मैक्लुस्कीगंज 15 जनवरी 2024 सीसीएल प्रबंधन के सकारात्मक पहल व आश्वासन के बाद यूसीडब्ल्यू ने 17 तारिक से जारी धरना स्थगित करने का लिया निर्णय. यूसीडब्ल्यू एटक के द्वारा असंगठित मजदूरों की लंबित समस्याओं को लेकर जारी इंकलाब पर सीसीएल प्रबंधन ने सकारात्मक पहल दिखाया. यूसीडब्ल्यू के असंगठित अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने बताया कि असंगठित मजदूरों के सीएमपीएफ भुगतान हेतु तय धरना का कार्यक्रम को एसओपी ज्योति कुमार से सकारात्मक वार्ता व पहल के बाद 17 तारीख होने वाले धरना को अस्थगित किया गया है. वार्ता एसओसी ऑफिस में किया गया. वार्ता में सभी असंगठित मजदूर के प्रति सीसीएल एनके प्रबंधन एवं यूसीडब्ल्यू पूरी ईमानदारी से प्रयासरत्त है साथ ही सभी असंगठित मजदूर एक होकर कोल नीति के साथ उत्पादन में सहयोग करें. वहीं मजदूर नेता अशोक राम ने कहा कि एसओपी यदि दिए गए समय अवधि के अनुसार कोई सकारात्मक पहल नहीं करती है, तो अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन किया जाएगा. जिसकी सारी जिम्मेवारी एनके प्रबंधन की होगी.
मैक्लुस्कीगंज 15 जनवरी 2024 बुढ़मू के सारले से राम लला के दर्शन के लिए अयोध्या पैदल निकले पिता पुत्री, खलारी व मैक्लुस्कीगंज के बजरंगियों ने किया स्वागत. पिता पुत्री की राम भक्ति ऐसी की बुढ़मू प्रखंड के सारले गांव से पैदल ही राम लला के दर्शन की लालसा ले अयोध्या के लिए निकले पड़े. पिता पुत्री के हाथ में वीर बजरंगबली का झंडा लिए और पीठ पर आवश्यकता के अनुसार सामान से भरा बैग टांगे पैदल यात्रा के लिए निकल पड़े. बुढ़मू प्रखंड के सारले गांव से अयोध्या दर्शन के लिए कृष्णा सिंह अपनी पुत्री 13 वर्षीय अंकिता कुमारी दोनो पैदल चलकर राम भगवान के दर्शन के लिए निकले है. खलारी पहुंचते ही यह जानकरी विहिप व बजरंगदल के सदस्यों को मिला,दल के राँची जिला संयोजक बिनोद विश्वकर्मा ने खलारी के बजरंगियों के साथ महावीर नगर (अमृत नगर ) के पास दोनो पिता पुत्री को फूल का माला एवम भगवा गमछा छोटी बच्ची को चुनरी देकर स्वागत किया. उसके बाद बनिया धौड़ा में स्थित मंदिर में दोनो पिता पुत्री ने पूजन किया. तत्पश्चात सभी हिन्दू कार्यकर्ता उनके साथ पैदल चलकर खलारी बैंक चौक तक गए. राम नाम के जयकारों के साथ मंगलमय यात्रा की कामना किया गया. मौके पर खलारी प्रखण्ड संयोजक अमित लोहरा ,दीपक तूरी, ऋतिक दीपु साव विनीत कुमार, मनोज कुमार, मिथलेश कुमार, विक्की कुमार, विजय कुमार, किशन कुमार, रवि कुमार, बजरंगी कुमार, करण कुमार, आकाश कुमार, बंटी कुमार, सत्यम कुमार, विशाल कुमार, यश कुमार, दीपक लोहरा, कुणाल कुमार, प्रकाश कुमार, अंकित कुमार सहित बड़ी संख्या में रामभक्त शामिल हुए.
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नियम क्या हैं, ये क्यों बनाए जाते हैं और इनसे क्या बदलता है... इन तीनों सवालों से अक्सर जनता परेशान रहती है, जनता की परेशानी उसे मिलने वाले नित नए सबक के बावजूद भी बनी रहती है। परेशान जनता यह मानना ही नहीं चाहती है नियम उसकी भलाई के लिए ही होते हैं।हमारे देश में नियमों की तब तक ही अहमियत होती है जब तक वे हमारी मौज मस्ती में बाधा नहीं बनते, एक बार अगर ये नियम हमारी मौज मस्ती में बाधा बनने लगते हैं तो हम बिना इनके बारे में सोचे और भविष्य की परवाह किए इनसे बचने की तरकीबें निकालने लगते हैं। दोस्तों आप इस मसले पर क्या सोचते हैं, क्या आपको भी लगता है कि सरकारों को इस पर पूर्णत प्रतिबंध लगा देना चाहिए, या फिर ऐसे ही थोड़े से पैसे के लालच में उन व्यापारियों को खुली छूट होनी चाहिए जो इसका व्यापार करने में लगे हैं।
हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। दोस्तों, उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे। हो जाइए तैयार, हंसने-हंसाने के लिए
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मैक्लुस्कीगंज स्थित डेगाडेगी नदी तट पर मकर संक्रांति के अवसर मेला का आयोजन किया गया. मेला का शुभारंभ लपरा ग्राम प्रधान हरि पाहान डुमारो के कुलदीप पाहान रूपलाल मुंडा ने मेला स्थल पर पारम्परिक रूप से पूजन कर किया गया. वहीं मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित चंदवा जीप सदस्य पूर्वी प्रतिमा देवी व खलारी पश्चिमी जीप सदस्य सरस्वती देवी सहित विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित लपरा मुखिया पुतुल देवी, मायापुर मुखिया पुष्पा खलखो, डुमारो मुखिया सुनीता खलखो सहित शेखर बोस ने संयुक्त रूप से फीता काटकर मेला का उद्घाटन किया. अतिथियों ने कहा मेला व नृत्य संगीत झारखण्ड की संस्कृति व सभ्यता का बेजोड़ प्रतीक है. झारखण्ड के साथ साथ राज्य व अति सुदूर क्षेत्रो में भी मांदर व नगाड़े की थाप कभी धीमी नहीं पड़नी चाहिये, आने वाली पीढ़ी को विरासत के रूप में हमारी संस्कृति व परम्परा की जानकारी मिलती रहे. उन्होंने कहा कि डेगाडेगी मेला क्षेत्र का ऐतिहासिक मेला के रूप लेकर उभरेगा. अतिथियों ने यह भी कहा कि मेला स्थल डेगाडेगी नदी पर बना पूल जिस तरह से लातेहार व रांची जिला के दो अति सुदूर गांव मैक्लुस्कीगंज व डुमारो को जोड़ती है, ठीक उसी तरह से संक्रांति जैसे अवसर पर आयोजित मेला स्थल से ही दो हृदय, दो परिवारों के पवित्र मिलन का संयोग साबित होता है. इससे पुर्व मेले में आये अतिथियों का स्वागत मेला समिति द्वारा पुष्प गुच्छ देकर किया गया. मेले में रैलिया, डुमारो, लपरा, चतरा, लोहरदग्गा, रांची, लातेहार, रामगढ, पतरातु, बालुमाथ, मुरपा, चंदवा, कुड़ू़ से आये लोगों ने नदी में स्नान कर मन्नत मांगी और ईख, मिठाई, श्रृंगार, कृषि उपयोगी सामान, खिलौने आदि की जमकर खरीदारी करते नज़र आये. मेला में डुमारो से आये गायक कपिलदेव सिंह, नागपुरी कलाकार बसन्ती देवी व अभिनंदन ग्रुप पारम्परिक नृत्य आकर्षण का केन्द्र रहा. मेला का संचालन सुशील तिवारी, मुखदेव गोप वहीं धन्यवाद ज्ञापन रामबिलास गोप व रामभजन सिंह ने संयुक्त रूप से किया. मेले को सफल बनाने में शेखर बोस, जितेन्द्रनाथ पांडेय, प्रभु मुंडा, बिरजा उरांव, हरेंद्र उरांव, उमेश प्रसाद साहू, शशि साहू, महादेव राणा, रामेश्वर भोगता, रामभजन सिंह, बसन्त मिस्री, हरेंद्र उरांव सहित समिति के अन्य का सराहनीय योगदान रहा.
