बुढ़मू : इंडिया गठबंधन पार्टी के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने बुढ़मू सीओ सच्चिदानंद वर्मा और बुढ़मू बीडीओ धीरज कुमार से मिले। और क्षेत्र के समस्याओं से पदाधिकारियों को अवगत कराया। इस दौरान लोगों ने सरकारी योजनाओं को सभी लोगों तक पदाधिकारियों से पहुंचाने एवं क्षेत्र के विकास करने और समस्याओं को दूर करने को लेकर बात रखा। मौके पर गोपाल तिवारी, सदन साहू, अजय यादव, समेत इंडिया गठबंधन पार्टी के दर्जनों लोग उपस्थित थे।
बुढ़मू कांग्रेस पार्टी के कांके विधानसभा क्षेत्र के नवनिर्वाचित विधायक सुरेश कुमार बैठा को कांके विधानसभा से विधायक बनने पर प्राचीन मुंडा धर्म संस्था के अध्यक्ष धर्म गुरु महेंदर मुंडा, प्राचीन मुंडा धर्म संस्था के सचिव प्रोफेसर डॉक्टर चंद्रदेव मुंडा, जगदेव मुंडा, सुचिता मुंडा, दिगवार मुंडा, फूलचंद, कार्तिक मुंडा, सोनाक्षी मुंडा, चानो कुमारी मुंडा, दीपिका मुंडा सहित कई लोगों ने जीत की उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। इस दौरान लोगों ने कहा कि नव निर्वाचित विधायक सुरेश बैठा ने कांके में भाजपा के 35 वर्ष के अभेद्य किला को तोड़ने का कार्य किया है और वे कांग्रेस पार्टी के समर्पित और जुझारू कार्यकर्ता रहे हैं।
बुढ़मू : कांग्रेस पार्टी के रांची जिला लीगल सेल के अध्यक्ष सरफराज अहमद ने शनिवार को कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर कांके विधानसभा क्षेत्र के नवनिर्वाचित विधायक सुरेश बैठा को झारखंड सरकार में मंत्री बनाये जाने की मांग की है। पत्र लिखकर आग्रह किया है कि सुरेश बैठा ने भाजपा के 35 वर्ष के अभेद्य किला को तोड़ने का कार्य किया है और वे कांग्रेस पार्टी के समर्पित और जुझारू सिपाही रहे है।
भाजपा के कांके विधानसभा क्षेत्र के तेज तर्रार व शिक्षित और पढ़े लिखे प्रत्याशी डॉ जीतू चरण राम को कांके विधानसभा क्षेत्र से भाजपा पत्याशी बनाए जाने पर बुढ़मू एवं ठाकुरगांव मंडल के भाजपा पार्टी के कार्यकर्ताओं सहित प्रखंड के ग्रामीणों में उत्सुकता व खुशी का माहौल है।
भारतीय जनता पार्टी की परिवर्तन यात्रा बुढ़मू पहुंची, जिसमें बड़ी संख्या में भाजपा पार्टी के कार्यकर्ता हुए। और अपने हाथों में पार्टी के झंडे और बैनर लिए हुए कार्यकर्ताओं ने भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे लगाए। यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों ने पारंपरिक तरीके से परिवर्तन रथ का स्वागत किया।
नए नए आजाद हुए देश के प्रधानमंत्री नेहरू एक बार दिल्ली की सड़कों पर थे और जनता का हाल जान रहे थे, इसी बीच एक महिला ने आकर उनकी कॉलर पकड़ कर पूछा कि आजादी के बाद तुमको तो प्रधानमंत्री की कुर्सी मिल गई, जनता को क्या मिला, पहले की ही तरह भूखी और नंगी है। इस पर नेहरु ने जवाब दिया कि अम्मा आप देश के प्रधानमंत्री की कॉलर पकड़ पा रही हैं यह क्या है? नेहरू के इस किस्से को किस रूप में देखना है यह आप पर निर्भर करता है, बस सवाल इतना है कि क्या आज हम ऐसा सोच भी सकते हैं?
समाज कि लड़ाई लड़ने वाले लोगों के आदर्श कितने खोखले और सतही हैं, कि जिसे बनाने में उनकी सालों की मेहनत लगी होती है, उसे यह लोग छोटे से फाएदे के लिए कैसे खत्म करते हैं। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब कोई प्रभावशाली व्यक्ति ने इस तरह काम किया हो, नेताओं द्वारा तो अक्सर ही यह किया जाता रहा है। हरियाणा के ऐसे ही एक नेता के लिए ‘आया राम गया राम का’ जुमला तक बन चुका है। दोस्तों आप इस मसले पर क्या सोचते हैं? आपको क्या लगता है कि हमें अपने हक की लड़ाई कैसे लड़नी चाहिए, क्या इसके लिए किसी की जरूरत है जो रास्ता दिखाने का काम करे? आप इस तरह की घटनाओं को किस तरह से देखते हैं, इस मसले पर आप क्या सोचते हैं?
भारतीय संविधान किसी के आर्टिकल 14 से लेकर आर्टिकल 21 तक समानता की बात कही है, इस समानता धार्मिक आर्थिक राजनीतिक और अवसर की समानता का जिक्र किया गया है। इस समानता किसी प्रकार की जगह नहीं है और किसी को भी धर्म, जाति और समंप्रदाय के आधार पर कोई भेद नहीं किये जाने का भी वादा किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के हालिया फैसले में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि वह धर्म की पहचान के आधार भेदभाव पैदा करने की कोशिश है।दोस्तों आप इस मसले पर क्या सोचते हैं? क्या आप सरकार के फैसले के साथ हैं या फिर इसके खिलाफ, जो भी हो इस मसले पर आपकी क्या राय है? आप इस मसले पर जो भी सोचते हैं अपनी राय रिकॉर्ड करें
मोटाभाई ने महज एक शादी में जितना खर्च किया है, वह उनकी दौलत 118 बिलियन डॉलर का 0.27 है। जबकि उनकी दौलत कृषि संकट से जूझ रहे देश का केंद्रीय बजट का 7.5 प्रतिशत से भी कम है। जिस मीडिया की जिम्मेदारी थी कि वह लोगों को सच बताएगा बिना किसी का पक्ष लिए, क्या यह वही सच है? अगर हां तो फिर इसके आगे कोई सवाल ही नहीं बनता और अगर यह सच नहीं तो फिर मीडिया द्वारा महज एक शादी को देश का अचीवमेंट बताना शुद्ध रूप से मुनाफे से जुड़ा मसला है जो विज्ञापन के रुप में आम लोगों के सामने आता है। क्योंकि मीडिया का लगभग पचास प्रतिशत हिस्सा तो मोटाभाई का खुद का है और जो नहीं है वह विज्ञापन के लिए हो जाता है "कर लो दुनिया मुट्ठी में” की तर्ज पर। दोस्तों, इस मुद्दे पर आप क्या सोचते है ?अपनी राय रिकॉर्ड करें मोबाईलवाणी पर, अपने फोन से तीन नंबर का बटन दबाकर या फिर मोबाईल का एप डाउनलोड करके।
दोस्तों इस तरह के बाबाओं द्वारा चलाई जा रही धर्म की दुकानों पर आपका क्या मानना है, क्या आपको भी लगता है कि इन पर रोक लगाई जानी चाहिए या फिर इनको ऐसे ही चलते ही रहने देना चाहिए? या फिर हर धर्म और संप्रदाय के प्रमुखों द्वारा धर्म के वास्तविक उद्देश्यों का प्रचार प्रसार कर अंधविश्वास में पड़े लोगों को धर्म का वास्तविक मर्म समझाना चाहिए। जो भी आप इस मसले पर क्या सोचते हैं अपनी राय रिकॉर्ड करें ग्रामवाणी पर