सुगौली सामाजिक कार्यों में अग्रणी भूमिका निभा रहे सुगौली के स्वयंसेवी राजन बरनवाल को श्री भारतवर्षीय बरनवाल वैश्य महासभा के बिहार इकाई का सचिव मनोनीत किया गया। विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
मोहनी मंडल की प्रति नही रही दुनिया मे,नहाने गई नदी में डूब गई बेचारी ,बिल्खतें परिवार,
सुगौली किसान सलाहकार सुधी र कुमार किसानों को कर रहे जागरूक। कृषि संबंधित किसानों को जानकारी देने में लगे है।विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
जिला शिवहर पिपराही पुल पर शाम के वक्त कुछ लोग तो तहल रहे थे उसी वक्त एक अभियुक्त मोबाइल छीनकर भागा तभी कुछ लोगों ने चहेत कर मोबाइल छीनकर भागने वाले अभियुक्त को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया जिसकी पहचान सचिन कुमार पिता राम कृत साहनी बसंतपत्ति गांव के निवासी के रूप हुआ है। सुनने के लिए ऊपर के ऑडियो पर क्लिक करें।
पोखर में नहाने गए चार बच्चों की डूबने से मौत। पूरी खबर के लिए ऑडियो सुनें।
केन्द्रीय गृह मंत्री अमीत साह द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर आयोजित वर्चुअल रैली से हरसिद्धि के भाजपा नेता जुडे। विस्तार पूर्वक खबरों को सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
सुगौली प्रखंड के विभिन्न गावों में सामाजिक कार्यकर्ता सह पीएलभी अवधेश कुमार गुप्ता के नेतृत्व में वृक्षारोपण के साथ जागरूकता अभियान चलाया गया। सुनने के लिए ऊपर के ऑडियो पर क्लिक करें।
कभी करते थे देश की सेवा, अब कर रहे हैं कोरोना पीड़ितों की देखभाल - सेवा से पूर्व सिविल डिफेंस से जुड़े थे समरेंद्र - हिचक मिटाने के लिए कोरोना केयर सेंटर में किया संक्रमितों का रुम साफ - 18 से 19 घंटे देते हैं सेवा - एक महीने से नहीं गये हैं घर सीतामढ़ी : जब एक तरफ पूरे देश में आम आदमी कोरोना के भय से अपने घरों में बंद हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी कर्तव्यनिष्ठ लोग हैं जिनका कर्ज न तो देश और न ही कोई देशवासी उतार सकता है। हर क्षण अपने कर्म से अपने को योद्धा साबित कर रहे हैं। ऐसे ही कर्तव्यनिष्ठों में शामिल हैं सीतामढ़ी अस्पताल में जिला सामुदायिक प्रबंधक समरेन्द्र नारायण वर्मा। इन्होंने अवसर को सेवा में बदल दिया है। परिवार से दूरी हो या संक्रमण का खतरा इन्हें किसी की परवाह नहीं है। वह लगातार कोरोना केयर सेंटर अपनी सेवा दे रहे हैं एवं विगत 1 महीने से इस कारण घर भी नहीं जा सके हैं। समरेन्द्र कहते हैं, जब भी मौका मिला है उन्होंने अपने पूरे मन से सेवा की है। इस सेवा से पहले भी वह सिविल डिफेंस से जुड़े थे। बहुत सारे प्राकृतिक आपदाओं में उन्होंने काम किया। इस वक्त उन्हें कोरोना केयर सेंटर का प्रभार दिया गया है। जहां संक्रमितों का इलाज होता है। वह जिले के जिलाधिकारी, सिविल सर्जन और नोडल पदाधिकारी को इस सेंटर की जिम्मेदारी देने पर उनका आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने बताया देश के दुश्मनों से लड़ने में जो उन्हें खुशी महसूस होती थी। कुछ ऐसी ही खुशी कोरोना केयर सेंटर में लोगों की सेवा कर उन्हें होती है। ख़ुद सफाई कर लोगों के मन से डर को भगाया: समरेंद्र बताते हैं, उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों से सुझाव लिए। एक बेहतरीन डॉक्टरों की टीम बनायी। संक्रमित भर्ती होने लगे। यहां तक तो ठीका था। पर यह इतना आसान नहीं था। लोगों के मन में कोरोना के प्रति खौफ था। लोग सफाई और खाना पहुंचाने से भी डरते थे। उनके सामने यह बड़ी दुविधा थी। पर लोगों के मन से डर निकालने का एक ही तरीका था। उन्होंने प्रभारी के पद को किनारे रखा और सफाई करने में जुट गया। खाना मैं पहुचाने लगा। उनके कचरे को जलाता। यह देख लोगों के मन से भय निकलने लगा। यह समस्या तो हल हो गयी। अब जो समस्या थी वह इससे भी बड़ी थी। आखिर संक्रमितों को क्या दिया जाय कि उनका इम्यून सिस्टम अच्छा हो और वे कोरोना को हरा सकें। इसके लिए भी उन्होंने एक स्ट्रेटजी तैयार की और यह तय किया गया कि संतुलित आहर खाने का समय निर्धारण बिल्कुल सटीक हो। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास भी होगा। नतीजतन तेजी से संक्रमितों की रिकवरी हो रही है। वह मरीजों को खुला आसमान भी देते हैं ताकि वे मानसिक रुप से भी स्वस्थ्य रह सकें। उन्होंने बताया सभी ने मिल कर ईद त्यौहार को भी मनाया। अब सभी एक परिवार की तरह ही रहते हैं। यहां ड्यूटी में लगे डॉक्टर का योगदान भी कहीं से भी उनसे कम नहीं है। एक महीने से नहीं गये घर : समरेन्द्र कहते हैं बिना परिवार के सहयोग के आप कुछ नहीं कर सकते। उनका बेटा छह साल का है, जिसे उनके साथ सोने की आदत है। उनकी पत्नी को माइग्रेन है एवं वह खुद अस्थमा से पीड़ित हैं। वह कहते हैं, दिक्कत तो है, पर यह समय अपने लिए नहीं है। मेरे इस काम में मेरी पत्नी भी मेरा सहयोग करती है। मेरे यहां रहते उसे माइग्रेन का सर दर्द शुरु हो गया था, पर उसने एक कॉल तक नहीं किया। जब यह बात मुझे पता लगी तो उसने कहा कि इससे आपका काम में ध्यान नहीं लगता। वीडियो कॉल से ही संतोष कर लेता हूं। दो बार मेरी कोरोना जांच हो चुकी है जिसमें रिपोर्ट निगेटिव आया है। 18 से 19 घंटे बिताते हैं केंद्र पर : कोरोना केयर सेन्टर पर समरेंद्र 18 से 19 घण्टे का समय बिताते हैं। सेन्टर में भर्ती लोगों को किसी भी तरह की कोई दिक्कत न हो, इसलिए वह अधिकतम समय केंद्र पर ही रहते हैं। प्रतिदिन पूरे सेंटर को तीन बार डिस्इंफेक्ट भी करते हैं। साथ ही उपयोगिता के आधार पर सामानों की पूर्ति भी कराते हैं। आज वह इस केंद्र की देखभाल एक अभिवावक की तरह कर रहे हैं। अपने स्तर से भी संक्रमितों की मदद: "मैं थोड़ा भावूक इंसान हूं। मेरे यहां एक 14 वर्ष की संक्रमित भर्ती हुई थी। जिसके पिता की मौत हो चुकी थी और मां भी एनएमसीएच में भर्ती थी। पूरा परिवार कोरोना से पीड़ित था। उसके निजी जरुरतों के लिए मैं अपनी पत्नी से कहता तो वह तुरंत ही उसे पूरी कर देती। कुछ चीजें सरकारी स्तर से नहीं हो सकती। अक्सर ही मैं संक्रमितों के मोबाइल का रिचार्ज तथा कुछ निजी जरुरतों को भी पूरा कर देता हूं" समरेंद्र ने बताया। सामाजिक द्वेष से बचें: समरेंद्र कोरोना को लेकर हाल के दिनों में कुछ दंगे और किसी खास समुदाय पर जो आरोप लगाये गये उसके विषय में बात करते हुए कहते हैं, किसी समुदाय विशेष को टारगेट करना तर्कहीन हैं। यह अदृश्य दुश्मन किस पर वार करेगा। कोई नहीं जानता। यह समय साथ मिलकर देश को संबंल प्रदान करने का है। प्रत्येक भारतवासी कोरोना योद्धा है। फर्क सिर्फ इतना है वे घरों में हैं, हम बाहर।
प्लास्टिक कचरों से होने वाले नुकसान पर रिसाइक्लिंग यूनिट की मदद से लगेगी लगाम • पर्यावरण को साफ रखने में स्वास्थ्य विभाग भी करेगा सहयोग • यूएनडीपी के विकास लक्ष्यों में शामिल हैं प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट • गर्दनीबाग में लगाया गया है प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट • प्रतिदिन 5 टन प्लास्टिक रिसाइकल करने की है क्षमता पटना, 5 जून: कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जहाँ सरकार व स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रबंधन को लेकर भी तैयारियां की जा रही है. वहीं यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम( यूएनडीपी), पटना नगर निगम एवं हिंदुस्तान कोकाकोला बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर कार्य करने में जुटी है . अपशिष्ट का समुचित प्रबंधन आवश्यक है ताकि बड़े स्तर पर संक्रमण के खतरों की रोकथाम के साथ स्वच्छ पर्यावरण तैयार किया जा सके. इसको लेकर पटना के गर्दनीबाग में पहला प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र स्थापित की गयी है. पटना निगर निगम, यूएनडीपी व हिंदुस्तान कोकाकोला की साझेदारी के तहत प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन कार्यक्रम के तहत शुरूआत की गयी है. इस पहल के तहत प्लास्टिक कचरे को अनियंत्रित करने वसे पर्यावरण को होने वाले नुकसान और जोखिम को कम करना है. इसके तहत प्लास्टिक कचरों के संग्रहण, पृथ्क्करण और उनके रिसाइकलिंग के माध्यम से स्थायी रूप से प्लास्टिक कचरों के प्रबंधन से जुड़े व्यवहार व आदतों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. भारत सरकार के स्वच्छ भारत मिशन, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 व यूएनडीपी के ससटेंनेबल डेवलपमेंट के लक्ष्यों के अनुरूप इस कार्य को किया जा रहा है. गर्दनीबाग में लगाया गया है प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट: अरविन्द कुमार, कार्यक्रम पदाधिकारी- प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, यूएनडीपी ने बताया यह परियोजना बिहार सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के अनुरूप संसाधनों के उपयोग को बेहतर बनाने के लिए एक सामाजिक-तकनीकी मॉडल (अलगाव, संग्रह और पुनर्चक्रण) को दर्शाती है. प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र गर्दनीबाग में स्थापित किया गया है. इस मशीन की क्षमता 5 टन प्रतिदिन है और इसका संचालन बीते 3 माह से नियमित तौर पर हो रहा है. गाइडलाइन के अनुसार किया जाना है रिसाइक्लिंग: प्लास्टिक कचरों की पहचान कर उसका रिसाइक्लिंग किया जाता है. इसके लिए आवश्यक गाइडलाइन भी दिये गये हैं. गाइडलाइन में कहा गया है कि प्लास्टिक कचरे का पुनर्चक्रण या रिसाइक्लिंग भारतीय मानक के अनुरूप होगा. गाइडलाइन फॉर रिसाइकलिंग आॅफ प्लास्टिक, IS 14534: 1998 में कहा गया है कि प्लास्टिक कचरे को विभिन्न माध्यमों से प्रोसेसिंग कर PWM नियम 2016 और 2018 के अनुसार उसका पुर्ननवीनीकरण किया जाये. प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र में ये हैं व्यापक सुविधाएं: • महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल • संक्रमण की रोकथाम एवं मामूली चोटों के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य की उपलब्धता • प्रजनन स्वास्थ्य की देखभाल • उचित वेतन व कार्य में समानता • साफ पानी की उपलब्धता • अलग अलग शौचालय की सुविधा महिलाओं के लिए होगी विशेष सुविधा: अनौपचारिक रूप से कचरा बीनने वाली महिलाओं को इस कार्यक्रम के तहत शामिल करने की पहल की जा रही है. साथ ही गर्दनीबाग स्थित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र में महिलाओं की सुविधाओं का विशेष ख्याल रखा जा रहा है. इसमें कार्य करने वाले महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर एवं महिलाओं की पोषण एवं गर्भावस्था की समुचित देखभाल के साथ माहवारी स्वच्छता सुनिश्चित कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. साथ ही लिंग आधारित हिंसा को रोकने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा. इन योजनाओं की सुविधा: यूएनडीपी, पटना नगर निगम एवं एचसीसीबी के सहयोग से पटना में कचरा बीनने वालों को चिन्हित किया गया है एवं उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उनके बैंक अकाउंट भी खोले गए हैं. साथ ही उन्हें सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने की भी कोशिश की जा रही है. जिसमें आयुष्मान भारत योजना, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, जेंडर एक्शन प्लान एवं अटल पेंशन योजना जैसे अन्य कार्यक्रम शामिल हैं.
पूर्वी चंपारण जिला अधिकारी शीर्षत कपिल अशोक के द्वारा ब्यापक वृक्षारोपण कार्य का शुभारंभ
