b.r.a. बिहार विश्वविद्यालय ने सत्र को नियंत्रित करने को लेकर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को नामांकन के साथ ही करने की योजना बनाई है।
b.r.a. बिहार विश्वविद्यालय मैं लेट चल रहे हैं सेशन को समय पर लाने के लिए परीक्षा के रिजल्ट के बाद फिर परीक्षा शुरू हो जाएगी।
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय पीजी सत्र 2020 22 सेमेस्टर की परीक्षा का रिजल्ट 1 से 2 दिनों में पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा।
बिहार विश्वविद्यालय में स्नातक सत्र 2022 25 में नामांकन के लिए फास्ट मेरिट लिस्ट तैयार।
b.Ed में एडमिशन के लिए फर्स्ट मेरिट लिस्ट जारी।
डीसीएम नन्दन झा ने बताया कि परिवार नियोजन के लिए जागरूकता फैलाकर परिवार नियोजन के सभी साधन जो सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क उपलब्ध हैं, के विषय में जागरूक किया गया। इस मौके पर मौजूद महिलाओं को नसबंदी की जानकारी भी दी जाती है।
9 लाख 58 हजार बच्चों के बीच ओआरएस पैकेट वितरण का लक्ष्य - 87 प्रतिशत तक ओआरएस पैकेट का हुआ है वितरण
बिहार राज्य के चम्पारण जिला से सहिस्ता कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह कहती हैं कि सिविल सर्जन डॉक्टर अंजनी कुमार के द्वारा यह बताया गया कि स्वास्थ्यकर्मियों ने लोगों को कोरोना टीकाकरण के लिए जागरूक किया। उन्होंने बताया कि बिहार के 27 जिलों में शिविर लगाकर लोगों को टीकाकरण दिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि कोरोना टीकाकरण को लेकर पूर्वी चम्पारण दूसरे स्थान पर है
गर्भावस्था के दौरान जच्चा-बच्चा को स्वस्थ और सुरक्षित करने में स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। इस उपलक्ष्य में पूरे जिले में बुधवार को स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान मनाया गया। इस अभियान के तहत गर्भवती माताओं के प्रसव पूर्व की जांच की जाती है, जिसमें उनके रक्तचाप, शुगर, हीमोग्लोबिन सहित अन्य तरह के स्वास्थ्य की जांच की गयी। योगापट्टी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मेडिकल ऑफिसर डॉ शाहिद इकबाल और डॉ तमन्ना ने बताया कि योगापट्टी सीएचसी में दोपहर एक बजे तक 70 गर्भवती महिलाओं की जांच की गयी। इनमें छह महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंट महिला के रूप में चिन्हित हुई हैं।
टीबी पूर्णतः ठीक होने वाली बीमारी है। इसके उपचार की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी इसके दवाओं का नियमित सेवन है। जिसे निगरानी या सतत मॉनिटरिंग से ही संभव किया जा सकता है। यह बातें जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ टीएन प्रसाद ने मंगलवार को कही। उन्होंने बताया कि जिले में जितने भी टीबी मरीज इलाजरत हैं, उनके पूर्ण उपचार के साथ निगरानी के लिए मरीजों का फॉलोअप आवश्यक है। यह टीबी के मरीजों के परिणाम में सुधार के लिए भी आवश्यक है। फॉलो अप के दौरान हमें टीबी रोगी के घर में रह रहे अन्य लोगों के लक्षणों पर भी ध्यान देना होता है। अगर कोई संदिग्ध दिखता है तो उसके सैंपल लेकर भी हम ट्रू नेट मशीन या माइक्रोस्कोपिक जांच करते हैं।
