मैं अरुण आप सभी के बीच फिर से हाज़िर हूं, वनक्कम नमस्कार की एक और कढ़ी के साथ.... साथियों बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां, चाहे वह ऑटोमोबाइल्स की हैं या फिर गारमेंट्स कि, इन सभी में एक समानता है.... मज़दूरों की कांट्रैक्टिंग.... जी हां साथियों, हम सभी ने कभी ना कभी किसी कांट्रेक्टर के नीचे काम किया होगा.... लेकिन अगर मज़दूरों से पूछा जाए, तो उनका कांट्रैक्टर के नीचे काम करने का अनुभव बहुत बुरा होता है.... इसका सबसे बड़ा और मुख्य कारण है, समय पर मज़दूरों की सैलरी ना देना.... आज साझा मंच की स्वयंसेवक रेशमा जी की मुलाकात ऐसे ही एक मजदूर से हुई थी, जिनका कांट्रेक्टर उन्हें समय पर सैलरी नहीं दे रहा था....