मजदूर अपने दिन का सबसे अधिक समय अपनी कंपनी को देते हैं, लगभग 10 से 12 घंटे और यह बात बिल्कुल साफ है कि कोई भी श्रमिक 10 से 12 घंटे लगातार काम नहीं कर सकता, इसलिए कंपनी क़ानूनों के हिसाब से मज़दूरों को काम के दौरान ब्रेक दिया जाता है। मगर कुछ कंपनियों का बस चले तो वे अपने मज़दूरों को बिना ब्रेक दिए पूरे दिन काम करवा सकते हैं। आज हमारे साथ तिरुपुर कि एक श्रमिक साथी, अपनी गारमेंट्स कंपनी में टी ब्रेक को लेकर हुई एक घटना साझा कर रहे हैं। हमारे श्रमिक साथी पूरे दिन खड़े रहकर काम करते हैं, ब्रेक तो 15 मिनट का था, मगर मैनेजर 8 मिनट बाद काम ना शुरू करने पर मज़दूरों को डांट रहे थे और सिर्फ 2-3 मिनट देर से आने पर मज़दूरों से 15-20 मिनट अधिक काम करवाया जा रहा था तो सुना आपने मज़दूरों ने जब एकजुट होकर विरोध किया और अपनी बात पर खड़े रहे, तब कंपनी ने ब्रेक का समय कम करना बंद कर दिया। दोस्तों कंपनियों के मैनेजर, सुपरवाइजर और यहां तक कि कंपनी की मशीनें भी बिना ब्रेक लिए काम नहीं कर पाएंगी, मगर यह बात उन्हें मज़दूर ही समझा पाएंगे। क्या आपकी भी कंपनी में ब्रेक के समय को कम किया जाता है, तीन दबाकर अपनी बात साझा करें। अगले हफ्ते वनक्कम नमस्कार की एक और कढ़ी के साथ फिर से हाज़िर होंगे। धन्यवाद।