उत्तरप्रदेश राज्य के जिला बलरामपुर से अंकिता मिश्रा , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती है कि महिलाएं घर के कामों के अलावा, लड़के बच्चों की देखभाल भी करते हैं और खेतों में बुवाई, प्रत्यारोपण, निराई और खाद बनाने जैसे अन्य काम भी करते हैं। भूमिहीन किसान परिवारों में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी अपना समर्थन देती हैं। घर का काम करने के बाद भी महिलाएं बाहर जाती हैं। वे बाहरी काम भी करते हैं। महिलाएं पुरुषों की तुलना में कमजोर नहीं होती हैं। ऐसे काम हैं जो पुरुष नहीं कर सकते हैं, वे काम महिलाएं करती हैं। महिलाएं कृषि, घरेलू उद्योग, खाद्य संग्रह, मछली पालन आदि जैसे विभिन्न कार्यों में हाथ मिलाकर देश में आती थीं।

उत्तरप्रदेश राज्य के जिला बलरामपुर से नीलू , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती है कि गर्मी बहुत बढ़ गया है। लोग बीमार पड़ रहे है।

उत्तरप्रदेश राज्य के जिला बलरामपुर से नीलू , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती है कि महिलाओं को भी अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए, न केवल पुरुषों के अधिकार हैं, महिलाओं के भी अधिकार हैं, उन्हें सामाजिक रूप से भी अधिकार हैं और भले ही वे शहरों या कस्बों में हों। या उन्हें सामाजिक रूप से कहीं भी महिलाओं को उनका अधिकार मिलने चाहिए ,अगर हम ऐसा करते हैं, तो इसका हमारे समाज और आर्थिक व्यवस्था पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है।

उत्तरप्रदेश राज्य के जिला बालमपुर से वीर बहादुर यादव , की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से संतोष जी से हुई। संतोष जी बताते है कि अधिक गर्मी पड़ने का कारण है हरे पेड़ों का कटान होना और लोग वृक्ष नहीं लग रहे हैं

उत्तरप्रदेश राज्य के जिला बालमपुर से वीर बहादुर यादव , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है कि समाज में ना तो महिलाएं अपने पति का नाम लेते हैं और ना पति अपने महिला का नाम लेते हैं महिला को अगर पुकारते हैं तो उनके बच्चे के नाम से पुकारते हैं या उनके मायके के नाम से पुकारते हैं। ऐसी परंपराएं रही हैं जो उनकी रूढ़िवादी सोच हैं, पुरानी परंपराओं को आगे बढ़ाया गया है क्योंकि कुछ महिलाएं अपने पति का नाम लेने से बचती हैं क्योंकि ऐसी कई परंपराएं हैं जिन्हें हमारे पूर्वजों ने आगे बढ़ाया है। और जो बात आपने हमें बताई वह यह है कि महिलाओं को नाम नहीं लेना चाहिए, इसलिए यह पुरानी परंपरा है, इनमें से कुछ में निरक्षरता की भी कमी है, उनमें से कुछ को निरक्षर होते हुए भी इसकी जानकारी नहीं है, अगर वे शिक्षित हैं, तो हर जगह। मैंने देखा है कि शहरी इलाकों में जब महिलाएं किसी कारण से अपने पति के नाम पर अटक जाती हैं तो महिलाओं को अपने पति का नाम लेने में कोई झिझक नहीं होती।

उत्तरप्रदेश राज्य के जिला बालमपुर से वीर बहादुर यादव , की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से विशाल जी से हुई। विशाल जी बताते है कि महिलाओं को महिलाओं के नाम से नहीं जाना जाता है उनके बच्चे या उनके पति के नाम से जाना जाता है। महिलाएं अपने लिए आवाज नहीं उठा पाती है। इस परम्परा को ठीक करने के लिए लोगों को शिक्षित होना बहुत जरूरी है।

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया की महिलाओं के साथ आर्थिक या शारीरिक शोषण आम बात है, अगर इन अपराधों की एक सूची तैयार की जाती है, तो कई पृष्ठ भर जाएंगे। सरकार को इन अत्याचारों के बारे में पता भी नहीं है।महिलाओं की रक्षा के लिए कई कानून है। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि आम महिलाएं इन कानूनों के बारे में कितनी जागरूक हैं, वे अपने अधिकारों के लिए इन कानूनों का कितना उपयोग कर पा रही हैं। संविधान ने महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार दिए हैं। महिलाओं के खिलाफ हिंसा, महिला श्रमिकों के अधिकारों को बढ़ाने और समाज में अपनी स्थिति को मजबूत करने के खिलाफ लोगों की बढ़ती संख्या एक सौ पचास देशों में अब घरेलू हिंसा पर कानून हैं एक सौ चालीस देशों में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ कानून हैं। कानून हैं, लेकिन इसके बावजूद महिलाओं और पुरुषों के बीच असमानता अभी भी बहुत गहरी है और इसे भरने के लिए एक लंबा रास्ता तय करना है, जो चुनौतियों से भरा होगा

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया की महिलाएँ अदालत जाने के अपने अधिकार का उपयोग नहीं कर पाती हैं।इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि महिलाएँ खुद को इतना बड़ा कदम उठाने के लिए स्वतंत्र नहीं मानती हैं। आज भी हमारे देश में दहेज के लिए हजारों लड़कियों को जलाया जा रहा है और बहुत सी लड़कियों को यौन शोषण की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। महिलाएं अपने अधिकारों का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पा रही हैं।

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया की महिलाओं को भेदभाव से गुजरना पड़ता है, उसे पुरुषों से कमतर माना जाता है।महिलाओं को समाज में पुरुषों के समान अधिकार नहीं है। उसे सदियों से पुरुषों के साथ समान अधिकार पाने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ रही है। ग्रामीण क्षेत्र में उनकी स्थिति अभी भी दयनीय है। अगर समाज में ऐसा ही चलता रहा तो महिलाओं को समाज में पुरुषों के समान अधिकार कैसे मिलेंगे। वे हमेशा गुलाम का जीवन जीते रहेंगी

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया की भीषण गर्मी के कारण शहर का जल स्तर बहुत कम हो गया है, जिससे नगर पंचायत के लगभग पचास हजार लोग पीने का पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। कई इलाकों में पानी की कमी के कारण टंकी से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। शहर में लगाए गए एक सौ पचास हैंडपंपों में से पंद्रह सूख गए हैं। पिछले तीन-चार दिनों से जल स्तर कम होने के कारण लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है।