झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं के सामूहिक भूमि अधिकार परिवारों और समुदायों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करते हैं। जब महिलाओं को भूमि पर अधिकार और पहुँंच प्राप्त होती है तो इसका आर्थिक लाभ उनके परिवारों और समुदायों तक पहुँचाता है। शोध से पता चलता है कि पुरषों की तुलना में महिलाएं अपने कृषि और भूमि आधारित आय का अधिक हिस्सा अपने परिवार के लिए योगदान करती है।जिसके परिणामस्वरूप खाद्य सुरक्षा और बच्चे के स्वास्थ्य एवं शिक्षा में सुधार होता है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि कुछ समुदाय में महिलाओं को केवल अपने पतियों या पुरुष रिश्तेदारों से प्राप्त सामुदायिक भूमि तक ही पहुंच प्राप्त होती है। जो अक्सर उनकी वैवाहिक स्थिति से जुड़ी होती है। इससे महिला का भूमि स्वामित्व असुरक्षित हो जाता है।जिसका अर्थ है कि पति की मृत्यु या तलाक होने पर वह भूमि पर अपना अधिकार खो सकती है। जिससे वह और उसके बच्चे गरीबी में धकेल दिए जा सकते हैं। कृषि श्रम बल में महिलाओं की अच्छी खासी हिस्सेदारी है लेकिन कृषि भूमि मालिकों को उनकी संख्या अल्पसंख्यक है। यहाँ तक की जब उन्हें भूमि का अधिकार प्राप्त होता है तब भी उनके भूखंड अक्सर दूसरों के भूखंडों की तुलना में छोटे और कम गुणवत्ता वाले होते हैं

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाएं अपने समुदाय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।पारम्परिक रूप से जीविका चलाने वाली उत्पादक है और घरेलू उपयोग या अतिरिक्त आय के लिए पानी,जलाऊ लकड़ी, चारा,जंगली पौधे और जड़ी बूटियां जैसे प्राकृतिक संसाधन को इकट्ठा करने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।फिर भी सभी स्वदेशी और पमंपरिक समुदाय सामूहिक रूप से महिलाओं के भूमि अधिकारों को मान्यता नहीं देती है।महिलाएं कृषि कार्य में लगी रहती हैं। लेकिन इन्हें पैतृक सम्पत्ति में हिस्सा नही दिया जाता है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि विश्व में पच्चीस लाख लोग ऐसे है जो अपनी आजीविका सामाजिक संबंधों और सांस्कृतिक पहचान के लिए सीधे तौर पर सामूहिक भूमि स्वामित्व और प्रणालियों पर निर्भर हैं।सामूहिक भूमि स्वामित्व प्रणालियों में समुदाय के प्रत्येक सदस्य को विशिष्ट संसाधन और भूमि पर विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं। अधिकांश स्देशी और पारम्परिक समुदाय सामूहिक स्वामित्व के अंतर्गत भूमि धारण करते हैं।

यह ऑडियो श्रृंखला पानी, मौसम और खेती से जुड़ी रोज़मर्रा की सच्ची बातों पर आधारित है। इसमें बदलते मौसम का खेती और ज़मीन पर असर, पानी की कमी और उसे बचाने के आसान तरीकों की चर्चा है।

विष्णुगढ़ पुलिस प्रशासन ने एक बार फिर अपनी तत्परता दिखाते हुए एस्कॉर्ट सर्विस के नाम पर 6 आरोपी को ब्लैकमेलिंग करते हुए पुलिस ने धर दबोचे गए।बताते चले कि उक्त आरोपी मसाज के नाम पर लड़कियों को होटल में उपलब्ध कराने होटल व्यवस्था करने के नाम पर झांसा देकर फिनो पेमेंट गूगल पर अन्य तरह से लोगों को अपनी जाल में फंसा कर लोगों से ठगी करने का साइबर क्राइम किया करते थे इसकी सूचना थाना प्रभारी को मिलते रहती थी उन्होंने उक्त जानकारी जिले के एसपी अंजनी कुमार को दी टीम गठित कर सघन छापामारी किया गया जिसमें 6 आरोपी को धर दबोचा इस संबंध में थाना कांड संख्या 1/2026 319 /318/ 316/ 2 61 बीएनएस 66डी आईडी एक्ट के तहत प्राथमिक की दर्ज की गई। पुलिस ने 12 स्मार्टफोन विभिन्न बैंकों का 10 एटीएम एक कर बरामद किया।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जल संरक्षण में महिलाओं के अधिकारों पर आंकड़े समिति है।लेकिन 53 देशों के साक्ष्य बताते हैं कि सत्तर प्रतिशत से अधिक महिलाओं के पास कोई भूमि नहीं है। यदि कोई कदम नहीं उठाया गया तो महिलाएं और भी पिछड़ जाएंगी और जलवायु समबंधित अपदाओं का खतरा उन पर बढ़ जाएगा। जब महिलाओं के सम्पत्ति अधिकार सुरक्षित होंगे तो उन्हें मृदा संरक्षण और अन्य जलवायु अनुकूल कृषि में निवेश करने के लिए अधिक प्रोत्साहन मिलेगा।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि विश्व बैंक समूह की 2024 -2030 के लिए लैंगिक रणनीति में आवास,भूमि और अन्य भौतिक संपत्ति के स्वामित्व और उपयोग का विस्तार करने का आह्वान किया गया है। आय सृजन,खाद्य सुरक्षा,ऋण तक पहुँच और अन्य आर्थिक लाभों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में एचएलपी पर महिलाओं के कानूनी अधिकारों नियंत्रण और पहुँच को सुनिश्चित करना आवश्यक है।जैसे हालिया लेख में बताया गया है कि एसएलपी भूमि और संपत्ति अधिकार के लिए महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने कई तरह के परिणाम पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। जिनमें शामिल है -जैसे की महिलाओं की सौदेबाजी और निर्णय लेने की शक्ति में वृद्धि, घरेलू हिंसा में कमी, खपत में वृद्धि,बेहतर बाल कलयाण,कृषि से इतर श्रम और आय के क्षेत्र में परिवर्तन करने की क्षमता।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं को अपने भूमि अधिकार सुरक्षित करने के लिए कुछ कदम उठाने होंगे। जमीनी स्तर पर महिलाओं के नेतृत्व वाले समुदायिक समूह के राष्ट्रीय आंदोलन की महिलाओं के अनुसार,भूमि अधिकार सुरक्षित करने के लिए दृढ़ता,धैर्य और सहयोग आवश्यकता होती है।केन्या के नापुरा शहर और कुरसोई समुदायों में ग्रुपस के साथ हाल ही में किए गए दौरे के दौरान जिन महिलाओं से हम मिले उन्होंने गठित होकर एक दूसरे का समर्थन करके सामाजिक मापदंडों को चुनौती देकर और पुरुष समर्थकों की पहचान करके और उन्हें प्रोत्साहित करके औपचारिक भूमि अधिकार प्राप्त की है।

विष्णुगढ़ प्रखंड के मडमो पंचायत समिति सदस्य बहाराम हांसदा के द्वारा नए वर्ष की उपलक्ष पर 1 जनवरी को पंचायत के बड़े बुजुर्गों के बीच वन भोज किया साथ ही कम्बल वितरण किया।