झारखंड राज्य के लातेहार जिला के चंदवा प्रखंड के लोहसीना गाँव से सविता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि इनके गांव में लाह और पलास की खेती की जाती है ।यहां के किसान बेड़ और पलास के पेड़ पर लाह की खेती करती हैं ।इस गांव के लोग लाह की खेती कर के अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं ।कई लोगों के पास अपना लाह और पलास का पेड़ नहीं हैं जिसके कारण वे लोग दूसरे के लाह के पेड़ पर साझेदारी में माध्यम से खेती करते हैं और लाभ कमाते हैं । लाह की खेती लोग अधिक मात्रा में कर रहे हैं और लाभ कमा रहे हैं ।

झारखंड राज्य के लोहरदगा जिला के कायरो प्रखंड से सुनीता देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि बार बार मौसम के बदलने के कारण इसका प्रभाव खेती और किसानों पर पड़ता है ।इस वर्ष अधिक ठंड पड़ने के कारण मटर और आलू का फसल बर्बाद हो गया ।जिसके कारण किसानों को आर्थिक छती हुई ।अचानक गर्मी और ठंड के कारण किसानों को दोहरा मार झेलना पड़ता है ।जब बारिश ठीक से नहीं होती है तो किसान को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलता है ।उनको अन्य तरीकों से पानी का व्यवस्था करना पड़ता है ।

झारखण्ड राज्य के लोहरदगा जिला के भंडरा प्रखंड से पुष्पा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि इन्होने मोबाइल वाणी पर बारिश के पानी बचाने के बारे में सुना और ये जानकारी इनको बहुत अच्छी लगी। भंडरा प्रखंड के कई किसानों ने खेतों में सरकार की मदद से छोटे - छोटे डोभा का निर्माण सिंचाई के लिए किया है।सरकार द्वारा डोभा निर्माण का पहल बहुत अच्छा और सराहनीय है।इससे किसानों की आमदनी बढ़ी है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी हो रहे हैं। साथ ही गर्मी के मौसम में होने वाली पानी की किल्लत दूर हुई है। अब गर्मी में भी डोभा में पानी रहता है। जिससे पशुओं को लोग पानी पीला पाते हैं।बारिश के पानी को बचाने का पहल अन्य क्षेत्रों में भी होना चाहिए।

झारखण्ड राज्य के रांची ज़िला से दिव्या मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि सेमियालता की खेती करने से लोगों को लाभ हो सकता है। यह कम उपजाऊ भूमि में भी आसानी से उग जाता है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करता है।ये 7 फ़ीट तक बढ़ता है तो ऐसे में इसकी कटाई करने में ज़्यादा समस्या नहीं होती है। लाख के लिए जब इसके तनो को काटा जाता है तो दोबारा यह उगता है जिससे बार बार बुवाई की कोई ज़रुरत नहीं होती है।

झारखण्ड राज्य के रांची ज़िला से दिव्या मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि उन्हें कार्यक्रम सुन कर अच्छा लगा।वो कहती है कि लोगों को एकजुट हो कर अपने जमीन जंगल जल को बचाने का प्रयास करना चाहिए। इससे आने वाले भविष्य के लिए पर्यावरण सुरक्षित होगा।सभी युवाओं को आगे आना चाहिए और जल जंगल जमीन की समस्याओं और समाधान में विचार विमर्श करना चाहिए। युवाओं को एक प्लान भी बनाना चाहिए और तब तक प्रयास करते रहना चाहिए जब तक उनका प्लान जीपीडीपी में शामिल न हो जाए। यह कार्य को एकजुटता में ही करना चाहिए ताकि उनकी जीत हो सके

झारखण्ड राज्य के जमशेदपुर से माया चौबे ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जलवायु परिवर्तन से होने वाले हानि से बचने के लिए सभी ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी होनी चाहिए और योजनाओं का लाभ लेने के लिए सामूहिक प्रयास करनी चाहिए । ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) के माध्यम से पारदर्शी कार्यप्रणाली, गाँव-स्तर पर शिविरों का आयोजन, डिजिटल साक्षरता, सीएससी केंद्रों का उपयोग और स्थानीय भाषा में जागरूकता प्रसार सबसे प्रभावी उपाय हैं। ग्राम सभाओं में भागीदारी सुनिश्चित करना और स्थानीय नेताओं को शामिल करना भी जरुरी है।अपनी जिम्मेदारी समझें और गांव के विकास में अपनी अहम भूमिका निभाएं।

झारखण्ड राज्य के बोकारो जिला के कसमार से प्रकाश कुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि ग्राम पंचायत विकास योजना या जीपीडीपी सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है।जिसके माध्यम से गांव के विकास की योजनाएं बनाई जाती है। कौन सी योजनाएं किस के जरुरत के हिसाब से होगी?उस पे ग्राम पंचायत निर्णय लेता है।18 साल से ऊपर के व्यस्क ग्राम सभा के सदस्य होते हैं। जब भी किसी पंचायत में जीपीडीपी योजना बनाए या ग्राम सभा हो,उसमें भाग लेना चाहिए।प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल कैसे हो सकता है? किन्हें सामाजिक सुरक्षा चाहिए ?कहां नल्ली , गल्ली अस्पताल स्कुल बनना चाहिए ?इन सभी की प्लानिंग हमारे पंचायत में ही होती है।इसलिए ग्राम पंचायत के कार्यक्रमों और ग्राम सभा की बैठकों में भाग लेकर अपने पंचायत और गांव के विकास में अपना भूमिका निभाना चाहिए

झारखण्ड राज्य के जमशेदपुर से आर्य राज शुक्ला ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि किसानों को खेती के आलावा आय के दूसरे विकल्पों पर भी ध्यान देना होगा। क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण कभी सूखा और कभी बाढ़ से फसलों को बहुत नुकसान होता है। सरकार द्वारा कई योजनाएं किसानों को सहायता प्रदान कर रही हैं।जैसे - महिलाओं के लिए,झारखंड सरकार स्वयं सहायता समूहों  को लाह उत्पादन से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष सहायता प्रदान कर रही है। झारखंड लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के माध्यम से लाह की खेती का प्रशिक्षण और वन विभाग के साथ समन्वय कर बगान विकसित किए जा रहे हैं। जीविका के माध्यम से महिलाओं को बैंकिंग लिंकेज के जरिए कम ब्याज दर पर आसानी से ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।आधुनिक तरीके से लाह की खेती के लिए वनोपज मित्र और अन्य सामुदायिक कैडरों द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है। लाह की चोरी रोकने के लिए बगानों की घेराबंदी और सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।समूह की महिलाओं को केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि लाह से उत्पाद बनाने का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना और उन्हें स्वरोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करना है।

झारखण्ड राज्य के रांची जिला से रिम्पी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि बदलते मौसम से खेती पर बहुत असर पड़ता है। किसान इन नई परिस्थितियों में अपनी फसल को संभालने के लिए कई तरह की कोशिशें कर रहे हैं, जैसे फसल चक्र में बदलाव किसान अब ऐसी फसलें चुन रहे हैं जो कम पानी में या कम समय में तैयार हो जाये। जल-प्रबंधन पर ज़ोर दिया जा रहा है। टपक सिंचाई और स्प्रिंकलर जैसी तकनीकों से पानी की बचत की जा रही है।मौसम-अनुकूल बीज का प्रयोग अधिक तापमान, सूखा या बाढ़ सहने वाली किस्मों के बीज अपनाए जा रहे हैं। तकनीक का सहारा ले कर फसलों को बचाने का प्रयास किया जाता है। मौसम की जानकारी, मोबाइल ऐप्स और कृषि सलाह सेवाओं से किसान समय पर निर्णय ले पा रहे हैं। मिट्टी की सेहत पर ध्यान जैविक खाद और प्राकृतिक खेती से मिट्टी की नमी और उपजाऊपन बनाए रखने की कोशिश हो रही है। हालाँकि चुनौतियाँ अभी भी बड़ी हैं, लेकिन किसान अपने अनुभव, मेहनत और नई तकनीकों के सहारे बदलते मौसम के साथ तालमेल बैठाने की कोशिश कर रहे हैं।

झारखण्ड राज्य के बोकारो जिला के कसमार प्रखंड से रेखा देवी कहती हैं कि जलवायु परिवर्तन आज के समय में बहुत बड़ी समस्या है। जलवायु परिवर्तन के कारण भूमि का जल स्तर काफी नीचे चला गया है। इसके साथ ही बोकारो औद्योगिक जिला होने के कारण बोकारो स्टील प्लांट,कोलयरी कारखाना,थर्मल प्लांट से होने वाले प्रदूषण का मार ग्रामीण इलाकों के लोगों को झेलना पड़ता है। इसलिए पूरे समुदाय और ग्रामीणों को मिल कर इन समस्याओं से निकलने के लिए इस पर कार्य कर के बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए