उत्तरप्रदेश राज्य के ज़िला ललितपुर के ग्राम टोरिया से जगदीश ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि वो पांच साल से एक फैक्ट्री में कार्य कर रहे है। उन्हें साढ़े नौ घंटे के कार्य के लिए आठ घंटे के हिसाब से वेतन दिया जाता है। ओवरटाइम का पैसा भी नहीं मिलता है। लेबर कोर्ट में शिकायत करने के बाद उन्हें आठ महीनें तक का ओवरटाइम का पैसा दिलवाया गया और लेबर कोर्ट द्वारा कहा कि बाकि का पैसा अब उन्हें नहीं मिलेगा।उस फैक्ट्री में श्रमिकों के आने जाने का रिकॉर्ड भी नहीं रखा जाता है साथ ही उनको आईडी भी नहीं दी जाती है। इस समस्या का क्या समाधान है ? जानकारी चाहिए।

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जगदीश जी ने लेबर कोर्ट शब्द का इस्तेमाल किया लेकिन वह दरसल लेबर ऑफिस है। जगदीश जी ने कहा कि उन्हें कंपनी कि तरफ से पिछले 8 महीने का ओवर टाइम कि सैलरी रूपए 9000 लेबर कोर्ट कि तरफ से दिलवाये गये। मगर हम स्पस्ट करना चाहते हैं कि ये एक समझोता है, जिसमे राज्य यानि लेबर अफसर, आपका एम्प्लायर, और आप खुद मिल बैठ कर एक समझोता करते हैं। लेकिन यह कहा नहीं जासकता कि हमेशा यह समझोता आपके पास में ही हो क्योंकि हो सकता है लेबर ऑफिसर ने नियोक्ता का पक्ष लिया हो या फिर आपके नियोक्ता ने लेबर ऑफिसर को घुस दी हो, तो आप इसकी शिकायत लिखित में लेबर कमिश्नर को कर सकते हैं, लेकिन उसके लिए आपके पास ठोस सबूत होनी चाहिए, और जैसे कि जगदीश जी को लेबर कोर्ट और लेबर ऑफिस मैं, और समझौते को जजमेंट मार रहे हैं, तो हमें नहीं लगता कि इनके पास कोई सबूत भी होगा। आपको इस संदर्भ में और जानकारी चाहिए तो आप अपने सवाल को और स्पष्ट तरीके से पूछें।
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March 24, 2020, 4:26 p.m. | Tags: int-PAJ