हरियाणा राज्य से विकास कुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति गंभीरता बहुत कम है।लोग मानसिक तनाव पर खुल कर बात नही करते हैं।किसी के मन में बुरे ख्याल आते हैं तो किसी दूसरे से इस बारे में चर्चा नहीं करते हैं।हिम्मत कर के कोई बताता भी है, तो लोग उनको पागल समझने लगते हैं।मानसिक समस्या होने पर काउंसलर या डाक्टर से संपर्क करना चाहिए।एक्सपर्ट आप की समस्या समझ कर उचित सलाह देंगे और बीमारी को ठीक करने का प्रयास करेंगे। मानसिक तनाव पर जरूर चर्चा करनी चाहिए।
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क्या आपके जीवन में कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई हैं ?आपके के हिसाब से इस तरह की परिस्थिति में अपने आपको तनाव मुक्त रखने के लिए क्या करना चाहिए ? और घर में नशे के कारण झगड़ों से बच्चो पर क्या प्रभाव पड़ता है? और उन्हें इस तरह के परिस्थिति से दूर रखने के लिए माता पिता को क्या करना चाहिए ?
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हरियाणा राज्य से विकास ने श्रमिक वाणी के माध्यम से बताया कि बच्चों को कोई भी दिक्कत या परेशानी को माता पिता के साथ साझा करनी चाहिए।माता -पिता को भी बच्चों के सा , सामने डरना नही चाहिए और सभ्य भाषा का उपयोग करना चाहिए। गाली नही देनी चाहिए।साथ ही हमेशा खुश रहना चाहिए।किसी भी प्रकार के तनाव से बच कर रहना चाहिए।अकबर बीरबल की कहानी सुनना चाहिए। इन कहानियों से हमें प्रेरणा मिलती है
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हरियाणा राज्य से विकास ने बताया कि इन्होने श्रमिक वाणी पर प्रसारित कार्यक्रम 'भावनाओं का भंवर'सुना था जिसमें चुप्पी को कैसे तोड़ें विषय पर जानकारियां दी गई थी।मानसिक तनाव एक बहुत ही गंभीर समस्या है।मन में जो भी विचार आते हैं वो किसी दूसरे व्यक्ति के साथ जरूर साझा करें।अपने किसी विश्वसनीय दोस्त,साथी या रिश्तेदार से मन की बातें साझा करनी चाहिए।सम्माज में मानसिक बीमारी को लेकर जागरूकता नही है। लोग मानसिक रोगी को पागल कहते हैं और मजाक उड़ाते हैं।यह बहुत गलत है। हमें समाज में मानसिक रोग के बारे में जागरूकता बढ़ानी होगी।
क्या आपने कभी ऐसा कुछ महसूस किया है या ऐसे किसी व्यक्ति को जानते हैं जिन्होंने ऐसी स्थिति का सामना किया है ?ऐसी परिस्थिति में आपको क्या लगता है कि आपके सबसे नज़दीकी रिश्तों को बनाएं रखने में और किस तरह का मदद उपयोगी हो सकते हैं
