दिल्ली गुरुग्राम से नन्द किशोर प्रसाद ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से मकान बनाने वाले राज मिस्त्री का काम करने वाले दिहाड़ी मजदूर से बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने बताया की उन्हें दिहाड़ी मजदूरी सात सौ रूपए दी जाती है। मजदुर बताते हैं कि ठेकेदार मजदुर को उसके मन के हिसाब से पैसे नहीं देता है। पैसे मांगने पर मजदुर को कभी छुट्टी या किसी न किसी चीज़ का हवाला देकर पैसा देने से मुकर जाता है जबकि मजदुर का पैसा उनका अधिकार होता है