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जिला हजारीबाग इचाक से टेकनारायण प्रसाद कुशवाहा जी मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और अक्टूबर नवम्बर में किसान रबी फसल जौ,गेहूं,सरसों,चना और मसूर की खेती मुख्य रूप से करते हैं।इन फसलों को तैयार करने में किसान एक जुआ के सामान अपने आप को तन,मन और धन से लगा देतें हैं। लेकिन सरकार की ओर से जो भी योजनाएँ चलाई जाती है, उन सभी योजनाओं से किसानों को वंचित कर दिया जाता है।इन योजनाओं को जनता के बीच में वितरण करने के बजाय बिचौलियों के द्वारा पंचायत स्तर में वितरण करने का कार्य दिया जाता है वो केवल सिमित लोगों के पास ही रह जाती है। आम जनता के पास इसकी जानकारी नहीं हो पाने के कारण किसान अच्छी फसल लगाने से वंचित रह जाते हैं,और प्रखंड स्तर में भी पदाधिकारी केवल सिमित लोगों को ही योजना की जानकारी देते हैं।अत: इस ओर सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है तभी किसानों को उनका हक़ मिल पायेगा।
जिला धनबाद बाघमारा प्रखंड से बीरबल महतो जी मोबाईल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है ,यहाँ के 70 % लोग कृषि पर निर्भर करते हैं। अक्टूबर ,नवम्बर में रबी फसल किया जाता है। जिसमे जौ,गेहूं,चना,सरसो आदि उगाये जाते हैं। परन्तु खेती कृषकों के लिए एक जुआ है क्योकि अगर फसल नहीं ऊगा तो उनके जो मूलधन हैं वो खो जाता है। किसानो को इससे बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ता है। अतः झारखण्ड सरकार को किसानो का मदद करना चाहिए और पंचायत स्तर पर उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध करवाना चाहिए।हालांकि सरकार द्वारा किसानों के लिए बीज मुहैया कराइ जाती है लेकिन वह उन्नत किस्म का नहीं होता है और जो बीज मुहैया कराइ जाती है वह किसानों के लिए पर्याप्त भी नहीं हो पाता है।
जिला बोकारो पेटरवार से सुषमा कुमारी जी मोबाइल वाणी के माध्यम से बताती हैं कि बैंक द्वारा कृषकों को रबी फसल के लिए सस्ते दरों में बीज मुहैया नहीं कराई जाती है। ऐसे में जो किसान , खेती कार्य करतें हैं वे इन सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं।इसका मुख्य वजह यह है कि कृषक बैंक को कमीशन नहीं दे पातें हैं।जिस वजह से किसान सस्ते दरों में मिलने वाले सभी सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं।कई बैंकों में यह देखा जाता है कि बैंक में बिचौलिया बैठे रहते हैं,जो किसानों का हक़ मार लेते हैं । और जब जाँच की बात आती है, तो प्रबंधक द्वारा भी बैंक को ही जाँच का जिम्मा सौंप दिया जाता हैं।जब रबी फसल लगाने का समय आता है तो सरकार की ओर से मिलने वाली सुविधाओं से वंचित किसान मजबूर और बेबस नज़र आते हैं। कृषक अत्यधिक संवेदनशील होते हैं जिसके कारण बिचौलिया और बैंक इसका लाभ उठाते हैं।वे कहती हैं कि कई पंचायतों में सरकार द्वारा सिचाई के लिए कोई सुविधा नहीं दी गई है जिससे किसानों को अपने स्तर से कुआँ और तालाब का निर्माण कर खेती करना पड़ता है।आए दिन यह सुनने को मिलता है कि सरकार द्वारा किसानो को रबी फसल में हुई नुकसान का मुआवजा दिया जाएगा।लेकिन ऐसा कुछ होते नजर नहीं आता है। और गौर करने वाली बात हैं कि किसानों को अपने नुकसान की भरपाई लेने के लिए कार्यालयों की चक्कर काटने पड़ते हैं। साथ ही इसमें किसानों का जितना नुकसान नहीं होता उससे कहीं ज्यादा पैसा उस नुकसान को कार्यालयों से प्राप्त करने में खर्च हो जाता है।
जिला हज़ारीबाग़ बिष्णुगढ प्रखंड से राजेश्वर महतो मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। और देश की लगभग 70% आबादी आज भी कृषि पर ही निर्भर हैं। हमारे देश में मौसम के आधार पर रबी एवं खरीफ फसल लगातें हैं।धान का फसल पुरे झारखण्ड में लगाया जाता है और अच्छे उत्पादन होने की उम्मीद की जाती है।कृषक धान के बाद गेहूं,चना,जौ की खेती करते हैं।किसान बंधू अक्टूबर-से दिसंबर तक फसल की बुवाई करते हैं।और मार्च अप्रैल में गेहूं की कटाई करते हैं। इस बीच किसानों को कई तरह के कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता है।सबसे पहले किसानों को बीज,खाद्य,दवा और डीजल बाजार से खरीदना पड़ता हैं। इसका मुख्य वजह है कि प्रखंड में पैक्स द्वारा किसानों के मांग के अनुसार पूर्ति नहीं की जाती है। पैक्स से लाभ वही लोग उठा पाते हैं , जो पैक्स के नजदीक होते हैं। साथ ही राज्य में सिचाई की असुविधा पाई जाती है। बावजूद इसके किसान खेती करते हैं। लेकिन गौर करने वाली बात तो यह हैं कि खेतों में लगे फसलों को लावारिस जानवरों द्वारा बरबाद कर दी जाती हैं।दूसरी ओर द्रेक्टर से खेतों की जुताई में भी खर्च आती हैं लेकिन डीजल की सब्सिडी किसानों को नहीं मिल पता है। यही वजह है कि आज भी किसान पूंजीपतियों के हांथों कठपुतली बनने के लिए मजबूर हो जाते हैं । वे कहते हैं कि किसानों की समस्या यही पर ख़त्म नहीं होती बल्कि वे ठण्ड,गर्मी और बरसात में अपने जान को जोखिम में डाल कर फसल का उत्पादन करते हैं इसके बाद भी किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता है।अतः वे कहते हैं कि कैम्प लगा कर और श्रम विभाग से मिल कर फसलों का बीमा करनी चाहिए।जिसमे किसानों को प्रीमियम की राशि नहीं देना पड़ता है ।
जिला धनबाद के तोपचांची प्रखंड से रविंद्र महतो मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां के लगभग 70% लोग कृषि पर निर्भर रहते हैं। खेती करने वाले किसान रबी और खरीफ दोनों फसलों की खेती करते हैं।तोपचांची प्रखंड में भी रबी फसलों की खेती की जाती है।कहीं-कहीं आलू,चना और सरसों की भी खेती की जाती है। वे कहते हैं कि तोपचांची प्रखंड में मिटटी की गुणवक्ता और सिचाई की सुविधा होने के बावजूद सरकारी तंत्र के उदासीनता के कारण आज लोग कृषि से दूर होते नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि आज किसानों को कई तरह की सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती है बावजूद इसके किसानों को कोई भी लाभ नहीं मिल पाता है। किसान अपने पैसे खर्च कर खेती करते हैं लेकिन खेतों में लगे फसल को सुरक्षित नहीं रख पाते हैं । और कई बार तो किसानों के फसलें सिर्फ इसलिए नष्ट हो जाती है क्योंकि गांव के कुछ दबंग व्यक्तियों द्वारा अपने आवारा पशुओं को खुले में छोड़ दिया हैं ,जो खेतों में लगी फसलों को नष्ट कर देता है। इस बात से त्रस्त होकर कई बार किसान मुखिया से इसकी शिकायत भी करते हैं , लेकिन मुखिया द्वारा किसानों की इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।
प्रखंड बड़कगांव,जिला हजारीबाग, से रितेश राज जी मोबाईल वाणी के माध्यम से कहते हैं कि झारखण्ड एक कृषि प्रधान राज्य है। यहाँ के लगभग 50 % लोग किसान है। यहाँ के किसान खेती करने के लिए पूरी तरह से मानसूनी वर्षा पर निर्भर रहते हैं । रबी फसल के बारे में उनका कहना है कि ये मानसून के आधार पर पैदा होता है। अगर मानसून में बदलाव आई तो सारी फसल नष्ट हो जाती है। और किसानों का सारा मेहनत पानी में बह जाता है। लेकिन गौर करने वाली बात तो यह है कि सरकार की तरफ से किसानों को किसी भी तरह का मुवाजा नहीं दी जाती है। साथ ही हर गांव में किसानो के मदद के लिए कृषि मित्रों की नियुक्ति की गई है लेकिन कृषि मित्र के द्वारा भी किसानों को बीज मुहैया नहीं कराइ जाती है। इसके अलावा किसान जो बीमा करवाते हैं उसका भी लाभ किसानों को नहीं मिलता है।वे कहते हैं कि शायद यही वजह है कि राज्य में किसानों की स्थिति दिन बा दिन सुधरने के बजाये ख़राब होती जा रही है । अत: वे सरकार से आग्रह करते हैं कि इन सभी समस्याओं से किसानो को मुक्ति दिलाने का कोशिश किया जाए, ताकि किसानों की स्थिति में सुधार आये।
जैसा की हम सभी जानते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है । और यहाँ के लगभग 70 प्रतिशत लोग आज भी अपनी जीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं । साथ ही देश की अर्थव्यवस्था में कृषि का अहम योगदान है। दोस्तों ,हमारे देश में मौसम के आधार पर विभिन्न तरह की फसलें उगाई जाती है और इन्हीं में से एक है रवि फसल। रवि फसल की बुवाई किसानों द्वारा हर वर्ष अक्टूबर -नवम्बर के महिनों में की जाती है। इस मौसम में किसान मुख्य रूप से जौ,गेहूँ,चना,मसूर और सरसो की फसल लगाते हैं। श्रोताओं, किसानों के लिए खेती एक जुआ के सामान होती है जिसमें अक्सर किसानों को कई तरह के प्राकृतिक नुकसान का सामना करना पड़ता है।हालांकि सरकार द्वारा इन समस्याओं से निपटने हेतू कृषकों के लिए कई योजनाएँ भी बनाई जाती है। दोस्तों ,हम आपसे जानना चाहते हैं कि रवि फसल की खेती करते समय कृषकों को किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है...? क्या सरकार द्वारा कृषकों के लाभ के लिए बनाई गई योजनाओं का पूरा लाभ उन्हें सही समय पर और आसानी से मिल पाता है...? क्या लैम्स द्वारा किसानों को रवि फसल के लिए सस्ते दरों में बीज उपलब्ध कराइ जाती है...? आपके पंचायत में क्या रवि फसलों की सिचाई के लिए सुविधा है ?साथ ही क्या किसानों को हुई रवि फसल में नुकसान का भरपाई पंचायत स्तर से भी किया जाता है...?
