दिल्ली एनसीआर से हस्मत अली की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से मुख्तयार से हुई। मुख्तियार ने बताया कि अब तक कंपनी बंद है। वो अमेरिकन एक्सप्रेस कंपनी में तीन वर्ष से ड्राइवर है । उन्होंने लॉक डाउन के दौरान जब पीएफ का पैसा निकलवाया तो उनका केवल 14,300 रूपए ही निकले जबकि उनका प्रति महीने का पीएफ योगदान मिला कर क़रीब एक लाख रूपए होना चाहिए था परन्तु कंपनी प्रबंधन की गड़बड़ी के कारण उनका योगदान केवल 14,300 रूपए हुआ । मुख्तयार के अनुसार यूनियन बनाने का कोई फ़ायदा नहीं है क्योंकि समय पर कोई सहयोग नहीं करता है। अगर कोई यूनियन बनाते भी है तो उनके साथ मर पीट किया जाता है। श्रमिक कानून में जो बदलाव किये है वो केवल लिखित में है ,कार्यवाही किसी क़ानून के तहत नहीं होती है। इन्होने बताया कि आठ घंटे की ड्यूटी कह कर उनसे 15-16 घंटे की ड्यूटी करवाई जाती है। अगर इस पर आवाज़ उठाया जाता है तो उन्हें नौकरी से हटा देने की बात कहा जाता है। इस कारण मज़बूरी में काम करना ही पड़ता है।
