विष्णुगढ़ प्रखंड मुख्यालय सभागार में सोमवार को पेयजल स्वच्छता विभाग प्रखंड कोऑर्डिनेटर राजेश कुमार की अध्यक्षता में प्रखंड के विभिन्न गांव से पहुंचे जलसहिया के बीच बैठक किया गया।इस बैठक में मुख्य रूप से ब्रजेश कुमार पंकज कुमार दशमी देवी अनीता देवी सुनीता देवी गेंदो देवी रेखा कुमारी उषा रानी रीना देवी कंचन देवी सज्जनती देवी ललिता देवी समेत बड़ी संख्या में जलसहिया मौजूद रहे।
झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला से पिंकी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि हमें जल के महत्व को समझना चाहिए और इसे बचाने के उपाय करने चाहिए। छोटी-छोटी आदतें जैसे नल को बंद रखना, वर्षा जल संचयन करना, गंदा पानी न बहाना ये सब मिलकर जल संकट को कम करने में सहायक हो सकते हैं। बर्तन धोने और नहाने में पानी की कम मात्रा का उपयोग। वर्षा जल संचयन पानी बह जाने से बचने के लिए बर्तनों और गमलों में पानी जरूरत के अनुसार भरेंसमुदाय में तालाब, झील और जलाशयों का संरक्षण करना जरुरी है ।पेड़ लगाकर भी पानी की बर्बादी रोकी जा सकती है।
इस आख़िरी कड़ी में पानी बचाने और ज़मीन को सँभालने के आसान तरीकों पर बात होती है। खेती और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की समझ इस एपिसोड का मुख्य संदेश है |
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि देश में लगभग 80 परसेंट लोग कृषि पर निर्भर हैं।किसानों को फसल उगाने में जितना पूंजी लगता है उतना बेचने पर भी मूल्य नहीं निकल पाता है।किसानों का कहना है कि फसल उगाने में कई तरह परेशानियां आती हैं। कई जगह फसल में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। फसल में पानी के कमी होने के कारण वह अच्छी तरह से तैयार नहीं हो पाता है और कभी कभी जरूरत से अधिक बारिश होने पर भी फसल खराब हो जाता है
यह ऑडियो श्रृंखला पानी, मौसम और खेती से जुड़ी रोज़मर्रा की सच्ची बातों पर आधारित है। इसमें बदलते मौसम का खेती और ज़मीन पर असर, पानी की कमी और उसे बचाने के आसान तरीकों की चर्चा है।
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