बुढ़मू : श्री सत्य साइन संजीवनी अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बुढ़मू की चिकित्साय टीम RBSK के द्वारा बुढ़मू प्रखंड के मध्य विद्यालय बुढ़मू , ठाकुरगांव। स्कूल, कोठारी स्कूल एवं सोसाई सरकारी स्कूल में 0 से 15 वर्ष के बच्चों का ह्रदय जांच कैंप शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान विद्यालय के कुल 675 बच्चों का जांच किया गया, जिसमें से 7 सात बच्चे जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित पाए गए, जिसका ईलाज सत्य साइन संजीवनी अस्पताल के द्वारा किया जाएगा। कैंप शिविर में सत्य साइन अस्पताल की टीम, डॉ अभिषेक कुमार गुप्ता, डॉ माधुरी बाड़ा, डॉ वर्षा शालिनी तिर्की उपस्थित होकर बच्चों का जांच किया। कैंप शिविर आयोजन को सफल बनाने विद्यालय के शिक्षक, सहिया ,आंगनबाड़ी सेविका सहित कई लोगों ने अपना सराहनीय योगदान दिया।
"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि विशेषज्ञ श्री जिव दास साहू मटर के फसल में लगने वाली बीमारियां एवं उपचार से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं। पूरी जानकारी विस्तार से सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें.
एड्स इस नाम से हम सभी भली भांति परिचित हैं इसका पूरा नाम है 'एक्वायर्ड इम्यूलनो डेफिसिएंशी सिंड्रोम ' यह एक तरह का वायरस है जिसे एचआईवी के नाम से भी जाना जाता है।यह एक जानलेवा बीमारी है लेकिन आज भी लोगों में एड्स को लेकर सतर्कता नहीं है।साथ ही इसे समाज में भेदभाव की भावना से देखा जाता है। एड्स के प्रति जागरूकता फ़ैलाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। दोस्तों , हम सभी को एड्स को लेकर सतर्क रहना है ,साथ ही लोगों में सर्तकता लाने की भी ज़रुरत है।साथियों, एड्स का उपचार भेदभाव नहीं बल्कि प्यार है। आइये हम सभी मिलकर विश्व एड्स दिवस मनाए और लोगों में एड्स के प्रति अलख जगाए। सतर्क रहें,सुरक्षित रहें
बुढ़मू : बुढ़मू प्रखंड में व्यस्कों के लिए टीबी टीकाकरण की शुरुआत की गई है। टीकाकरण की शुरुआत प्रखंड के सीएचसी केंद्र बुढ़मू में चिकित्सा प्रभारी ईशानी सिंह के द्वारा किया गया। पहले दिन गुरुवार को ५ लोगो ने टीका लिया। स्वास्थ्य कर्मियों ने जानकारी देते हुए बताया कि अपने पास के सेंटर में जाकर आप टीका ले सकते है। साथ ही स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि यह वही टीका है,जो बच्चे को जन्म लेते ही मिलता है, इसीलिए यह टीका एकदम सुरक्षित है, और बताया कि २०२५ तक भारत को टीबी मुक्त करने के लिए महत्व्पूर्ण है। स्वास्थ्य कर्मियों ने अपिल किया कि सबकोई साथ आये और बुढ़मू को टीबी मुक्त बनाये। मौके पर स्वास्थ्य कर्मी सहित कई लोग उपस्थित थे।
यह कार्यक्रम बताता है कि कैसे अनियमित बारिश, सूखा और बाढ़ किसानों की आजीविका, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और समग्र जीवन गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं। यह श्रोताओं को अपने अनुभव साझा करने और समाधान सुझाने के लिए आमंत्रित करता है, जिससे जागरूकता बढ़ाने और सामुदायिक समर्थन को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाता है।
पानी में आर्सेनिक, लोह तत्व और दूसरे घातक पदार्थों की मात्रा महिलाओं के स्वास्थ्य पर सबसे बुरा असर कर रही है और फिर यही असर गर्भपात, समय से पहले बच्चे का जन्म या फिर कुपोषण के रूप में सामने आ रहा है. साथियों, हमें बताएं कि आपके परिवार में अगर कोई गर्भवति महिला या नवजात शिशु या फिर छोटे बच्चे हैं तो उन्हें पीने का पानी देने से पहले किस प्रकार साफ करते हैं? अगर डॉक्टर कहते हैं कि बच्चों और महिलाओं को पीने का साफ पानी दें, तो आप उसकी व्यवस्था कैसे कर रहे हैं? क्या आंगनबाडी केन्द्र, एएनएम और आशा कार्यकर्ता आपको साफ पानी का महत्व बताती हैं? और ये भी बताएं कि आप अपने घर में किस माध्यम से पानी लाते हैं यानि बोरवेल, चापाकल या कुएं और तालाबों से?
साथियों, आपके यहां पानी के प्रदूषण की जांच कैसे होती है? यानि क्या सरकार ने इसके लिए पंचायत या प्रखंड स्तर पर कोई व्यवस्था की है? अगर आपके क्षेत्र में पानी प्रदूषित है तो प्रशासन ने स्थानीय जनता के लिए क्या किया? जैसे पाइप लाइन बिछाना, पानी साफ करने के लिए दवाओं का वितरण या फिर पानी के टैंकर की सुविधा दी गई? अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो आप कैसे पीने के पानी की सफाई करते हैं? क्या पानी उबालकर पी रहे हैं या फिर उसे साफ करने का कोई और तरीका है? पानी प्रदूषित होने से आपको और परिवार को किस किस तरह की दिक्कतें आ रही हैं?
लू लगने के लक्षण और घरेलू उपचार के साथ साथ सावधानियां और बचाव के तरीके, डॉक्टरी सलाह के साथ गर्मी से निपटने की तैयारियां। क्या आपने भीषण गर्मी यानी लू लगने के ऐसे लक्षण खुद में या अपने परिवार, दोस्त या पड़ोसी में देखे हैं? अगर हाँ, तो आपने या उन्होंने ऐसे में क्या कदम उठाए? भीषण गर्मी से जुड़ी और किस तरह की जानकारी आप सुनना चाहेंगे?
कोविशील्ड बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की स्वीकारोकती के बाद सवाल उठता है, कि भारत की जांच एजेंसियां क्या कर रही थीं? इतनी जल्दबाजी मंजूरी देने के क्या कारण था, क्या उन्होंने किसी दवाब का सामना करना पड़ रहा था, या फिर केवल भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला है। जिसके लिए फार्मा कंपनियां अक्सर कटघरे में रहती हैं? मसला केवल कोविशील्ड का नहीं है, फार्मा कंपनियों को लेकर अक्सर शिकायतें आती रहती हैं, उसके बाद भी जांच एजेंसियां कोई ठोस कारवाई क्यों नहीं करती हैं?
झारखण्ड राज्य के रांची से जयवीर यादव मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं की दांत की देखभाल सही से करने के लिए सुबह शाम सफाई करनी चाहिए ,अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें और पूरी जानकारी सुनें