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आज के समय में लोगो आख़िरकार इतने ज़्यादा अकेलेपन का शिकार क्यों हो जाते है ? वे कौन से वजह होते हैं कि लोग साथ साथ होते हुए भी अपनी मन की बात एक दूसरे तक नहीं पहुचा पते है ? अपने परिवार और अपनों को इस अकेलेपन से दूर रखने के लिए आप अपने स्तर पर क्या करना चाहेंगे ?

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हमारे समझ में आज भी यौन शोषण के बारे में एक अनचाही चुप्पी साध ली जाती है और पीड़ित व्यक्ति को ही कहीं न कहीं हर बात के लिए जिम्मेदर बना देने की प्रथा चली आ रही है। पर ऐसा क्यों है? साथ ही इस तरह के सामाजिक दबावों के अतिरिक्त और क्या वजह होती है जिसके लिए आज भी कई सारे यौन शोषण के केस पुलिस रिपोर्ट में दर्ज नहीं होते हैं ? समाज में फैले यौन शोषण के मानसिकता के लिए कौन और कैसे जिम्मेदार है ? और समाज से इस मानसिकता को हटाने के लिए तुरंत किन - किन बातों पर अमल करना जरुरी है ?

दिल्ली के जहांगीरपुरी से श्रमिक वाणी रिपोर्टर दुर्गेश ने मोबाइल वाणी के माध्यम से अभिषेक से मानसिक स्वास्थ्य विषय पर साक्षात्कार लिया।अभिषेक ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य का असर रोजमर्रा की ज़िन्दगी पर पड़ता है। अपनी भाषा और व्यवहार पर नियंत्रण होना चाहिए। मन शांत होगा तो व्यक्ति दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करता है।मानसिक रोगी के साथ समाज का व्यवहार अच्छा नही होता है एवं उन्हें हल्के में लिया जाता है

मध्य प्रदेश राज्य के खरगौन जिला से विजय चौहान ने श्रमिक वाणी के माध्यम से बताया कि मानसिक तनाव होना ही नही चाहिए।अगर अकेलापन महसूस हो तो संगीत सुनना चाहिए।संगीत सीखना चाहिए।काम ऐसा करना चाहिए जिसमें अपना और सामने वाले दोनों का भला हो जाए।साथ ही अपना खान-पान और संगति अच्छी रखनी चाहिए।अच्छी संगती से लाभ होगा और बुरी संगती से हानि होगा

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