गुरुग्राम से नंदकिशोर और इनके साथ एक मजदुर साथी हैं वे साझा मंच के माध्यम से कहते हैं कि लॉक डाउन के बाद लगभग दो माह तक गाँव नहीं जा पाए थे। उसके बाद सरकार द्वारा दी गई बस सुविधा से अपने गांव गए तो वहाँ कोई रोजगार नहीं मिल पाया था। वहीँ सरकार द्वारा दी गई आश्वाशन भी झूठा निकला किसी भी मजदुर को गांव में रोगजार नहीं मिला मजबूरन मजदूरों को वापस शहर ही आना पड़ा
