दिल्ली के नन्द नगरी से शबनम ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं को भी अपने माँ - पिता के सम्पत्ति में हिस्सा मिलना चाहिए। ताकि बच्चों का भविष्य सही रहे।महिलाएं मेहनत - मजदूरी करती हैं।लेकिन अपने बच्चों को पढ़ा-लिखा नहीं पाती हैं।पढ़ाई के लिए ज्यादा चिंता रहती है।वो घर का किराए दें,घर का खर्चा करें या बच्चों के शिक्षा पे ध्यान दें,उन्हें समझ नही आता है।
दिल्ली के नन्द नगरी से नीटू ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं को ससुराल की सम्पत्ति में अधिकार होना चाहिए
दिल्ली के नन्द नगरी से रेखा मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं को ससुराल के संपत्ति में हक़ मिलना चाहिए ताकि उनके बच्चों का भविष्य उज़्ज़वल हो सके।
दिल्ली से रुखसाना ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि सम्पत्ति में महिलाओं का अधिकार होना चाहिए
दिल्ली के नन्द नगरी से मूर्ति देवी की राय है कि हमें सम्पत्ति में हक़ मिलना चाहिए
दिल्ली के नन्द नगरी से प्रियंका की राय है कि महिलाओं को प्रॉपर्टी में हिस्सा होना चाहिए
दिल्ली के नन्द नगरी से राशिका मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं को संपत्ति में अधिकार मिलना चाहिए।
दिल्ली के नन्द नगरी से राशिका मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं को संपत्ति में अधिकार मिलना चाहिए।
दिल्ली से राजेश कुमार पाठक ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि अभी इन्होने श्रमिक वाणी पर एक बहन का साक्षात्कार सुना। जिसमें बताया गया था कि माँ और भाइयों ने बहन को मायके में रहने के लिए सम्पत्ति में हिस्सा दिया। यह माँ और भाइयों की सराहना करते हैं। अपनी आपबीती बताते हुए राजेश कुमार पाठक ने कहा कि खुद ये और इनकी पत्नी दृष्टिबाधित हैं और एक बेटी विकलांग थी। सास ने रहने के लिए गांव में जमीन का एक टुकड़ा अपनी दृष्टिबाधित बेटी को देना चाहा तो इनके दोनों साले अपनी माँ [ इनकी सास ] का गला दबाने के लिए दौड़ पड़े।यदि ग्रामीणों ने बीच बचाव ना किया होता तो इनके दोनों साले इनकी सास को मार डालते।इनको जमीन भी नही मिलती और सास की मौत भी हो जाती।आज इनकी पत्नी और बेटी इस दुनियां में नही हैं।समाज बहुत कठोर है। मगर धरती वीरों और अच्छे लोगों से भरी है।आज भी माँ अपने संतान और बेटी के लिए मरने से पहले कुछ कर जाना चाहती है। ताकि बेटी आबाद रहे
दिल्ली से राजेश कुमार पाठक मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं को जमीन में अधिकार नहीं मिलता है
