झारखण्ड राज्य के रांची जिला से सिद्धार्थ राज मंडल मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि कम बारिश और सूखे जैसी स्थिति में, फसल को बचाने और मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए खेतों में ट्रेंच खोदना एक प्रभावी जल संरक्षण तकनीक है। यह विधि वर्षा जल को इकट्ठा करती है, मिट्टी के क्षरण को कम करती है, और पानी की कमी के दौरान फसलों को आवश्यक नमी प्रदान करती है।

झारखण्ड राज्य के लोहरदगा जिला के भंडरा प्रखंड से पुष्पा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि इन्होने मोबाइल वाणी पर बारिश के पानी बचाने के बारे में सुना और ये जानकारी इनको बहुत अच्छी लगी। भंडरा प्रखंड के कई किसानों ने खेतों में सरकार की मदद से छोटे - छोटे डोभा का निर्माण सिंचाई के लिए किया है।सरकार द्वारा डोभा निर्माण का पहल बहुत अच्छा और सराहनीय है।इससे किसानों की आमदनी बढ़ी है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी हो रहे हैं। साथ ही गर्मी के मौसम में होने वाली पानी की किल्लत दूर हुई है। अब गर्मी में भी डोभा में पानी रहता है। जिससे पशुओं को लोग पानी पीला पाते हैं।बारिश के पानी को बचाने का पहल अन्य क्षेत्रों में भी होना चाहिए।

झारखण्ड राज्य के रांची जिला से रिम्पी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि बदलते मौसम से खेती पर बहुत असर पड़ता है। किसान इन नई परिस्थितियों में अपनी फसल को संभालने के लिए कई तरह की कोशिशें कर रहे हैं, जैसे फसल चक्र में बदलाव किसान अब ऐसी फसलें चुन रहे हैं जो कम पानी में या कम समय में तैयार हो जाये। जल-प्रबंधन पर ज़ोर दिया जा रहा है। टपक सिंचाई और स्प्रिंकलर जैसी तकनीकों से पानी की बचत की जा रही है।मौसम-अनुकूल बीज का प्रयोग अधिक तापमान, सूखा या बाढ़ सहने वाली किस्मों के बीज अपनाए जा रहे हैं। तकनीक का सहारा ले कर फसलों को बचाने का प्रयास किया जाता है। मौसम की जानकारी, मोबाइल ऐप्स और कृषि सलाह सेवाओं से किसान समय पर निर्णय ले पा रहे हैं। मिट्टी की सेहत पर ध्यान जैविक खाद और प्राकृतिक खेती से मिट्टी की नमी और उपजाऊपन बनाए रखने की कोशिश हो रही है। हालाँकि चुनौतियाँ अभी भी बड़ी हैं, लेकिन किसान अपने अनुभव, मेहनत और नई तकनीकों के सहारे बदलते मौसम के साथ तालमेल बैठाने की कोशिश कर रहे हैं।

झारखण्ड राज्य के रांची जिला से शुभम कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि कभी सूखा तो कभी बाढ़ जलवायु परिवर्तन भारत में एक बड़ी त्रासदी है जिससे कृषि, अर्थव्यवस्था और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होते हैं।सूखे से फसलें, पीने के पानी की कमी और भुखमरी पैदा होती है। दूसरी ओर, बाढ़ जान-माल का नुकसान, बुनियादी ढांचे का विनाश और बीमारियां लाती है।इन विपरीत स्थितियों से बड़े पैमाने पर पलायन और आर्थिक संकट होता है। सूखा के कारण होने वाली परेशानियां:कृषि और खाद्य संकट,जल संकट,आर्थिक नुकसान,स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं,पर्यावरण प्रभाव अदि। बाढ़ के कारण होने वाली परेशानियां:,जन-जीवन और संपत्ति,बुनियादी,ढांचे का विनाश,स्वास्थ्य समस्याएं,कृषि की बर्बादी,पलायन आदि।

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