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झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के तत्वाधान में छात्र-छात्राओं के छात्रवृत्ति नहीं मिलने समेत कई जनहित मुद्दे को लेकर डुमरी विधायक जयराम महतो के द्वारा पदयात्रा का शुभारंभ डुमरी के विनोद बिहारी महतो चौक से किया जाएगा इसे लेकर विष्णुगढ़ प्रखंड में बैठक किया गया बड़ी संख्या में जेएलकेएम के कार्यकर्ताओं ने भाग लिए।

आपदा राहत के दौरान भी महिलाओं की स्थिति चुनौतीपूर्ण रहती है। राहत शिविरों में कई बार अकेली महिलाओं, विधवाओं या महिला-प्रधान परिवारों की जरूरतें प्राथमिकता में नहीं आतीं। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- जब किसी महिला के नाम पर घर या खेत होता है, तो परिवार या समाज में उसे देखने का नज़रिया किस तरह से बदलता है? *--- आपके हिसाब से एक गरीब परिवार, जिसके पास ज़मीन तो है पर कागज नहीं, उसे अपनी सुरक्षा के लिए सबसे पहले क्या कदम उठाना चाहिए?"? *--- "सिर्फ 'रहने के लिए छत होना' और उस छत का 'कानूनी मालिक होना'—इन दोनों स्थितियों में आप एक महिला की सुरक्षा और आत्मविश्वास में क्या अंतर देखते हैं?"

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से गीता सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम बताया कि महिलाओं पर होने वाले अत्याचार के पीछे जमीन एक महत्वपूर्ण कारण है।महिलाओं के नाम जमीन होगा तो वो सशक्त होगी और उनका आत्मबल बढ़ेगा। महिलाओं के नाम से मायके और ससुराल में घर नही होता है। दोनों जगह उन्हें कोई भी और कभी भी भगा सकते हैं।महिलाएं प्रताड़ित होती हैं। घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं

हजारीबाग एवं गिरिडीह जिला के पांच श्रमिकों में दक्षिण अफ्रीका के कैमरून में फंसे हुए थे इस समस्या को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने केंद्र सरकार व राज्य सरकार से परिजनों के हित में वतन वापसी की मांग को लेकर ध्यान आकर्षित करवाया उसके बाद कंपनी के द्वारा बकाया मजदूरीभुगतान मिल गया जल्द ही वतन वापसी होगी।

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साल 2024 में राष्ट्रीय महिला आयोग को 25743 शिकायतें मिलीं जिसमें से 6,237 (लगभग 24%) घरेलू हिंसा से जुड़ी थीं. इसी रिपोर्ट के अनुसार 54% शिकायतें उत्तर प्रदेश से आईं, जो घरेलू हिंसा से जुड़ी शिकायतों में उत्तर प्रदेश की प्रमुखता को दिखाता है. उत्तर प्रदेश से 6,470 शिकायतें आई थीं, तमिलनाडु से 301 और बिहार से 584 शिकायतें दर्ज की गई थीं.

ज़िन्दगी के कुछ पलों में लड़को को भी रोने का मन करता है और ऐसे समय में रो लेना कितना ज़रूरी है। पर क्या हमारा समाज इतनी आसानी से लड़कों को रोने की आज़ादी दे दे सकता है ? क्या केबल रोने या न रोने से ही साबित होता है की वो इंसान कितने मज़बूत किरदार का मालिक है ? और क्या इसी एक वाक्य से हम बचपन में ही लिंग भेद का बीज बच्चो के अंदर ने दाल दे रहे है जो पड़े होते होते न जाने कितने और लोगो को अपनी चपेट में ले चूका होता है ! आप के हिसाब से अगर लड़के भी दिलका बोझ हल्का करने के लिए रोयें और दूसरों से नरम बर्ताव करे तो समाज में क्या क्या बदल सकता है ? इस सभी पहलुओं पर अपनी राय प्रतिक्रिया और सुझाव जरूर रिकॉर्ड करें अपने फ़ोन में नंबर 3 दबाकर। और हां साथियों अगर आपके मन में आज के विषय से जुड़ा कोई सवाल हो तो वो भी जरूर रिकॉर्ड करें। हम आपके सवाल का जवाब तलाश कर आप तक पहुंचाने की पूरी कोशिश करेंगे।

गांव आजीविका और हम कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीब दास साहू आलू के फसल में लगने वाला झुलसा रोग के बारे में जानकारी दे रहे हैं ।