किसी भी समाज को बदलने का सबसे आसान तरीका है कि राजनीति को बदला जाए, मानव भारत जैसे देश में जहां आज भी महिलाओं को घर और परिवार संभालने की प्रमुख इकाई के तौर पर देखा जाता है, वहां यह सवाल कम से कम एक सदी आगे का है। हक और अधिकारों की लड़ाई समय, देश, काल और परिस्थितियों से इतर होती है? ऐसे में इस एक सवाल के सहारे इस पर वोट मांगना बड़ा और साहसिक लेकिन जरूरी सवाल है, क्योंकि देश की आबादी में आधा हिस्सा महिलाओं का है। इस मसले पर बहनबॉक्स की तान्याराणा ने कई महिलाओँ से बात की जिसमें से एक महिला ने तान्या को बताया कि कामकाजी माँओं के रूप में, उन्हें खाली जगह की भी ज़रूरत महसूस होती है पर अब उन्हें वह समय नहीं मिलता है. महिलाओं को उनके काम का हिस्सा देने और उन्हें उनकी पहचान देने के मसले पर आप क्या सोचते हैं? इस विषय पर राय रिकॉर्ड करें

"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि विशेषज्ञ जीवदास साहू गर्मी के दिनों में लत्तर वाली फसलों में लगने वाली रोग और नियंत्रण के बारे में जानकारी दे रहे हैं। इसकी पूरी जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें.

सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...

उदास होने पर हंसा देती है माँ नींद नहीं आने पर सुला देती है माँ मकान को घर बना देती है माँ खुद भूखी रह कर भी बच्चों का पेट भर्ती है माँ जी हां दोस्तों, माँ होती ही ऐसी हैं और माँ का इसी त्याग, समर्पण और प्यार पर समर्पित है मदर्स डे यानि मातृत्व दिवस। आज के दौर में यह दिन हर माँ के सम्मान में मनाया जाता है। आइये जानते हैं मदर्स डे मनाने की परंपरा की शुरुआत कब और कैसे हुई। दरअसल मदर्स दे 20वीं सदी की शुरुआत में अन्ना जार्विस द्वारा स्थापित किया गया था, जो उनकी अपनी मां के मानवीय कार्यों के प्रति समर्पण से प्रेरित था।1914 में , राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने आधिकारिक तौर पर अमेरिका में मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे के रूप में नामित किया, जिसे बाद में अन्य देशों ने अपनाया। साथियों,एक और खास बात यह है कि हर साल मातृ दिवस का एक अलग थीम होता है और इस बार का थीम है "सेलिब्रेटिंग मदरहुड: ए टाइमलेस बॉन्ड". मदर्स डे ना सिर्फ मां को समर्पित है बल्कि उनके त्याग, बच्चों के लिए समर्पण और खुद से ज्यादा बच्चों के लिए प्रेम की सराहना भी करता है.मां और बच्चे का रिश्ता हर रिश्तों से बड़ा होता है. साथियों, मोबाइल वाणी के पुरे परिवार की ओर से आप सभी को मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं । धन्यवाद !!

बुढ़मू : लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा पार्टी के बुढ़मू मंडल की बैठक बुढ़मू चौक स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित की गयी। बैठक की अध्यक्षता भाजपा के बुढ़मू मंडल अध्यक्ष जगलाल महतो ने किया। बैठक में बतौर मुख्य अतिथी के रूप में भाजपा के रांची लोक सभा क्षेत्र के सांसद प्रत्याशी संजय सेठ, विधायक समरी लाल शामिल हुए। बैठक में भाजपा के लोगों ने सांसद प्रत्याशी संजय सेठ के समर्थन में चुनाव प्रचार करने को कहा, और भाजपा के निति सिद्धांतो को घर - घर जाकर अवगत कराने की बात कही गई। सर्व प्रथम बैठक से पूर्व सांसद प्रत्याशी संजय सेठ को भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा माला पहनाकर स्वागत करते हुए कार्यालय लाया गया। वही लोकसभा चुनाव में सांसद प्रत्याशी संजय सेठ को जीत दिलाने को लेकर भाजपा के कार्यकर्ताओं ने विचार विमर्श किया। मौके पर भाजपा नेता मोहन जयसवाल, राजू गोस्वामी, सीताराम रवि, तारकेश्वर भारती, राजेश कुशवाहा, हरदेव साहू, सत्यनारायण मुंडा, मनोज मिश्रा, प्रकाश यादव, पनेश्वर महतो, रामदेव महतो एवं भाजपा पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता उपस्थित थे। दूसरी ओर भाजपा के तारकेश्वर भारती को बुढ़मू पंचायत में चुनाव प्रभारी बनाया गया है।

भारत 1998 में एक उभरती परमाणु शक्ति बन गया था, जिसके पीछे का कारण था 11 मई 1998 को हुआ परमाणु परिक्षण. भारत ने अपना सबसे ताकतवर परमाणु परीक्षण की बड़ी सफलता को हासिल करने के बाद भारत के प्रधानमंत्री ने 11 मई 1999 को ही नेशनल टेक्नोलॉजी डे मनाने की घोषणा की . इस पूरे परीक्षण को अंजाम देने के पीछे महान वैज्ञानिक अब्दुल कलाम का हाथ था.तकनीक हमारा एक ऐसा अभिन्न अंग बनता जा रहा है जिसके बिना हमारे भविष्य की कल्पना करना नामुमकिन है. लेकिन इसके लिए हमे संतुलन एवं जागरूकता की भी आवश्यकता है, जिसके लिए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का आयोजन एक तरह का अच्छा प्लेटफार्म है. मोबाइल वाणी के पुरे परिवार की और से आप सभी को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिलदेव शर्मा किसानों को केले में फल वाले पौधों में सहारा देने एवं केले के अच्छे उत्पादन हेतु जानकारी दे रहे हैं । अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें

बुढ़मू : थाना क्षेत्र के आरा गांव में अज्ञात चोरों ने एक घर में घुसकर चोरी की घटना को अंजाम दिया है। जानकारी के अनुसार बीते रात को बुढ़मू के आरा निवासी राम भजन प्रसाद साहू के घर में चोरी हुई है। पीड़ित परिवार के लोगों ने बताया कि अज्ञात चोरों ने घर में घुसकर अंदर से घर का दरवाजा को बंद कर दिया। और घर के अंदर रखें गोदरेज व बक्सा का ताला तोड़कर गोदरेज में रखें जेवरात और पैसा लेकर फरार हो गए। घटना बीते गुरुवार रात की बताई जा रही है। इस संबध में पीड़िता रामभजन साहू ने बुढ़मू थाना में एक लिखित आवेदन दिया है। दिए गए आवेदन के अनुसार पीड़िता रामभजन प्रसाद साहू के घर में रखें जेवरात लगभग 3 लाख रूपए का और नगद 90000 हजार रुपए की चोरी हुई है। घटना की सूचना मिलते ही बुढ़मू पुलिस रामभजन साहू के घर पहुंची। और जांच पड़ताल में जुट गई।

साल 2013-2017 के बीच विश्व में लिंग चयन के कारण 142 मिलियन लड़कियां गायब हुई जिनमें से लगभग 4.6 करोड़ लड़कियां भारत में लापता हैं। भारत में पांच साल से कम उम्र की हर नौ में से एक लड़की की मृत्यु होती है जो कि सबसे ज्यादा है। इस रिपोर्ट में एक अध्ययन को आधार बनाते हुए भारत के संदर्भ में यह जानकारी दी गई कि प्रति 1000 लड़कियों पर 13.5 प्रति लड़कियों की मौत प्रसव से पहले ही हो गई। इस रिपोर्ट में प्रकाशित किए गए सभी आंकड़े तो इस बात का प्रमाण है कि नई-नई तकनीकें, तकनीकों में उन्नति और देश की प्रति व्यक्ति आय भी सामाजिक हालातों को नहीं सुधार पा रही हैं । लड़कियों के गायब होने की संख्या, जन्म से पहले उनकी मृत्यु भी कन्या भ्रूण हत्या के साफ संकेत दे रही है। तो दोस्तों आप हमें बताइए कि *----- आखिर हमारा समाज महिला के जन्म को क्यों नहीं स्वीकार पाता है ? *----- शिक्षित और विकसित होने के बाद भी भ्रूण हत्या क्यों हो रही है ? *----- और इस लोकसभा चुनाव में महिलाओ से जुड़े मुद्दे , क्या आपके लिए मुद्दा बन सकता है ??

आपका पैसा आपकी ताकत की आज की कड़ी में हम सुनेंगे हमारे श्रोताओं की राय की उन्हें यह कार्यक्र्म सुन कर क्या लाभ हुआ।