बाल विवाह मुक्त झारखण्ड अभियान इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले दस लक्की विजेता को अभियान के अंत में मिलेगा पचास रूपए का मुक्त मोबाइल रिचार्ज

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बाल विवाह मुक्त झारखंड अभियान की पिछली कड़ी में यह चर्चा की गई थी कि, कैसे हमारे समाज में चल रहे लिंग भेदभाव बाल विवाह का एक बड़ा कारण बन गया है। पर क्या कोई उपाय नहीं है, इस भेदभाव को दूर करने का। इस विषय पर चाइल्ड इन नीड इंस्टीयूट के उपनिदेशक रंजन पांडा जी ने बताया कि, लिंग चयन के आधार पर जो गर्भपात होती है, वो मुख्य रूप से जब महिलाएँ गर्भावस्था के दौरान बेटा-बेटी की चाह में लिंग जाँच करवातीं हैं और उसके आधार पर जब गर्भपात करवातीं हैं तो उसे लिंग चयन गर्भपात कहा जाता है। यह मुख्य रूप से पिछड़े वर्ग के लोग करते हैं जो राजस्थान,झारखण्ड या बिहार के लोग होते हैं।तो श्रोताओं आपके अनुसार लड़का लड़की के बीच इस सामाजिक भेदभाव का और क्या-क्या कारण है।

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आज हमारा देश आज़ाद है तो सिर्फ हमारे शहीद हुए वीरों की वजह से, कई सारे छोटे-बड़े गाँवो से वीर जवान थे जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपनी कुर्बानी दे दी। दोस्तों, क्या हम शहादत देनेवाले जवानों के परिवारों के बारे में कुछ भी जानते हैं...? या यु कहें तो कभी जानने की कोशिश भी नहीं करते हैं आपके क्षेत्र के शहादत देने वाले जवानों के परिवारों की स्थिति कैसी है...? क्या उन्हें वह हर योजनाओं का लाभ मिलता है...? जिसे प्रत्येक वर्ष सरकार देने की घोषणा करती है...? क्या सरकार उन गाँव के लोगों पर ध्यान दे रही है यदि हाँ तो फिर कितना...? ऐसी क्या वजह है जिसके कारण सरकार शहीद परिवारों एवं उन्हें गांवों को अनदेखा कर रही है..?आपको क्या लगता क्या लोगो के साथ-साथ सरकार शहादत देने वाले जवानों और उनके गाँव को भूल चुकी है ? कई ऐसे जवान हैं जो वीरगति को प्राप्त हो चुके है लेकिन आज उनके परिवार वालो को देखने वाला कोई भी नहीं है।उन गाँवो की स्थिति में सुधार लाने के लिए सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए...? साथ ही आम जनता को भी ऐसा क्या करना चाहिए जिससे शहादत देनेवाले जवानों के परिवारों की स्थिति में सुधार हो और वो भी विकास की डगर में चल सकें।

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बाल विवाह मुक्त झारखंड अभियान की पिछली कड़ी में बात की गई थी, बाल विवाह से जुड़े क़ानूनी मुद्दों के बारे में। इस चर्चा को आगे बढ़ाते हुए आज की कड़ी में यह जानने की कोशिश करेंगे की,बाल विवाह जैसी कुप्रथा का जड़ हमारे समाज की लिंग भेदभाव जैसी परम्पराओं में छुपी हुई है।क्योंकि लड़का-लड़की के बीच भेदभाव की परम्परा तो यह सिखाती है, की लड़कियां बोझ होतीं हैं और उनकी शादी करा कर जल्दी से इस बोझ से छुटकारा पाना है। लिंग भेद यानी किसी के लिंग के आधार पर उससे भेदभाव करना।लड़का और लड़की दोनों शारीरिक रूप से अलग-अलग प्रजाति के हैं, और यह फर्क प्रकृति ने अपने नियम से बनाए हैं।ताकि मनुष्य प्रजाति अपना वंश बढ़ा सके और इस धरती पर अपना अस्तित्व कायम रख सके। तो साथियों, आपके समुदाय में लड़का और लड़की में क्या बराबरी का दर्जा दिया जाता है।