के निर्माण और निर्णयन में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। किसान उत्पादक संगठन की सदस्यता लिंग, सामाजिक, नस्लीय, राजनीतिक या धार्मिक भेदभाव के बिना उन सभी लोगों के लिये खुली होती है जो इसकी सेवाओं का उपयोग करने में सक्षम हैं और सदस्यता की ज़िम्मेदारी को स्वीकार करने के लिये तैयार हैं। यह योजना उत्पादन, उत्पादकता, बाजार पहुंच, विविधीकरण, मूल्य वर्धित, प्रसंस्करण और निर्यात को बढ़ावा देने और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से कृषि आधारित रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए कृषि उत्पादन समूह दृष्टिकोण पर आधारित है। कौशल्या फ़ाउंडेशन के मैंनेजिंग ट्रस्टी कौशलेंद्र ने बताया कि किसान संगठित होकर उत्पादन से विपणन तक लागत में कमी कर सकेंगे और अच्छा मूल्य प्राप्त कर बेहतर आय प्राप्त कर सकेंगे । इस अवसर पर कौशलेंद्र ने अधिक से अधिक किसानों को एफ़पीओ से जुड़ने की अपील की । आज के कार्यक्रम में कौशल्या फ़ाउंडेशन के भास्कर झा,रूपेश कुमार,चंद्रमनी कुमार, कुंदन कुमार सरैया प्रखण्ड के सरैया किसान फार्मर प्रडूसर कंपनी लिमिटेड, के अध्यक्ष अविनाश कुमार , सचिव प्रशुराम चौधरी, निदेशक मण्डल मे मालती देवी, अक्षय कुमार सिंह, राहुल कुमार, बोचहा प्रखंड के एफ़पीओ सीईओ रंजीत कुमार, अकाउन्टन्ट मनोज कुमार, पारू एफ़पीओ के अध्यक्ष नितेश कुमार सम्मानित सैकरो किसान आदि निदेशक एवं प्रगतिशील किसान उपस्थित थे ।
आशा संयुक्त संघर्ष संघ के आवाहन पर समस्तीपुर जिले के सभी प्रखंडों में कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं ने अपने प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के समक्ष अपनी 9 सूत्री मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। संयुक्त संघर्ष संघ की योजना के अनुसार आगामी 4 जुलाई को सिविल सर्जन समस्तीपुर के समक्ष 09 सूत्री मांगो को लेकर प्रर्दशन होगा और मांग पूरा नहीं होने पर सभी आशा कार्यकर्ता 12 जुलाई से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले जायेंगे। आशा कार्यकर्ताओं का मानना है कि आज आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं के रीड की हड्डी बनी हुई है आशा कार्यकर्ताओं की बदौलत बिहार में संस्थागत प्रसव, शिशु मृत्यु दर के आंकड़ों में सुधार हुआ है। तो सरकार को हमारे 9 सूत्री मांग को मानना चाहिए जिससे आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं को और तन्म्यता के साथ समुदाय के लोगों के बीच ले जा सके।
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के लिए गठित विशेष समूह 9 की समीक्षात्मक बैठक में जिलाधिकारी ने पाया की की विगत 12 जून से 17 जून के दौरान जिले में कार्यरत ग्रामीण आवास सहायकों में से 152 ग्रामीण आवास सहायकों के क्षेत्र में कुल लंबित लाभुकों की संख्या के विरुद्ध एक भी लाभुकों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय किस्त प्रदान नहीं किया गया और ना ही एक भी लाभुकों के अपूर्ण आवासों को पूर्ण कराया गया। इस वजह से इन 152 सहायकों से सम्बंधित पंचायतों का प्रगति शून्य रहा और यह प्रखंड एवम जिला के स्कोर को प्रभावित किया है। इससे संबन्धित विभागीय दिशा निर्देश ग्रामीण विकास विभाग के पत्रांक- 379852 दिनांक 14-03-2015- सह- पठित अभिकरण कार्यालय का ज्ञापांक- 387 दिनांक 15 -03 -2016 के अनुसार ग्रामीण आवास सहायक को प्रत्येक दिन कम से कम 20 लाभुकों के आवास निर्माण कार्य की प्रगति को देखना है जबकि जिलाधिकारी द्वारा इसे और आसान एवम संदर्भित करते हुऐ विगत सप्ताहों में निदेशित किया गया था कम से एक लाभुक को प्रतिदीन लक्षित कार्य संपादन का प्रतिवेदन सुनिस्चित करें के वाबजूद कार्य के प्रति सिथिलता गंभीर अनुशासनहीनता का परिचायक है जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि जिस अवधि में आवास सहायकों का प्रतिवेदन शून्य है उस अवधि का मानदेय कटौती कर मासिक मानदेय का भुगतान किया जाएगा एवम अगले सप्ताह में भी प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण ) का प्रगति शून्य रहता है तो कठोर अनुशासनिक कारवाई तथा आर्थिक दंड दिया जाएगा।
बिहार राज्य के जिला समस्तीपुर से एक श्रोता मोबाइल वाणी के माध्यम से मनोरम से साक्षात्कार लिए है जिसमें उनका कहना है कि उन्होंने बकरी शेड बनाने के लिए आवेदन दिया है लेकिन अभी तक नहीं बना है
