झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि दहेज़ और शादी के कारण महिलाओं को पैतृक संपत्ति में अधिकार नहीं दिया जाता है। लोग यह सोचते हैं कि जब शादी में दहेज़ दे चुके हैं तो संपत्ति में अधिकार क्यों दें। लोगों का कहना है कि महिलाओं को संपत्ति में अधिकार दहेज़ के रूप में दे दिया जाता है। इसलिए भूमि में अधिकार नहीं मिलना चाहिए। अक्सर भूमि का रिकॉर्ड पुरुषों के नाम पर होता है जिससे महिला का मालिकाना हक कमजोर हो जाता है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत में पितृ सतात्मक और सामाजिक संरचना रूढ़िवादी परम्पराओं और जागरूकता की कमी के कारण लंबे समय से महिलाओं को भूमि अधिकारों से वंचित रखा गया है। इसमें भूमि का जो अधिकार मिलना चाहिए वह अधिकार ना मिल पाता है। लेकिन ऐसा नहीं है की महिलाएं खेती या भूमि से सम्बंधित कार्य में समय नहीं दे पाती हैं।खेती में ज्यादा रूचि महिलाओं को होती है। फिर भी उनको भूमि के अधिकारों से वंचित रखा गया है। हालांकि दो हजार पाँच में हिंदू उत्तराधिकार संशोधन अधिनियम के बाद बेटो और बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार दिए गए हैं लेकिन जमीनी स्तर पर इसका क्रियान्वयन अभी भी सिमित है
झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वानिंके मध्यम से यह बताना चाहते हैं कि गैर सरकारी संगठन इस उपेक्षा को दूर करने का प्रयास कर रहे उन्होंने गवाहों को इकट्ठा किया है ।अधिकार सूचना आरटीआई के तहत याचिकाएं दायर की है ।सुधारों की मांग की है और संयुक्त भूमि स्वामित्व के लिए दबाव बनाया है । उनकी वार्षिक रिपोर्ट इस बात का महत्वपूर्ण प्रमाण बन गय है की भारतीय नीतियां महिला किसानों के हितों की रक्षा करने में किस प्रकार विफल रही हैं ।इसके बावजूद दशकों के आंकड़ों और संवाद के भी सरकार मौन बनी हुई हैं और स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है ।तो लोगों को यह पूछना ही होगा कि अब एक महिला सुबह पहले उठकर मीलों पैदल चलती हैं,घंटो झुकी रहती हैं ,धूप और सूखे का सामना करती हैं सिर्फ अपने परिवार का पेट भरने के लिए तो उसे किसान कहलाने के लिए और क्या करना पड़ेगा ।जब तक उनका भूमि अभिलेख पर नहीं लिखा जायेगा तक तक समाधान नहीं निकलेगा ।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत भर में पीएम किसान योजना ,किसान क्रेडिट कार्ड फसल बीमा योजना और सुखा राहत कार्यक्रम जैसी कल्याणकारी योजनाएँ आज भी एक पुराने मापदंड पर निर्भर है। भूमि स्वामित्य लेकिन अधिकांश ग्रामीण परिवारों में भूमि का स्वामित्य पुरुषों के हाथों में है। लाखों महिला किसान विशेष रूप से विधवाएं ,एकल महिलाएं ,दलित ,आदिवासी और मुस्लिम किसान उन योजनाओं से वंचित रह जाती हैं जो कृषि समुदाय के समर्थन के लिए बनाई गयी है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत में काम करने वाले व्यक्ति को गिनती में नहीं लिया जाता है। महिलाओं के कृषि श्रम बल में महिलाओं कि संख्या सबसे अधिक है।फिर भी महिलाओं को कृषक के रूप में मान्यता नहीं मिली है। कई महिलाओं के पास कृषि भूमि का स्वामित्य है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत को कृषि प्रधान देश होने पर गर्व है। चुनावी नारों ,वादों और सांस्कृतिक प्रतीकों में किसानों का महिमामंडन किया जाता है। महिलाओं का श्रम अनदेखा किया जाता है। उनके स्वामित्व को अनदेखा किया जाता है। महिलाओं के आवाज़ को व्यवस्थित रूप से दबा दिया जाता है
विष्णुगढ़ प्रखंड के बनासो बोदरा खरकट्टो अचलजामु समेत अन्य क्षेत्रों में शिवरात्रि के अवसर पर भक्त श्रद्धालुओं ने ढोल नगाड़े के साथ पूरा जुलूस घूम गया।
हजारीबाग पुलिस को मिली बड़ी सफलता पुलिस अधीक्षक अंजनी अंजन ने जिले के अलग-अलग थानों में मोबाइल चोरी या गुम होने की सूचना मिली थी उन्होंने तकनीकी टीम गठित कर 135 मोबाइल बरामद किए तथा स्वामित्व की पूरी जानकारी के बाद सामूहिक रूप से वितरण किया गया। उन्होंने नागरिकों से अपील किये कि किसी का यदि मोबाइल चोरी या गुम हो तो थाना में आवश्य सूचना दें।
विष्णुगढ़ प्रखंड के इंटर कॉलेज मैदान में झारखंड के जन नायक गिरिडीह के पूर्व सांसद एवं मांडू के पूर्व विधायक स्वर्गीय टेकलाल महतो की 81 वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत प्रदेश की पहचान एक कृषि प्रधान देश के तौर पर जानी जाती है।किसानो के हाल बेहाल हैं। आज किसानों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। नेतागण किसानों की समस्याओं को नहीं समझते हैं। किसानो को सिर्फ दौड़ाया जाता है और समाधान नहीं होता है।
