झारखण्ड राज्य के खूँटी जिला के तोरपा प्रखंड से सुमित टोपनो ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि मोबाइल वाणी पर प्रसारित 'मौसम का बदलता मिज़ाज' कार्यक्रम का पहला एपिसोड एक बार में समझ नही आता है। मगर दोबारा सुनने पर अच्छी तरह समझ आता है।इस एपिसोड से इनको बहुत कुछ सीखने और जानने को मिला। एपिसोड में सेमियालता और लाह की खेती के बारे में विस्तृत जानकारियां दी गई है।सेमियालता का पौधा सात फीट ऊँचा होता है और इसे बढ़ने में एक से दो साल लगता है।समय के साथ जैसे-जैसे लाह का दाम बढ़ रहा है,इसकी खेती करना फायदे का सौदा हो सकता है।जब हम खुद लाह की खेती करेंगे तभी हम अपने दोस्तों और जानने वालों को इसके लाभ और खेती के बारे में बता पाएंगे।
झारखण्ड राज्य के रांची से शेखर मंडल ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि कभी सूखा तो कभी बाढ़भारतीय किसानों के लिए एक बड़ी प्रासदी है। जिससे फसलों के बर्बाद होने पर वे भारी कर्ज और मानसिक तनाव में आ जाते है बेमौसम बारिश बाढ़ और सूखे के कारण कृषि उपज घट रही है और खेती जोखिम भरी होती जा रही है। इससे ना केवल आर्थिक नुकसान होता है बल्कि किसानों के अस्तित्व पर भी संकट आ जाता है। इन समस्याओं से निपटने के लिए लोगों को सामूहिक रूप से ग्राम सभा में जाना चाहिए और अपनी समस्याओं को हल करने का आग्रह करना चाहिए।
झारखण्ड राज्य के सिमडेगा ज़िला से सुप्रिया मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए सही फसल का चुनाव बहुत जरूरी हो गया है। मौसम का पैटर्न अनिश्चित है जैसे कभी सूखा, कभी बाढ़। ऐसे में किसानों को ऐसी फसलें अपनानी चाहिए जो कम पानी, गर्मी या नमी जैसी परिस्थितियों में भी अच्छी उपज दें सके । उन्हें सूखा और ताप-सहिष्णु फसलें जैसे ज्वार, बाजरा या चना अपनानी चाहिए। वर्षा जल संचयन से पानी को संरक्षित रखा जा सकता है ताकि जरूरत पड़ने पर सिंचाई की जा सके।मिश्रित खेती अपनाने से एक फसल खराब होने पर दूसरी फसल से नुकसान की भरपाई संभव होती है।किसानों को फसल बीमा योजनाओं से भी जुड़े रहना चाहिए ताकि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
झारखण्ड राज्य के सिमडेगा ज़िला से सुप्रिया मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि सेमियालता की खेती करने से किसानों को लाभ हो सकता है। क्योंकि यह कम उपजाऊ भूमि में आसानी से उग जाता है। सेमियालता 7 फ़ीट से 8 फ़ीट तक ही बढ़ता है तो इसकी कटाई में ज़्यादा समस्या नहीं होगी। इसकी खास बात है कि जब सेमियालता के तनो को काटा जाता है तो यह दोबारा उगता है जिससे बार बार बुवाई की कोई ज़रुरत नहीं होती है।सेमियालता मिटटी की उर्वरता को भी बढ़ाता है। किसानों के लिए यह एक अच्छा आय का श्रोत होगा ।
झारखंड राज्य के लातेहार जिला के चंदवा प्रखंड के लोहसीना गाँव से सविता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि इनके गांव में लाह और पलास की खेती की जाती है ।यहां के किसान बेड़ और पलास के पेड़ पर लाह की खेती करती हैं ।इस गांव के लोग लाह की खेती कर के अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं ।कई लोगों के पास अपना लाह और पलास का पेड़ नहीं हैं जिसके कारण वे लोग दूसरे के लाह के पेड़ पर साझेदारी में माध्यम से खेती करते हैं और लाभ कमाते हैं । लाह की खेती लोग अधिक मात्रा में कर रहे हैं और लाभ कमा रहे हैं ।
झारखंड राज्य के लोहरदगा जिला के कायरो प्रखंड से सुनीता देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि बार बार मौसम के बदलने के कारण इसका प्रभाव खेती और किसानों पर पड़ता है ।इस वर्ष अधिक ठंड पड़ने के कारण मटर और आलू का फसल बर्बाद हो गया ।जिसके कारण किसानों को आर्थिक छती हुई ।अचानक गर्मी और ठंड के कारण किसानों को दोहरा मार झेलना पड़ता है ।जब बारिश ठीक से नहीं होती है तो किसान को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलता है ।उनको अन्य तरीकों से पानी का व्यवस्था करना पड़ता है ।
झारखण्ड राज्य के लोहरदगा जिला के भंडरा प्रखंड से पुष्पा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि इन्होने मोबाइल वाणी पर बारिश के पानी बचाने के बारे में सुना और ये जानकारी इनको बहुत अच्छी लगी। भंडरा प्रखंड के कई किसानों ने खेतों में सरकार की मदद से छोटे - छोटे डोभा का निर्माण सिंचाई के लिए किया है।सरकार द्वारा डोभा निर्माण का पहल बहुत अच्छा और सराहनीय है।इससे किसानों की आमदनी बढ़ी है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी हो रहे हैं। साथ ही गर्मी के मौसम में होने वाली पानी की किल्लत दूर हुई है। अब गर्मी में भी डोभा में पानी रहता है। जिससे पशुओं को लोग पानी पीला पाते हैं।बारिश के पानी को बचाने का पहल अन्य क्षेत्रों में भी होना चाहिए।
झारखण्ड राज्य के रांची ज़िला से दिव्या मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि सेमियालता की खेती करने से लोगों को लाभ हो सकता है। यह कम उपजाऊ भूमि में भी आसानी से उग जाता है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करता है।ये 7 फ़ीट तक बढ़ता है तो ऐसे में इसकी कटाई करने में ज़्यादा समस्या नहीं होती है। लाख के लिए जब इसके तनो को काटा जाता है तो दोबारा यह उगता है जिससे बार बार बुवाई की कोई ज़रुरत नहीं होती है।
झारखण्ड राज्य के रांची ज़िला से दिव्या मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि उन्हें कार्यक्रम सुन कर अच्छा लगा।वो कहती है कि लोगों को एकजुट हो कर अपने जमीन जंगल जल को बचाने का प्रयास करना चाहिए। इससे आने वाले भविष्य के लिए पर्यावरण सुरक्षित होगा।सभी युवाओं को आगे आना चाहिए और जल जंगल जमीन की समस्याओं और समाधान में विचार विमर्श करना चाहिए। युवाओं को एक प्लान भी बनाना चाहिए और तब तक प्रयास करते रहना चाहिए जब तक उनका प्लान जीपीडीपी में शामिल न हो जाए। यह कार्य को एकजुटता में ही करना चाहिए ताकि उनकी जीत हो सके
झारखण्ड राज्य के जमशेदपुर से माया चौबे ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जलवायु परिवर्तन से होने वाले हानि से बचने के लिए सभी ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी होनी चाहिए और योजनाओं का लाभ लेने के लिए सामूहिक प्रयास करनी चाहिए । ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) के माध्यम से पारदर्शी कार्यप्रणाली, गाँव-स्तर पर शिविरों का आयोजन, डिजिटल साक्षरता, सीएससी केंद्रों का उपयोग और स्थानीय भाषा में जागरूकता प्रसार सबसे प्रभावी उपाय हैं। ग्राम सभाओं में भागीदारी सुनिश्चित करना और स्थानीय नेताओं को शामिल करना भी जरुरी है।अपनी जिम्मेदारी समझें और गांव के विकास में अपनी अहम भूमिका निभाएं।
