उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से वीर बहादुर यादव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से विकास वर्मा से बातचीत किया। बातचीत के दौरान विकास वर्मा ने बताया कि महिलाओं को उनके नाम से पुकारना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के आभाव से महिलाओं को उनके नाम से नहीं पुकारा जाता है।

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से काजल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को सम्मान मिलना जरुरी है। लैंगिक असमानता के प्रमुख कारणों में से एक महिलाओं में उनके अधिकारों और समानता प्राप्त करने की उनकी क्षमता के बारे में जागरूकता की कमी है। जागरूकता की यह कमी अक्सर प्रचलित सांस्कृतिक और सामाजिक मानदंडों के कारण होती है, जो यह तय करते हैं कि महिलाओं को पुरुषों के अधीन रहना चाहिए।परंपरागत रूप से महिलाओं को समाज के एक कमजोर वर्ग के रूप में देखा जाता रहा है। वे घर और समाज दोनों में सामाजिक रूप से हाशिए पर हैं। महिलाओं के खिलाफ भेदभाव दुनिया भर में प्रचलित है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से काजल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि मानव जीवन तापमान की एक संकीर्ण सीमा के भीतर समर्थित है, शरीर का तापमान निर्धारित बिंदु 98.6°F (37°C) है। बहुत कम या बहुत अधिक तापमान के कारण एंजाइम काम करना बंद कर देते हैं और चयापचय रुक जाता है। 82.4°F (28°C) पर मांसपेशियों की विफलता होती है और हाइपोथर्मिया शुरू हो जाता है।शरीर के तापमान में बढ़ोतरी को बेहतर ढंग से कम करने के लिए इन थर्मोरेगुलेटरी प्रतिक्रियाओं की क्षमता जलयोजन स्थिति से प्रभावित होती है। उदाहरण के लिए, द्रव संतुलन में कमी (यानी, निर्जलीकरण) के परिणामस्वरूप शरीर का मुख्य तापमान यूहाइड्रेशन बनाए रखने की तुलना में अधिक होता है। हमारा शरीर पानी से बना है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से काजल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि पर्यावरण संरक्षण हमारी संस्कृति का अंग है, परंतु मानव में अपने स्वार्थ के लिए प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की प्रवृत्ति ने पर्यावरण संकट की नई चुनौती को जन्म दिया है। कोविड-19 महामारी ने हमें साफ हवा की कीमत समझा दी है। पर्यावरण संरक्षण के निमित्त आमजन का सहयोग अनिवार्य हो गया है।आज मानव को हरित मानसिकता विकसित करने की आवश्यकता है। दैनिक कार्यों में प्लास्टिक का कम से कम प्रयोग किया जाए, ताकि पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके। घरों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों को अलग-अलग वर्गों में विभाजित किया जाना चाहिए। किसान जैविक खेती करें। कम से कम उर्वरक व कीटनाशकों का प्रयोग किया जाए। प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास गमलों में छोटे-छोटे पौधे लगाएं। कम बिजली, कम पानी, कम गैस का प्रयोग कर कोई भी व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्रदूषण रोकने के लिए जलाऊ लकड़ी का उपयोग कम करना जरूरी है, जिसके लिए विद्युत शवदाह गृहों का उपयोग करना चाहिए। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए कम दूरी तय करने के लिए साइकिल एवं अधिक दूरी तय करने के लिए सार्वजनिक वाहनों का उपयोग करें। छोटे-छोटे प्रयास करके भी पर्यावरण को ठीक रखा जा सकता है।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

उत्तरप्रदेश राज्य के जिला बलरामपुर से श्री देवी सोनी , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती है कि हमे पानी को बचाना चाहिए। पानी को बर्बाद नहीं करना चाहिए। पुराने शौचालय को बदले। शौचालय में पानी बर्बाद नहीं करना चाहिए।

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से काजल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि गर्मियों में मानव शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आने से हीट स्ट्रोक और निर्जलीकरण हो सकता है। साथ ही हृदय,श्वशन और अन्य रोग भी हो सकते हैं। अत्यधिक गर्मी उत्तरी अक्षांशों में आबादी को प्रभावित करने की अधिक संभावना है। जहाँ लोग अत्यधिक तापमान से निपटने के लिए कम तैयार हैं। जलवायु परिवर्तन मानव स्वास्थ्य को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरीकों से प्रभावित करता है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

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उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से श्रीदेवी सोनी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत कृषि प्रधान देश है। और देश की महिलाएं कृषि के क्षेत्र में भी अपनी अहम् भूमिका निभा रही है। महिलाएं हर कुछ करने में सक्षम है।

उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से नीलू पाण्डेय ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि समाज में लड़कियों को लड़कों से कम पढ़ाया लिखाया जाता है जो की बहुत ही गलत है। महिलाओं को भी पुरुषों के समान शिक्षा का अधिकार है।