उत्तरप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर से अलोक श्रीवास्तव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि 80 % पानी दूषित पाया जाता है और दूषित पानी पीने से कई प्रकार की बीमारियां होती हैं। नदियां हैं, इसलिए पानी को उबालें और एक बर्तन में डालें, फिर इसका उपयोग उबला हुआ पानी पीने के लिए करें। पानी उबलने से जो कुछ भी प्रदूषित है वह नष्ट हो जाता है। बारिश न होने के कारण जल स्तर गिर गया है। नदी का तालाब, कुआँ, पोखरा आदि। उनमें से लगभग सभी सूख चुके हैं। नदियों में रहने वाले लोग इस समय से थोड़ा पानी देते हैं और चले जाते हैं। तालाबों से निकलने वाले कवच प्राकृत नदियों के होते हैं। विरासत ताला पुखरा नदी है इसलिए हम लोगों द्वारा बनाए गए हैं लेकिन नदियाँ प्रकृति में देर से आती हैं, आज उनमें वही स्थिति पैदा हो गई है। पानी नीचे जाने के कारण, यह अधिक से अधिक होता जा रहा है, इसलिए यह पानी को उबलाता है।
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दोस्तों बच्चों के लिए काम करने वाली अंतराष्ट्रीय संस्था यूनिसेफ ने हर साल 11 जून को बच्चों के खेल का ख़ास दिन घोषित किया है। यानि ऐसा दिन जो सभी को याद दिलाये कि बच्चों के साथ बच्चे बन जाना कितना प्यारा है। बच्चों को जन्म से ही खेल खेल में सिखाना कितना प्यारा है। सिखाना भी बड़ों के तरीके से नहीं ,ऐसा खेल जिसमें बड़ों की नहीं हमारे नन्हें मुन्हें ,प्यारे -प्यारे बच्चों की मर्ज़ी चले। क्योकि इससे बच्चे तेज़ी से खुद सीखते हैं। आने वाले 11 जून यानि की इस मंगलवार को भी एक घंटे का समय निकालिये और अपने और अपने आस पास के बच्चों के साथ बच्चा बन जाइये।और हाँ आपने और बच्चों ने क्या खेला और उसमे बच्चों को कितना मज़ा आया ये मोबाइल वाणी पर रिकॉर्ड कर के जरूर बताइये।
"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि विशेषज्ञ अशोक झा धान की फसल के लिए धान के नर्सरी तैयारी करने के बारे में जानकारी दे रहे हैं। इसकी पूरी जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें.
सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...
उत्तरप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर से अलोक श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि राजीव जी ने उसमें कहा हैः मेरे घोषणापत्र में सभी को समान अधिकार दिए जाने चाहिए, लेकिन जब मेरे देश में आरक्षण व्यवस्था चल रही है तो मैं सभी को समान अधिकार कैसे दे सकता हूं? बी. सी. के इतने प्रतिशत के लिए आरक्षण इतना प्रतिशत है कि चूंकि गरीब हर जाति में हैं, इसलिए ऐसी कोई जाति नहीं है कि गरीब केवल निचले वर्ग में पाए जाते हैं और प्रतिशत में अधिक हैं। लेकिन अगर गरीबी हर वर्ग में है, तो आरक्षण के अनुसार समान अधिकार उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए समान अधिकार हमारी समझ है। यह उचित समान अधिकार नहीं है तो यह कहा जाता है कि परिवार में हर कोई अगर बच्चों के लिए ट्रॉफी लाता है तो घर में चार बच्चे होते हैं तो चार टॉफी लेते हैं या आठ टॉफी लेते हैं जिसे समान अधिकार कहा जाता है। अगर हम तीन भाई हैं, सभी की पत्नियां हैं, बच्चे हैं, तो एक अभिभावक या जो कोई बड़ा या छोटा है वह बाजार से सामान लाता है, तो वह इसे सभी के लिए लाता है, अगर केवल अपने परिवार के लिए।
उत्तरप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर से अलोक श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि हर गांव में नल के पानी की सुविधा प्रदान की गई है। हर गाँव में नल लगाए गए हैं लेकिन नल का पानी आज तक नहीं आया है क्योंकि हमने तस्वीर को भी इस तरह तोड़ दिया है। काम करवाने से सरकार को पैसा बर्बाद करने का फायदा हुआ है। इस तरह का काम न किया जाए तो अच्छा है। सरकार लोगों को साफ पानी दे रही है, लेकिन सभी को कागज पर साफ पानी मिल रहा है। लेकिन वास्तव में यह न मिलना बहुत दुखद खबर है कि लोग सुविधा होने पर भी इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इसका मुख्य कारण अनुबंध के काम की कमी है, इस सरकार की ओर से इसकी कमी है, इसके बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं है, या यह खबर सरकार पर निर्भर है।
उत्तरप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर से के सी चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि श्रमिक उतना काम नहीं कर रहे हैं जितना ऑनलाइन उपस्थिति दिखाई जा रही है। यह सच है कि मनरेगा योजना के तहत लोगों को रोजगार दिया जा रहा है, उन्हें रोजगार मिल रहा है, लेकिन आधे लोगों को रोजगार मिल रहा है, यहां तक कि जिन्हें प्रधान और अन्य लोग पसंद करते हैं, उन्हें भी नहीं मिल रहा है। लोग कहते रहे हैं कि केवल प्रधान की तरफ रहने वाले लोगों को ही मनरेगा योजना में काम के लिए बुलाया जाता है और अन्य लोगों को भी काम पर रखा जाता है। समस्याएँ हैं। लोगों का कहना है कि इस काम को मुखिया से हटाकर ब्लॉक के अधिकारियों से करवाकर गांव में कोई विरोध नहीं होगा और सभी लोगों को रोजगार दिया जाएगा।
उत्तरप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर से के सी चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि आने वाले समय में वे पर्यावरण को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। आपको बता दें कि गेहूं की कटाई के बाद अब फसल का अवशेष डंठल है। किसान थूक रहे हैं और जलने से निकलने वाला धुआं आसमान में काले बादल जैसा है, जिससे आम जनता के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। सरकार को भी इस पर प्रतिबंध लगाना चाहिए क्योंकि ध्वनि प्रदूषण के बजाय वायु प्रदूषण भी धीरे-धीरे बहुत खतरनाक होता जा रहा है, जिससे लोग स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं। और अन्य बीमारियाँ उत्पन्न होने की संभावना है, लेकिन सिस्ट की दृढ़ता के साथ, आसमान उड़ रहा है, जिससे लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। यदि आप ऐसा करना चाहते हैं, तो डंठल न काटें, बल्कि उन्हें खेत में हल करें ताकि खाद बने और यदि आप डंठल काटते हैं, तो खेत में मौजूद सभी कीटाणु मर जाएंगे और जिससे उपज भी अच्छी होगी।
उत्तरप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर से सरद कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि अत्यधिक गर्मी के कारण जगह जगह पेय जल का व्यवस्था किया गया है। जिससे स्थानीय व राहगीरों को काफी राहत मिल रही है।
