बिहार में आरक्षण बिल को विधानसभा के बाद विधान परिषद से भी मंजूरी मिल गई है अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें और पूरी जानकारी सुने
आज मनाया जा रहा है धनतेरस धनतेरस पर बाजार में झाड़ू की बहुत हो रही है बिक्री जानते हैं झाड़ू खरीदने के पीछे क्या है धार्मिक महत्व जानने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें और पूरी जानकारी सुने
Transcript Unavailable.
Transcript Unavailable.
दीपावली एवं छठ पर्व को लेकर रेलवे ने जमुई के यात्रियों के लिए ट्रेन का तोहफा दिया है अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें और पूरी जानकारी सुने
Transcript Unavailable.
Transcript Unavailable.
दीपों के त्यौहार दीपावली पर घर-घर में मिट्टी के दीपक में तेल और बाती से जगमग रोशनी हुआ करती थी वह अब धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है. फिर भी जमुई जिले में कुम्भकार (potters) अपने परिवारवाद की परम्परा को निभाते आ रहे हैं और आम लोग भी अभी पूर्व परम्परा को लेकर मिट्टी के दीयों को ही महत्ता दे रहे हैं। आधुनिक दौर में बाजार में मिट्टी के दियों की घटती डिमांड ने स्थिति को दयनीय कर दिया है। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही कुम्हार मिट्टी के दीपक खिलौने बनाने में पूरे परिवार के साथ जुट जाते थे। इससे परिवार को रोजगार चलता है, अब समय बदल गया। घरों में मिट्टी के दीपक के स्थान पर आधुनिक चाइनीज झालर और रंग बिरंगे बिजली के बल्ब स्थान ले लिए है। लिहाजा दूसरों के घरों को रोशन करने वाले कुम्हारों का जीवन आज अंधेरे में है। आधुनिक दौर में बाजार में मिट्टी के दियों कि घटती डिमांड ने स्थिति को दयनीय कर दिया है। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही कुम्हार मिट्टी के दीपक खिलौने बनाने में पूरे परिवार के साथ जुट जाते थे। इससे परिवार को जहां रोजगार मिलता था। वही मिट्टी के दिये और बर्तन बनाकर कुम्हार साल भर की आमदनी इस पर्व में बेचकर करते है। मगर, आधुनिकता की दौड़ में आज मिट्टी के दीयों की जगह इलेक्ट्रॉनिक झालरों की लेने से कुम्हारों के घरों में खुद अंधेरा पसरता जा रहा है । आज स्थिति यह है कि महंगे लागत पर मिट्टी के दीये के तैयार किए जा रहे है। मगर उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है। यही वजह है कि उनके द्वारा तैयार बर्तनों की मांग बेहद घट गई है। दीपावली के नजदीक आते ही मिट्टी के बर्तनों की जो मांग बढ़ जाती थी, अब उनको खरीदने वाले दूर-दूर तक नजर नहीं आते। स्टील व प्लास्टिक के बर्तनों और टिमटिमाती चाइनीज झालरों ने परंपरागत मिट्टी के बर्तनों व दियों की मांग को खत्म कर दिया है। इसका सीधा असर इन्हें बनाने वाले कुम्हारों पर पड़ रहा है।इसके चलते कुम्हार आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं। इन दिनों दिन-रात एक करने के बावजूद उन्हें अपने हाथों से बनाए उत्पाद बेचना व परिवार का गुजर-बसर करना मुश्किल हो गया है।
Transcript Unavailable.
आज धनतेरस मनाया जा रहा है।धनतेरस के लिए जमुई जिले भर के बाजार पूरी तरह सजे हुए हैं। दिवाली से पहले मनाए जाने वाले इस पर्व में इस बार भी दुकानदार खूब खरीदारी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। धनतेरस के दिन बर्तन और गहने खरीदना शुभ माना जाता है। शहर के आभूषण कारोबारियों के पास सैकड़ों लोगों ने गहनों की एडवांस बुकिंग करवा ली है। इन्हें धनतेरस के शुभ मुहूर्त में डिलिवरी मिलेगी। कारोबारियों के अनुसार शादियों के लिए भी इन दिनों गहनों की खूब खरीदारी हो रही है। ज्वेलर्स ने ग्राहकों को लुभाने के लिए जीरो मेकिंग चार्ज, सोने के साथ चांदी के सिक्के फ्री और लक्की कूपन जैसे ऑफर निकाले हैं। बर्तन कारोबारियों ने भी अगले दो दिन के लिए अतिरिक्त स्टॉक दुकानों पर रख दिया है। धनतेरस पर इस बार भी करोड़ रुपये से भी अधिक कारोबार की उम्मीद है। ऑटोमोबाइल सेक्टर भी पूरे जोरों पर हैं। अलग-अलग कंपनियों के डीलरों के यहां गाड़ियों की बुकिंग एक महीने पहले ही शुरू हो गई है। गाड़ियां खरीदने वालों के लिए डीलर ही लोन की व्यवस्था भी करवा रहे हैं। बाजार दुल्हन की तरह सजा हुआ है।
